जन्मदिन 15 अक्टूबर पर विशेष : विश्वसनीय छत्तीसगढ़ का प्रतीक बने डॉ. रमन सिंह
- आलेख : स्वराज्य कुमार
पूरे देश में इन दिनों सुशासन की अवधारणा की व्यापक चर्चा है। इस अवधारणा को किताबों के पन्नों से जमीनी हकीकत में बदलने का सार्थक प्रयास छत्तीसगढ़ में लगातार कामयाब हो रहा है। इक्कीसवीं सदी के भारत के मानचित्र पर विगत एक नवम्बर 2000 को अवतरित नया छत्तीसगढ़ राज्य आगामी एक नवम्बर 2011 को अपनी यात्रा के ग्यारह साल पूर्ण कर बारहवें साल में प्रवेश कर रहा है. इसके महज
एक माह बाद यानी दिसम्बर में डॉ.रमन सिंह भी प्रथम और द्वितीय निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का नेतृत्व करते हुए अपने निरंतर गतिमान कार्यकाल के आठ वर्ष पूर्ण कर नवमें वर्ष में प्रवेश करेंगे। समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों के विकास को अपनी पहली प्राथमिकता में शामिल कर सुशासन को उन्होंने एक नया अर्थ दिया है।
किसी भी देश अथवा राज्य के विकास की बुनियाद उसकी विश्वसनीयता से ही बनती है और अगर यह कहा जाए, तो गलत नहीं होगा कि विश्वसनीयता बड़ी कठिन तपस्या से ही अर्जित की जा सकती है। देश, समाज, राज्य और जनता के हितों के लिए समर्पित भाव से काम करना भी तपस्या का पर्याय है। इस तपस्या से ही लोग समाज में विश्वसनीयता हासिल करते हैं। डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने यह साबित कर दिखाया है। वह इस नये राज्य के लिए विश्वसनीयता का प्रतीक बन गए हैं। ग्रामीण विकास, शहरी विकास, शिक्षा, स्वास्थ, कृषि, सिंचाई, बिजली और अन्य तमाम जरूरी सुविधाओं के विकास की राह में सफलता के निरंतर जुड़ते नये-नये मुकाम छत्तीसगढ़ को देश के विकसित राज्यों की कतार में ले जा रहे हैं। इस अवधि में राज्य को लगातार कई उपलब्धियां मिली हैं। नक्सल हिंसा और आंतक की गंभीर चुनौतियों के बावजूद नये राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ को सामाजिक-आर्थिक विकास के हर क्षेत्र में लगातार मिल रही कामयाबी निश्चित रूप से चौंकाने वाली है। इसके पीछे राज्य की जनता की ओर से प्रदेश के नेतृत्व को मिल रहे सहयोग और समर्थन की एक बड़ी शक्ति भी है।
दरअसल नीति, नीयत, निर्णय और नेतृत्व की गुणवत्ता से ही किसी भी देश या किसी भी राज्य को अपनी पहचान मिलती है और राज्य के नेतृत्वकर्ता को ज
नता का भरपूर समर्थन। छत्तीसगढ़ को भी अगर विगत सिर्फ आठ वर्ष में भारत के तेजी से विकसित होते राज्य के रूप में मान्यता मिली है, तो इस कामयाबी का राज भी यही है और यही वह कारण भी है, जिसके चलते डॉ. रमन सिंह को छत्तीसगढ़ के विकास का ध्वज वाहक होने का गौरव मिला है। यह सौम्य, लेकिन संकल्पवान और सहज लेकिन ऊर्जावान एक ऐसे नेतृत्व की कहानी है जिसका सम्पूर्ण व्यक्तित्व आज देश और दुनिया में इस नये राज्य का प्रतीक बन गया है. छत्तीसगढ़ सौम्य स्वभाव के लोगों का प्रदेश है। प्रदेश के मुखिया डॉ.रमन सिंह के सौम्य चेहरे में भी छत्तीसगढ़ की सौम्यता की झलक मिलती है और हर किसी को अपनेपन का एहसास होता है, हर कोई अपने दिल की बात उनसे खुलकर कह पाता है. ग्राम-सुराज और जन-दर्शन सहित प्रदेश के लगातार जनसंपर्क दौरे में जनता से सीधे संवाद की उनकी नियमित कार्य शैली है, जो उनके लिए आम नागरिकों की जिंदगी से सीधे ताल्लुक रखने वाली ज़रूरतों और समस्याओं को बारीकी से समझने में सहायक होती हैं. मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण यही वह कार्य-शैली है, जो महंगाई के देशव्यापी इस कठिन दौर