छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता की पांच स्पर्धाएं होंगी
व्यायाम शिक्षकों (शिक्षाकर्मी वर्ग-2) को भी मिलेगा यात्रा भत्ता
खेल प्रतियोगिताओं के लिए विकासखण्डों को मिलेगा हर वर्ष एक लाख रूपए का अनुदान
रायपुर 18 अगस्त 2010

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता समिति की बैठक में स्कूलों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए इस वर्ष घोषित खेल कैलेण्डर में आंशिक संशोधन करने के बाद इसका अनुमोदन किया गया। बैठक में संसदीय सचिव श्री विजय बघेल, स्कूल शिक्षा एवं अनुसूचित जाति जनजाति विकास विभाग के सचिव श्री आर.पी. मण्डल, संचालक लोक शिक्षण श्री के.आर. पिस्दा, विशेष सचिव स्कूल शिक्षा सुधीर अग्रवाल,लोक शिक्षण संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास उपस्थित थे।
बैठक में व्यायाम शिक्षकों (शिक्षाकर्मियों वर्ग-2) को भी विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में सेवाएं देने पर यात्रा भत्ता की सुविधा देने का निर्णय लिया गया। इसी तरह व्यायाम शिक्षकों को खेलों के नये नियमों की जानकारी देने के उद्देश्य से हर वर्ष फरवरी-मार्च महीने में 10 दिन का रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया जाएगा। अगले वर्ष से राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में रोल बाल, चोई क्वांग डो मार्शल और डॉज बाल की भी स्पर्धाएं होंगी। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ में भी सभी खेलों की विकासखण्ड स्तरीय क्रीड़ा प्रतियोगिताएं अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएंगी। इस प्रतियोगिता में प्राथमिक स्कूलों के छात्र-छात्राओं को भी शामिल किया जाएगा। विभागीय क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए अब हर जिले में स्कूल शिक्षा विभाग और अनुसूचित जाति, जनजाति विकास विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की संयुक्त टीम बनेगी। बैठक में खेल कैलेण्डर 2010 में आंशिक संशोधन करने का निर्णय लिया गया। इसके अनुसार जशपुर में इस वर्ष 26 सितम्बर से 29 सितम्बर तक होने वाली फुटबाल बालिका 19 वर्ष की स्पर्धा अब अम्बिकापुर में 26 जुलाई से 30 जुलाई के बीच होगी। हॉकी बालक-बालिका 14 वर्ष की स्पर्धाएं अब जगदलपुर में आयोजित की जाएंगी। हॉकी की ये स्पर्धाएं पहले बिलासपुर में होनी थी।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में स्कूल स्तर पर खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की नीति के चलते राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में प्रदेश के खिलाड़ियों को अधिक सफलता मिल रही है। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा सत्र 2008-09 में आयोजित राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 10 स्वर्ण, 23 रजत एवं 67 कांस्य पदक कुल एक सौ पदक प्राप्त किए थे जबकि सत्र 2009-10 में आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 163 पदक जीते। इनमें 70 स्वर्ण, 44 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता की पांच स्पर्धाएं छत्तीसगढ़ में आयोजित की जाएंगी। इनमें नेटबाल (बालक-बालिका) 19 वर्ष, थ्रो बाल और साफ्ट बाल (बालक-बालिका) 19 वर्ष, बास्केट बाल (बालक-बालिका) 19 वर्ष तथा क्रिकेट (बालिका)19 वर्ष की स्पर्धाएं शामिल हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने भविष्य में राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिताओं के अन्तर्गत 14 वर्ष और 17 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं की विभिन्न स्पर्धाएं भी छत्तीसगढ़ में आयोजित करने के लिए प्रस्ताव स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कम उम्र के स्कूली बच्चों की विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने से इन बच्चों में खेल के प्रति अधिक रूचि बढ़ेगी।
अधिकारियों ने बताया कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा लिए निर्णय के अनुसार राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले मिनी वर्ग (14 वर्ष से कम उम्र) के खिलाड़ियों का मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने इसके लिए हर जिले की मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र बनवाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे शासन स्तर से इस संबंध में जिला कलेक्टरों और जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र जारी कराने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश के स्कूली बच्चों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि विकासखण्ड स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने के निर्देशों का परिपालन सुनिश्चित किया जाए। विकासखण्ड स्तर पर व्यवस्थित ढंग से प्रतियोगिताएं होनी चाहिए। इससे प्रदेश में खेल का अच्छा वातावरण निर्मित होगा। श्री अग्रवाल ने खेलों के आयोजन में अनुशासन का विशेष ध्यान रखने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। स्कूल शिक्षा मंत्री ने आदिवासी विकासखण्डों में खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के बच्चें खेल प्रतिभा सम्पन्न हैं। उन्हें आगे बढ़ने के लिए समुचित अवसर उपलब्ध कराने के जरूरत है। श्री अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष से खेल प्रतियोगिताओं के लिए हर विकासखण्ड को हर वर्ष एक लाख रूपए का अनुदान दिया जाएगा। इसमें 75 हजार रूपए खेल सामग्री क्रय करने पर व्यय किया जा सकता है। शेष 25 हजार रूपए का उपयोग प्रतियोगिता आयोजन के समय किया जा सकता है।
