छत्तीसगढ़ जन-प्रतिष्ठा व्याख्यान माला
सूचना का अधिकार देश और समाज को शक्तिशाली बनाने का औजार : श्री वजाहत हबीब उल्लाह
विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक शासन की जरूरत : श्री शेखर दत्त
सूचना के अधिकार कानून पर बेहतर अमल का प्रयास : डॉ. रमन सिंह
आम जनता को मिला शासन-प्रशासन में झांकने का अधिकार : श्री सत्यानंद मिश्र


मुख्य वक्ता की आसंदी से श्री वजाहत हबीब उल्लाह ने स्थानीय नवीन विश्राम भवन के सभागृह में आयोजित व्याख्यान माला में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के लागू होने से अब सरकारी काम-काज में जनता की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित हो रही है। इससे लोकतंत्र भी मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून के सही क्रियान्वयन से देश शक्तिशाली होगा, देश की जनता शक्तिशाली होगी और सरकार को भी इससे शक्ति मिलेगी। यह देश जनता और सरकार के साथ-साथ समाज के भी सशक्तिकरण का कानून है। श्री वजाहत हबीब उल्लाह ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान का प्रवाह जारी रहना चाहिए। उन्होंने इसके लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की खास तौर पर प्रशंसा की और उन्हें राज्य में सूचना का अधिकार कानून के बेहतर क्रियान्वयन के लिए बधाई दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने कहा कि पूरी दुनिया में लोकतंत्र ही एक सर्वश्रेष्ठ शासन प्रणाली है। शासन और जनता के बीच दीवार कम करके लोकतंत्र को और ज्यादा सुदृढ़ बनाया जा सकता है। श्री दत्त ने कहा कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता, जागरूकता और जवाबदेही किसी भी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की जरूरत होती है। सूचना का अधिकार कानून लोकतंत्र की इन्ही भावनाओं पर आधारित है। इसी कड़ी में राज्यपाल श्री दत्त ने सिटीजन चार्टर अथवा नागरिक घोषणा पत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि इसमें प्रत्येक विभाग की सार्वजनिक सेवाओं के अंतर्गत जनता से प्राप्त आवेदनों के निराकरण के लिए अलग-अलग समय-सीमा भी निर्धारित है। इस समय सीमा में कार्य नहीं होने पर आवेदक आगे शिकायत कर सकता है। श्री दत्त ने कहा कि इसी तारतम्य में सूचना का अधिकार कानून प्रत्येक नागरिक को सरकारी काम-काज और दस्तावेजों के बारे में जानने का अधिकार देता है। सरकारों की सफलता के लिए यह जरूरी है कि उनके प्रति जनता में आस्था और विश्वास हो, तभी सरकार के कार्य ज्यादा परिणाम मूलक होंगे। जनता का विश्वास अर्जित करके ही कोई भी सरकार अपने कार्यों में गति ला सकती है। श्री दत्त ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की इस प्रसिध्द उक्ति का भी उल्लेख किया कि अधिकार प्राप्त व्यक्ति को अपने किसी अधिकार का उपयोग करने से पहले यह गंभीरता से सोचना होगा कि इससे किसी गरीब व्यक्ति का क्या भला हो सकता है और समाज पर उसका क्या प्रभाव होगा। श्री दत्त ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून सरकारी काम करने वाले और सरकारी दफ्तरों में रहकर भी काम नहीं करने वाले दोनों ही तरह के शासकीय सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने व्याख्यान माला के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार कानून का अधिक से अधिक और बेहतर से बेहतर क्रियान्वयन हो, इस दिशा में हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा। व्याख्यान माला में भारत के मुख्य सूचना आयुक्त श्री सत्यानंद मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए। श्री मिश्र ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून आम जनता को शासन-प्रशासन के भीतर झांकने का मौका देता है। श्री मिश्र ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक मंत्रालयों और कलेक्टोरेट आदि सरकारी कार्यालयों के भीतर क्या कुछ हो रहा है, यह एक रहस्य के आवरण में रहता था, लेकिन अब सूचना का अधिकार कानून लागू हो जाने से सब कुछ पारदर्शी होता जा रहा है। भारत के मुख्य सूचना आयुक्त ने यह भी कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम एक अत्यंत अनौपचारिक कानून है। हमारे सूचना आयोग का कार्यालय भी बिना किसी तामझाम के सहज-सरल ढंग से चलता है। यह इसलिए है कि लोग आसानी से हम तक पहुंच कर इस कानून का लाभ ले सकें। स्वागत भाषण संचालक जनसम्पर्क श्री उमेश द्विवेदी ने दिया। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन छत्तीसगढ़ जनप्रतिष्ठा व्याख्यान माला आयोजन समिति के संयोजक श्री कनक तिवारी ने किया। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. पाण्डेय, कुशाभाऊ ठाकरे जनसंचार एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति श्री सच्चिदानंद जोशी, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के सदस्य श्री एस.के. तिवारी, सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलपति श्री एस.के. वर्मा, पूर्व सांसद श्रीमती करूणा शुक्ला और श्री प्रदीप गांधी तथा पूर्व मंत्री विधान मिश्रा तथा बड़ी संख्या में नागरिक इस अवसर पर मौजूद थे।