में भी उन्हें गरीबों के लिए एक रूपए और दो रूपए किलो में हर माह पैंतीस किलो चावल और नि:शुल्क आयोडीन नमक वितरण की योजना बनाने और उसे बेहतर ढंग से लागू करने की प्रेरणा देती है, मात्र तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर किसानों को खेती के लिए ऋण-सुविधा, तेंदूपत्ता संग्राहक वनवासी श्रमिकों को नि:शुल्क चरणपादुका और स्कूली बालिकाओं को नि:शुल्क सायकल देने की योजना भी आम जनता से गहरे जुड़ाव पर आधारित उनकी लोक-हितैषी कार्य शैली से ही छन कर आयी हैं। वह एक आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। इस नाते भी उन्हें जनता की नब्ज और समाज की तासीर की अच्छी पहचान है। डॉ. रमन

सिंह सरकारी योजनाओं में जनभागीदारी को बढ़ावा देना बहुत जरूरी समझते हैं। उनकी अधिकांश योजनाओं की शानदार कामयाबी का असली कारण भी यही है। वह कहते भी हैं कि सरकारी काम-काज में जनता की दिलचस्पी और भागीदारी से ही योजनाओं का फायदा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकता है।
लोकतंत्र में सत्ता के विकेन्द्रीकरण से ही सरकार जनता के और ज्यादा नज़दीक पहुँचती है और जन-हित के अधिक से अधिक कार्य कर पाती है। डॉ.रमन सिंह ने अपनी इसी लोकतांत्रिक सोच को अमलीजामा पहनाते हुए वर्ष मई 2007 में दो नये जिलों बीजापुर और नारायणपुर का शुभारंभ किया और संभागीय राजस्व कमिश्नरी की व्यवस्था बहाल करते हुए चार राजस्व संभाग-सरगुजा, बस्तर, रायपुर और बिलासपुर का गठन करवाया। इनमें से सरगुजा एक नया राजस्व संभाग है। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नौ नए जिलों- बेमेतरा, बलौदाबाजार, बालोद बलरामपुर, गरियाबंद, मुंगेली, सूरजपुर, कोंडागांव और सुकमा के गठन की घोषणा करते हुए यह भी ऐलान कर दिया है कि ये नए जिले जनवरी 2012 से अस्तित्व में आ जाएंगे यानी नये कैलेण्डर वर्ष के शुरू होते ही नये जिलों में जिला स्तरीय काम-काज शुरू हो जाएगा। इस प्रकार सिर्फ चार-साढ़े चार साल में राज्य में ग्यारह नये जिले हो जाएंगे और इन्हें मिलाकर छत्तीसगढ़ में जिलों की संख्या बढ़कर 27 हो जाएगी. नये जिलों का निर्माण सम्बन्धित इलाकों की जनता का वर्षों पुराना सपना था, जिसे डॉ.रमन सिंह ने इस बार स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व की सौगात के रूप में अचानक साकार कर दिया. इन क्षेत्रों के लोगों की खुशियाँ देखते ही बनती थी, जो इस आल्हादकारी घोषणा के बाद अगले कई दिनों तक लोग डॉ.रमन को धन्यवाद देने राजधानी रायपुर आते रहे और कई संस्थाओं ने तो मुख्यमंत्री से मिलकर उनका अभिनंदन भी किया।
प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण के साथ-साथ प्रशासनिक कसावट लाने के लिए भी वह प्रतिबध्द नज़र आते हैं । हाल ही में उन्होंने भूमि प्रकरणों के निराकरण में राजस्व-संहिता का पालन नहीं करने वाले एक वरिष्ठ आई, एस. अधिकारी को निलम्बित कर सरकारी अफसरों को यह सन्देश दे दिया कि जन-हित सर्वोपरि होगा। शासन-प्रशासन में स्वच्छता और पारदर्शिता अनिवार्य होगी और नियम-क़ानूनों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।.भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योकि यह राज्य और देश के विकास में बाधक है। हाल के महीनों में कतिपय अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतों पर
