मंत्रिपरिषद के निर्णय
रायपुर, 13 अप्रैल 2011
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। बैठक में निम्नानुसार विषयों पर चर्चा की गई :-
1. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के प्रारूप पर विचार कर इसे सैध्दांतिक स्वीकृति दी गयी। इस योजना के तहत राज्य की उन ग्रामीण बसाहटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ा जाएगा, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दायरे में नहीं आती है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के तहत कुल 8500 किलोमीटर पक्की सड़कों का निर्माण किया जाएगा। योजना पर कुल 4250 करोड़ रूपए की लागत अनुमानित है। योजना की अवधि तीन वर्ष की होगी। इसके अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 में 1500 किलोमीटर, अगले वित्तीय वर्ष 2012-13 में 3500 किलोमीटर और वर्ष 2013-14 में भी 3500 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य होगा। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना प्रारंभ करने के लिए राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। योजना की मानिटरिंग के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।
योजना के क्रियान्वयन के लिए 80 प्रतिशत राशि राज्य बजट से और 20 प्रतिशत राशि मनरेगा से लेने का प्रस्ताव है। आवश्यक होने पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से भी राशि ली जाएगी। योजना के तहत बनने वाली सड़कों की कुल चौड़ाई 7.50 मीटर होगी। इसमें से 3.75 मीटर की चौड़ाई में डामरीकृत/ कांक्रीटीकृत मार्ग निर्माण किया जाएगा। इन सड़कों पर पुल-पुलियों का भी निर्माण होगा, लेकिन उनकी ऊंचाई मध्यम होगी। सड़कों में पड़ने वाले सभी गांवों में यात्री प्रतिक्षालय, पेयजल और महिला प्रसाधन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा इन सभी गांवों के भीतर की सभी गंलियों का कांक्रीटीकरण और नालियों का भी निर्माण्ा किया जाएगा। सड़क के प्रत्येक एक अथवा डेढ़ किलोमीटर के फासले पर 50 मीटर की लम्बाई और 7.50 मीटर की अतिरिक्त चौड़ाई में किसानों को ट्रेक्टर में फसल लोडिंग के लिए जगह दी जाएगी। कुछ दूरी पर जरूरत के अनुसार सड़क से खेतों में ट्रेक्टर आदि उतारने के लिए ढाल की एप्रोच रेम्प का भी निर्माण किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य में पिछले दस वर्ष में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 18 हजार किलोमीटर बारहमासी पक्की सड़कों का निर्माण कर 8050 ग्रामीण बसाहटों को उनसे जोड़ा जा चुका है। इसके साथ ही इस योजना में 7000 किलोमीटर पक्की सड़कें निर्माणाधीन है। इसके अलावा कुछ बसाहटे एक तरफ से तो जुड़ी है, लेकिन दूसरी तरफ से उन्हें कम लम्बाई की सड़क बनाने पर हाट-बाजार केन्द्र अथवा प्रशासनिक मुख्यालयों से जोड़ा जा सकेगा। ये बसाहटे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दायरे से बाहर है। इनको बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने और इनके किनारे स्थित गांवों के समग्र विकास के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना शुरू की जा रही है।
2. मंत्री परिषद ने छत्तीसगढ़ मंत्री (वेतन तथा भत्ता) अधिनियम 1972 में प्रस्तावित संशोधन का अनुमोदन कर दिया। इसके अंतर्गत मंत्रियों को राज्य के भीतर सड़क मार्ग से यात्रा करने तथा यात्रा किसी किराए के वाहन में करने पर 14 रूपए प्रति किलोमीटर की दर से यात्रा भत्ता मिलेगा। उन्हें राज्य के भीतर प्रतिदिन 400 रूपए दैनिक भत्ता और राज्य के बाहर दौरे में 500 रूपए दैनिक भत्ते की पात्रता होगी।
1. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के प्रारूप पर विचार कर इसे सैध्दांतिक स्वीकृति दी गयी। इस योजना के तहत राज्य की उन ग्रामीण बसाहटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ा जाएगा, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दायरे में नहीं आती है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के तहत कुल 8500 किलोमीटर पक्की सड़कों का निर्माण किया जाएगा। योजना पर कुल 4250 करोड़ रूपए की लागत अनुमानित है। योजना की अवधि तीन वर्ष की होगी। इसके अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 में 1500 किलोमीटर, अगले वित्तीय वर्ष 2012-13 में 3500 किलोमीटर और वर्ष 2013-14 में भी 3500 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य होगा। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना प्रारंभ करने के लिए राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। योजना की मानिटरिंग के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।
योजना के क्रियान्वयन के लिए 80 प्रतिशत राशि राज्य बजट से और 20 प्रतिशत राशि मनरेगा से लेने का प्रस्ताव है। आवश्यक होने पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से भी राशि ली जाएगी। योजना के तहत बनने वाली सड़कों की कुल चौड़ाई 7.50 मीटर होगी। इसमें से 3.75 मीटर की चौड़ाई में डामरीकृत/ कांक्रीटीकृत मार्ग निर्माण किया जाएगा। इन सड़कों पर पुल-पुलियों का भी निर्माण होगा, लेकिन उनकी ऊंचाई मध्यम होगी। सड़कों में पड़ने वाले सभी गांवों में यात्री प्रतिक्षालय, पेयजल और महिला प्रसाधन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा इन सभी गांवों के भीतर की सभी गंलियों का कांक्रीटीकरण और नालियों का भी निर्माण्ा किया जाएगा। सड़क के प्रत्येक एक अथवा डेढ़ किलोमीटर के फासले पर 50 मीटर की लम्बाई और 7.50 मीटर की अतिरिक्त चौड़ाई में किसानों को ट्रेक्टर में फसल लोडिंग के लिए जगह दी जाएगी। कुछ दूरी पर जरूरत के अनुसार सड़क से खेतों में ट्रेक्टर आदि उतारने के लिए ढाल की एप्रोच रेम्प का भी निर्माण किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य में पिछले दस वर्ष में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 18 हजार किलोमीटर बारहमासी पक्की सड़कों का निर्माण कर 8050 ग्रामीण बसाहटों को उनसे जोड़ा जा चुका है। इसके साथ ही इस योजना में 7000 किलोमीटर पक्की सड़कें निर्माणाधीन है। इसके अलावा कुछ बसाहटे एक तरफ से तो जुड़ी है, लेकिन दूसरी तरफ से उन्हें कम लम्बाई की सड़क बनाने पर हाट-बाजार केन्द्र अथवा प्रशासनिक मुख्यालयों से जोड़ा जा सकेगा। ये बसाहटे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दायरे से बाहर है। इनको बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने और इनके किनारे स्थित गांवों के समग्र विकास के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना शुरू की जा रही है।
2. मंत्री परिषद ने छत्तीसगढ़ मंत्री (वेतन तथा भत्ता) अधिनियम 1972 में प्रस्तावित संशोधन का अनुमोदन कर दिया। इसके अंतर्गत मंत्रियों को राज्य के भीतर सड़क मार्ग से यात्रा करने तथा यात्रा किसी किराए के वाहन में करने पर 14 रूपए प्रति किलोमीटर की दर से यात्रा भत्ता मिलेगा। उन्हें राज्य के भीतर प्रतिदिन 400 रूपए दैनिक भत्ता और राज्य के बाहर दौरे में 500 रूपए दैनिक भत्ते की पात्रता होगी।
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