सरल समाधान योजना के प्रति व्यवसायियों ने दिखाई रूचि
अब तक नौ सौ आवेदन पत्र प्राप्त
रायपुर, एक दिसम्बर 2010
वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा बकाया राजस्व की वसूली के लिए पहली बार शुरू की गई 'सरल समाधान योजना' के प्रति व्यासायियों द्वारा काफी रूचि दिखाई जा रही है। योजना के तहत अब तक नौ सौ व्यवसायियों ने आवेदन-पत्र प्रस्तुत किया है। इन प्रकरणों में दो करोड़ 51 लाख 39 हजार रूपए की राशि निहित है। यदि इन प्रकरणों का निराकरण हो जाता है तो योजना के तहत कुल बकाया का चालीस प्रतिशत राशि की छूट देने के बावजूद राज्य शासन को लगभग डेढ़ करोड़ रूपए का राजस्व एक मुश्त प्राप्त होगा। यह योजना 31 दिसम्बर तक है और इस अवधि में बकाया राजस्व की राशि एक मुश्त जमा करने पर व्यवसायियों को 40 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस योजना के तहत 31 मार्च 2006 तक की अवधि तक कर निर्धारण और अंतिम प्रत्यावर्तन आदेश के पूर्व लंबित बकाया राशि के लिए लागू है। आस्थगन भुगतान की सुविधा प्राप्त व्यवसायियों को इस योजना से अलग रखा गया है। वाणिज्यिक कर आयुक्त श्री गणेश शंकर मिश्रा ने इस योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा बकाया की वसूली के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि योजना के तहत रायपुर संभाग क्रमांक-एक में 168 व्यवसायियों द्वारा एक करोड़ 35 लाख रूपए, रायपुर संभाग क्रमांक-दो में 177 व्यवसायियों द्वारा 18 लाख 39 हजार रूपए, बिलासपुर संभाग क्रमांक-एक में 181 व्यवसायियों द्वारा 16 लाख 59 हजार रूपए, बिलासपुर संभाग क्रमांक-दो में 247 बकायादारों द्वारा 30 लाख 35 हजार रूपए और दुर्ग संभाग में 127 बकायादारों द्वारा 51 लाख छह हजार रूपए की बकाया राशि के एक मुश्त समाधान के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है। यह योजना विक्रय कर अधिनियम, वाणिज्यिक कर अधिनियम, केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, प्रवेश कर, विलासिता कर अधिनियम और वृत्तिकर अधिनियम के अधीन 31 मार्च 2006 तक की बकाया राशि की वसूली के लिए लागू है। योजना अवधि में बकायादार 31 अक्टूबर 2010 की स्थिति में कुल बकाया राशि का 60 प्रतिशत राशि चालान से जमा कर आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं, इससे उन्हें 40 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। बकायेदारों को योजना का लाभ लेने के लिए सक्षम अधिकारी के समक्ष निर्धारित प्रारूप में दो प्रतियों में आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा। अपर आयुक्त वाणिज्यिक कर श्री के.एस. बरिहा ने बताया कि एक लाख रूपए तक की बकाया राशि के आवेदन पत्र संबंधित वाणिज्यिक कर अधिकारी के समक्ष तथा एक लाख रूपए से अधिक किन्तु पांच लाख तक बकाया राशि के आवेदन पत्र संबंधित क्षेत्र के सहायक आयुक्त, वाणिज्यिक कर के समक्ष, पांच लाख रूपए से अधिक किन्तु दस लाख रूपए तक की बकाया के लिए संभागीय उपायुक्त के समक्ष तथा दस लाख रूपए से अधिक की बकाया राशि के लिए निगरानी क्षेत्राधिकार से संबंधित अपर आयुक्त, वाणिज्यिक कर के समक्ष दो प्रतियों में आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस सरल समाधान योजना के अन्तर्गत ऐसे बकायादर जिनके द्वारा बकाया राशि के विरूध्द अपील, निगरानी, अथवा अन्य याचिकाएं प्रस्तुत की गई हैं तथा निराकरण के लिए लंबित है, ऐसे बकायादार इस योजना के अन्तर्गत आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें प्रस्तुत अपील, निगरानी अथवा याचिका वापस लेना होगा।