मुख्यमंत्री ने कठोर रूख अपनाया और ऐसे लोगों के घरों-दफ्तरों में एंटी-करप्शन ब्यूरो की छापेमारी में करोड़ों-अरबों रूपयों की अनुपातहीन संपत्ति उजागर हुई ।कई अफसरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पड़ा भी गया .अनेक अफसर निलम्बित भी किए गए। निश्चित ही इससे जनता में यह सन्देश गया कि प्रशासन में आर्थिक अपराध नहीं चलेगा और सरकार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सम्पूर्ण संकल्प शक्ति के साथ अभियान चला रही है। अब तो रमन सरकार ने विधान सभा में विधेयक लाकर सर्वानुमति से लोक सेवा गारंटी क़ानून भी बनवा लिया है, जिससे आम जनता के दिन-प्रतिदिन की ज़रूरतों से जुड़ी सरकारी सेवाओं के लिए आवेदनों का निराकरण आधिकारियों को समय-सीमा में अनिवार्य रूप से करना होगा और प्रत्येक अधिकारी की समयबध्द जवाबदेही भी तय रहेगी।
डॉ. रमन सिंह की स्पष्ट सोच है कि विकास केवल भौतिक निर्माण से नही होगा, सड़क, पुल-पुलिया और तरह-तरह के सार्वजनिक भवन तो बाद में भी बन जाएंगे, लेकिन किसी भी प्रकार के विकास की सीढ़ी बनाने के लिए पहली ज़रूरत पीढ़ियों के निर्माण की है। अगर हमने आने वाली पीढ़ियों का निर्माण ठीक-ठाक कर लिया तो तरक्की की सीढियां अपने-आप बनती चली जाएँगी। यही कारण है कि उन्होंने स्वस्थ, साक्षर और सुशिक्षित आधुनिक छत्तीसगढ़ के निर्माण को अपनी कार्य-सूची में पहले नम्बर पर रखा है और सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं को विशेष प्राथमिकता दी है। प्रदेश के बच्चों की सेहत अच्छी रहे, उन्हें कुपोषण से मुक्ति मिले, यह उनका लक्ष्य है। हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के नि:शुल्क ऑॅपरेशन के लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना, स्कूली बच्चों के दोपहर भोजन की बेहतर व्यवस्था और आंगनबाडी केन्द्रों में शिशुओं और गर्भवती माताओं को आसानी से मिल रहा पौष्टिक आहार स्वस्थ छत्तीसगढ़ बनाने के उनके नेक इरादे को प्रकट करते हैं. विगत एक वर्ष से भी कम समय में छत्तीसगढ़ के 18 में से सात जिलों में संजीवनी-एक्सप्रेस, एम्बुलेंस गाडियां सड़कों पर दिन-रात दौड़ने लगी हैं जो अपने टोल-फ्री टेलीफोन नम्बर 108 पर कहीं से भी किसी व्यक्ति के अचानक गम्भीर बीमार होने या दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर मिलते ही ग्रामीण इलाकों में आधे घंटे और शहरी क्षेत्रों में बीस मिनट में दौडकर उस तक पहुँच कर उसे तुरंत नज़दीकी सरकारी अस्पताल ले जाकर मानव-जीवन की रक्षा कर
रही हैं. यह सेवा डॉ.रमन सिंह के प्रयासों से ही राज्य में आयी है और अभी रायपुर, बस्तर (जगदलपुर), रायगढ़, जशपुर, बिलासपुर, कोरिया और धमतरी जिलों में हजारों लोगों की जान बचाने में मददगार बनी है.डॉ रमन सिंह की यह कोशिश है कि इसे ज़ल्द से ज़ल्द सम्पूर्ण राज्य में विस्तारित कर दिया जाए।
राज्य के दूर-दराज गाँवों तक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है. शराब आम जनता के शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। इस बुराई को खत्म करने के लिए डॉ रमन सिंह ने व्यसन-मुक्त स्वस्थ छत्तीसगढ़ बनाने का नारा दिया है. उन्होंने इसके लिए चरणबध्द कार्य-योजना के अनुरूप पहले चरण में दो हजार तक आबादी वाले गाँवों में सरकारी लायसेंस प्राप्त करीब ढाई सौ देशी-विदेशी मदिरा दुकानों को नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही विगत एक अप्रेल से हमेशा के लिए बंद करवा दिया। शराब से मिलने वाले सरकारी राजस्व में कमी होने का जोखिम उठाकर भी उन्होंने स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए यह साहसिक फैसला लिया। अवैध शराब के काले कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए उनके आव्हान पर गाँव-गाँव में महिलाओं की भारत माता वाहिनियों का गठन किया जा रहा है.एक स्वस्थ और बेहतर पीढ़ी निर्माण के लिए शिक्षा डॉ.रमन सिंह की जन-कल्याणकारी नीतियों की सर्वोच्च प्राथमिकता में है।
हम और आप अपने आस-पास देखें तो आंगनबाड़ी से लेकर स्कूल-शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, कृषि-शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में राज्य नया होने के बावजूद अनेकानेक नवीन संस्थाओं के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2003 में जहां राज्य में प्राथमिक शालाओं की संख्या लगभग 32 हजार थी, वहीं आज यह बढ़कर करीब 37 हजार तक पहुंच गयी है। मिडिल स्कूलों की संख्या सात हजार से बढ़कर करीब 16 हजार, हाई स्कूलों की संख्या एक हजार 176 से बढ़कर दो हजार 208 और हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या एक हजार 386 से बढ़कर दो हजार 635 हो गयी है। वर्ष 2003 में राज्य में सरकारी कॉलेजों की संख्या 116 थी, जो अब बढ़कर 172 हो गयी है। इन आठ वर्षों में प्रदेश में शासकीय विश्वविद्यालयों की संख्या पांच से बढ़कर 11, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 50 हो गयी है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 45 निजी कॉलेज भी शामिल हैं। वर्ष 2003 में जब केवल 12 इंजीनियरिंग कॉलेज थे, उनमें सीटों की संख्या दो हजार 730 थी। आज 50 इंजीनियरिंग कॉलेजों में लगभग 19 हजार 590 सीट हैं, जिनमें राज्य की नई पीढ़ी को उच्च तकनीकी शिक्षा का अवसर मिल रहा है। युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना रमन सरकार की नीतियों में शामिल है। यही कारण है कि राज्य में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आई.टी.आई.) की संख्या 61 से बढ़कर 101 और इनमें सीटों की संख्या पांच हजार 960 से बढ़कर करीब सोलह हजार तक पहुंच गयी है। सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर नौकरी के दरवाजे खोलकर रमन सरकार ने विगत कुछ वर्षों में भारी संख्या में युवाओं को रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया है। अभी इस महीने की आठ तारीख को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक में रिक्त पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति के दस प्रतिशत के बंधन को छह महीने के लिए शिथिल करने का निर्णय लिया गया है, ताकि ऐसे लंबित मामलों का जल्द से जल्द निराकरण हो और दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को शासकीय सेवा में नौकरी मिल सके। किसानों के हितों को ध्यान में रखकर राज्य में सहकारी समितियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की बेहतर व्यवस्था भी विश्वसनीय छत्तीसगढ़ का एक बड़ा उदाहरण है। उनकी सुविधा के लिए इस वर्ष 294 नये धान खरीदी केन्द्र बनाए गए हैं, जिन्हें मिलाकर इन केन्द्रों की संख्या अब एक हजार 883 हो जाएगी।
महिला सशक्तिकरण भी डॉ. रमन सिंह की विशेष प्राथमिकता है। यही कारण है कि उन्होंने पंचायतराज अधिनियम में विधानसभा में संशोधन प्रस्ताव लाकर महिलाओं के लिए त्रि-स्तरीय पंचायतों में आरक्षण का प्रतिशत 33 से बढ़ाकर पचास तक पहुंचा दिया है। महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से गांवों में महिलाओं के आर्थिक स्वावलम्बन का एक नया वातावरण बना है। भवन निर्माण गतिविधियों से जुड़े असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिकों के लिए बीमा