योजना के अन्तर्गत प्रत्यावर्तित कर निर्धारण प्रकरणों को भी शामिल किया गया है। ऐसे प्रकरणों में मूल कर निर्धारण आदेश में निकाली गई कुल मांग राशि का 60 प्रतिशत राशि चालान से जमा कर आवेदन किया जा सकता है। इसी तरह बकाया राशि के भुगतान हेतु किश्त की सुविधा प्राप्त बकायादार आवेदन तिथि के पूर्व तक किश्त की जमा की गई राशि को कम करने के पश्चात शेष बची बकाया राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं किन्तु जिस तिथि तक किश्त की सुविधा प्राप्त की जा चुकी है,उस तिथि तक ब्याज देय होगा। बकाया सरल समाधान योजना के अन्तर्गत विक्रय कर अधिनियम, वाणिज्यिक कर अधिनियम, केन्दीय विक्रय कर अधिनियम, प्रवेशकर अधिनियम, विलासिता कर एवं वृत्तिकर अधिनियमों के अन्तर्गत शास्ति एवं ब्याज के सभी प्रावधान लागू होंगे।
वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि योजना के तहत रायपुर संभाग क्रमांक-एक में 168 व्यवसायियों द्वारा एक करोड़ 35 लाख रूपए, रायपुर संभाग क्रमांक-दो में 177 व्यवसायियों द्वारा 18 लाख 39 हजार रूपए, बिलासपुर संभाग क्रमांक-एक में 181 व्यवसायियों द्वारा 16 लाख 59 हजार रूपए, बिलासपुर संभाग क्रमांक-दो में 247 बकायादारों द्वारा 30 लाख 35 हजार रूपए और दुर्ग संभाग में 127 बकायादारों द्वारा 51 लाख छह हजार रूपए की बकाया राशि के एक मुश्त समाधान के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है। यह योजना विक्रय कर अधिनियम, वाणिज्यिक कर अधिनियम, केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, प्रवेश कर, विलासिता कर अधिनियम और वृत्तिकर अधिनियम के अधीन 31 मार्च 2006 तक की बकाया राशि की वसूली के लिए लागू है। योजना अवधि में बकायादार 31 अक्टूबर 2010 की स्थिति में कुल बकाया राशि का 60 प्रतिशत राशि चालान से जमा कर आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं, इससे उन्हें 40 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। बकायेदारों को योजना का लाभ लेने के लिए सक्षम अधिकारी के समक्ष निर्धारित प्रारूप में दो प्रतियों में आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा। अपर आयुक्त वाणिज्यिक कर श्री के.एस. बरिहा ने बताया कि एक लाख रूपए तक की बकाया राशि के आवेदन पत्र संबंधित वाणिज्यिक कर अधिकारी के समक्ष तथा एक लाख रूपए से अधिक किन्तु पांच लाख तक बकाया राशि के आवेदन पत्र संबंधित क्षेत्र के सहायक आयुक्त, वाणिज्यिक कर के समक्ष, पांच लाख रूपए से अधिक किन्तु दस लाख रूपए तक की बकाया के लिए संभागीय उपायुक्त के समक्ष तथा दस लाख रूपए से अधिक की बकाया राशि के लिए निगरानी क्षेत्राधिकार से संबंधित अपर आयुक्त, वाणिज्यिक कर के समक्ष दो प्रतियों में आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस सरल समाधान योजना के अन्तर्गत ऐसे बकायादर जिनके द्वारा बकाया राशि के विरूध्द अपील, निगरानी, अथवा अन्य याचिकाएं प्रस्तुत की गई हैं तथा निराकरण के लिए लंबित है, ऐसे बकायादार इस योजना के अन्तर्गत आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें प्रस्तुत अपील, निगरानी अथवा याचिका वापस लेना होगा।
योजना के अन्तर्गत प्रत्यावर्तित कर निर्धारण प्रकरणों को भी शामिल किया गया है। ऐसे प्रकरणों में मूल कर निर्धारण आदेश में निकाली गई कुल मांग राशि का 60 प्रतिशत राशि चालान से जमा कर आवेदन किया जा सकता है। इसी तरह बकाया राशि के भुगतान हेतु किश्त की सुविधा प्राप्त बकायादार आवेदन तिथि के पूर्व तक किश्त की जमा की गई राशि को कम करने के पश्चात शेष बची बकाया राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं किन्तु जिस तिथि तक किश्त की सुविधा प्राप्त की जा चुकी है,उस तिथि तक ब्याज देय होगा। बकाया सरल समाधान योजना के अन्तर्गत विक्रय कर अधिनियम, वाणिज्यिक कर अधिनियम, केन्दीय विक्रय कर अधिनियम, प्रवेशकर अधिनियम, विलासिता कर एवं वृत्तिकर अधिनियमों के अन्तर्गत शास्ति एवं ब्याज के सभी प्रावधान लागू होंगे।
क्रमांक-3996/कुशराम