योजना, नि:शुल्क औजार, महिला श्रमिकों के लिए नि:शुल्क सायकल और सिलाई मशीन वितरण, उनके स्कूली बच्चों के लिए छात्रवृत्ति जैसी कल्याणकारी योजनाएं वर्ष 2010 से छत्तीसगढ़ में सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। बिजली के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की उपलब्धियां राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित होती रही हैं। जनवरी 2008 से यह देश का पहला विद्युत कटौती मुक्त राज्य बन गया है। बिजली को आम जनता की जरूरतों से जोड़ने की कवायद अब रंग ला रही है। राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ में केवल 72 हजार विद्युतीकृत सिंचाई पम्प थे, जबकि आज दो लाख 67 हजार से अधिक किसानों के सिंचाई पम्पों का विद्युतीकरण हो चुका है। उन्हें पांच हॉर्स पावर तक सिंचाई पम्पों के लिए सालाना छह हजार यूनिट नि:शुल्क बिजली दी जा रही है।
अपने कुशल वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन से डॉ.रमन सिंह छत्तीसगढ़ को सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक और कृषि तथा औद्योगिक विकास के ज़रिये प्रगति के नये दौर में ले जा रहे है. यह उनके बेहतर वित्तीय प्रंबधन का ही नतीजा है कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जी.एस.डी.पी .के मामले में महाराष्ट्र, राजस्थान. पंजाब, हरियाणा .और कर्नाटक जैसे कई विकसित और पुराने राज्यों को पीछे छोड़ते हुए छत्तीसगढ़ वर्ष 2010-11 में 11.57 प्रतिशत की बढोत्तरी के साथ भारत के प्रथम तीन अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है. इसके पिछले वर्ष 2009-10 में भी यह नया राज्य इस मामले में अग्रणी था और यहाँ 11.49 प्रतिशत की जी.एस. डी .पी. दर्ज की गयी थी, जो देश में सबसे अधिक थी .यह उनके कुशल वित्तीय प्रबंधन का ही प्रतिफल है कि सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में छत्तीसगढ़ में वर्ष 2009-10 में प्रति व्यक्ति तीन हजार 371 रूपए खर्च किए गए, जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ दो हजार 718 रूपए का रहा . डॉ. रमन सिंह की यह साफ़ -साफ़ मान्यता है कि सरकार के वित्तीय प्रबंधन का फायदा सबसे पहले समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचना चाहिए, तभी तो उसकी सार्थकता है. उनकी यह अवधारण विभिन्न लोक-हितैषी योजनाओं के ज़रिये धरातल पर लगातार सार्थक होती नजर आ रही है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भी अपनी प्रबंधन क्षमता के माध्यम से गरीबों के लिए सस्ते अनाज की बेहतरीन व्यवस्था कर उन्होंने इसे देश की एक आदर्श प्रणाली के रूप में पहचान दिलाई .यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक फैसले में केन्द्र सरकार से साफ़ तौर पर पूछ लिया कि वह पूरे भारत में राशन वितरण के लिए छत्तीसगढ़ और गुजरात पैटर्न की व्यवस्था क्यों लागू नही करती ? केन्द्रीय कानून के तहत रमन सरकार ने दो लाख से अधिक वनवासी परिवारों को वनाधिकार मान्यता पत्र देकर उन्हें जंगल की लगभग दस लाख एकड़ जमीन पर खेती का अधिकार दिया है। यह आंकड़ा पूरे देश में सबसे अधिक है। विकास की राह पर इस नए राज्य की उपलब्धियों को स्वयं केन्द्र सरकार ने कई अवसरों पर सहर्ष अपनी मान्यता दी है. रमन सरकार को केन्द्र की ओर से मिले राष्ट्रीय पुरस्कारों की एक लम्बी सूची है। वर्ष 2010-11 में सर्वाधिक चावल उत्पादन की बड़ी कामयाबी पर प्रधान मंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने छत्तीसगढ़ को एक करोड़ रूपए के 'कृषि-कर्मण' पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्थापना दिवस समारोह में विगत 16 जुलाई 2011 को मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया, जिसे डॉ. रमन ने पूरी विनम्रता के साथ प्रदेश के मेहनतकश किसानों को समर्पित कर दिया। राज्य के नये प्रशासनिक मुख्यालय शहर के रूप में तेजी से आकार ले रहे नया रायपुर विकास प्रोजेक्ट को केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम शहरी आवास विकास निगम यानी हुडको ने इस वर्ष 25 अप्रेल को अपने स्थापना दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया. सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन वितरण और धान खरीदी कार्यों में सूचना प्रौद्योगिकी के सराहनीय उपयोग के लिए भी छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो चुका है। गरीब परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के क्रियान्वयन में भी दो जुलाई 2010 को छत्तीसगढ़ को केन्द्रीय श्रम तथा रोजगार मंत्रालय की ओर चंडीगढ़ में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
राज्य के अनेक जिले नक्सल हिंसा से पीड़ित हैं, लेकिन शांतिपूर्ण विकास छत्तीसगढ़ का लक्ष्य है। डॉ. रमन सिंह इसके लिए हर प्रकार की कोशिश में लगे हुए हैं. उन्होंने तो वर्ष 2008 के ग्राम सुराज अभियान में दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में एक ऐसे आत्म समर्पित नक्सली कंमाडर को आरक्षक के पद पर नौकरी दे दी, जिसने कुछ वर्ष पहले कभी उनके हैलीकॉप्टर 'मैना' पर हमला करने का प्रयास किया था. मुख्यमंत्री जब ग्राम सुराज के दौरान 21 अप्रैल 2008 को अचानक इस जिले के ग्राम दोरनापाल पहुंचे, तो वहां इस आत्म समर्पित नक्सली से उसकी यह स्वीकारोक्ति सुनकर उन्होंने उसकी पुरानी गलतियों को माफ कर दिया। आत्म समर्पण के बाद रमन सरकार द्वारा उसे दोरनापाल में विशेष पुलिस अधिकारी बनाया गया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह ने उसे राज्य पुलिस में आरक्षक बनाने का निर्णय लिया। यह डॉ. रमन के विशाल हृदय की मानवीय संवेदनाओं का एक बड़ा उदाहरण है, जो दुश्मन को भी दोस्त बनाने का हौसला रखते हैं। यहाँ तक कि वह नक्सलियों से यह भी अपील कर चुके हैं कि अगर वे हथियार और हिंसा का मार्ग छोड़कर लोकतंत्र की मुख्य धारा में आना चाहें तो उन्हें गले लगाने को भी वह तैयार रहेंगें, लेकिन कुछ विघटनकारी ताकतों की वजह से जनता के जान-माल को हो रहे गम्भीर नुकसान को वह कतई नहीं सहेंगे. जन-जीवन की सुरक्षा के सभी विकल्पों पर भी वह अपनी सम्पूर्ण संकल्प-शक्ति से काम कर रहे हैं। इसके सकारात्मक नतीजे भी मिलने लगे हैं। सरगुजा जिले में नक्सल गतिविधियां काफी कम हो गयी हैं, लेकिन सरकार वहां ऐहतियात के तौर पर आज भी सजग है। बस्तर संभाग के जिलों सहित कुछ अन्य जिलों में इस दिशा में राज्य सरकार के प्रयास जारी हैं। केन्द्र के साथ एक योजनाबध्द और समन्वित रणनीति बनाकर काम कर रही है। डॉ.रमन सिंह की यह स्पष्ट मान्यता है कि विकास रथ के दो पहिये हैं शान्ति और सुरक्षा. इन्हें हर कीमत पर कायम रखकर छत्तीसगढ़ को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की कतार में लाना उनका संकल्प है. बहरहाल चुनौतियों के बीच नये छत्तीसगढ़ राज्य की चमकदार उपलब्धियां डॉ.रमन सिंह के नेतृत्व में जनता को यह विश्वास दिला रही हैं कि आने वाला कल आज से भी कहीं ज्यादा बेहतर और ज्यादा उज्ज्वल होगा।
- स्वराज्य कुमार