बैठक में व्यायाम शिक्षकों (शिक्षाकर्मियों वर्ग-2) को भी विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में सेवाएं देने पर यात्रा भत्ता की सुविधा देने का निर्णय लिया गया। इसी तरह व्यायाम शिक्षकों को खेलों के नये नियमों की जानकारी देने के उद्देश्य से हर वर्ष फरवरी-मार्च महीने में 10 दिन का रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया जाएगा। अगले वर्ष से राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में रोल बाल, चोई क्वांग डो मार्शल और डॉज बाल की भी स्पर्धाएं होंगी। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ में भी सभी खेलों की विकासखण्ड स्तरीय क्रीड़ा प्रतियोगिताएं अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएंगी। इस प्रतियोगिता में प्राथमिक स्कूलों के छात्र-छात्राओं को भी शामिल किया जाएगा। विभागीय क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए अब हर जिले में स्कूल शिक्षा विभाग और अनुसूचित जाति, जनजाति विकास विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की संयुक्त टीम बनेगी। बैठक में खेल कैलेण्डर 2010 में आंशिक संशोधन करने का निर्णय लिया गया। इसके अनुसार जशपुर में इस वर्ष 26 सितम्बर से 29 सितम्बर तक होने वाली फुटबाल बालिका 19 वर्ष की स्पर्धा अब अम्बिकापुर में 26 जुलाई से 30 जुलाई के बीच होगी। हॉकी बालक-बालिका 14 वर्ष की स्पर्धाएं अब जगदलपुर में आयोजित की जाएंगी। हॉकी की ये स्पर्धाएं पहले बिलासपुर में होनी थी।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में स्कूल स्तर पर खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की नीति के चलते राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में प्रदेश के खिलाड़ियों को अधिक सफलता मिल रही है। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा सत्र 2008-09 में आयोजित राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 10 स्वर्ण, 23 रजत एवं 67 कांस्य पदक कुल एक सौ पदक प्राप्त किए थे जबकि सत्र 2009-10 में आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 163 पदक जीते। इनमें 70 स्वर्ण, 44 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता की पांच स्पर्धाएं छत्तीसगढ़ में आयोजित की जाएंगी। इनमें नेटबाल (बालक-बालिका) 19 वर्ष, थ्रो बाल और साफ्ट बाल (बालक-बालिका) 19 वर्ष, बास्केट बाल (बालक-बालिका) 19 वर्ष तथा क्रिकेट (बालिका)19 वर्ष की स्पर्धाएं शामिल हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने भविष्य में राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिताओं के अन्तर्गत 14 वर्ष और 17 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं की विभिन्न स्पर्धाएं भी छत्तीसगढ़ में आयोजित करने के लिए प्रस्ताव स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कम उम्र के स्कूली बच्चों की विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने से इन बच्चों में खेल के प्रति अधिक रूचि बढ़ेगी।
अधिकारियों ने बताया कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा लिए निर्णय के अनुसार राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले मिनी वर्ग (14 वर्ष से कम उम्र) के खिलाड़ियों का मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने इसके लिए हर जिले की मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र बनवाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे शासन स्तर से इस संबंध में जिला कलेक्टरों और जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र जारी कराने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश के स्कूली बच्चों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि विकासखण्ड स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने के निर्देशों का परिपालन सुनिश्चित किया जाए। विकासखण्ड स्तर पर व्यवस्थित ढंग से प्रतियोगिताएं होनी चाहिए। इससे प्रदेश में खेल का अच्छा वातावरण निर्मित होगा। श्री अग्रवाल ने खेलों के आयोजन में अनुशासन का विशेष ध्यान रखने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। स्कूल शिक्षा मंत्री ने आदिवासी विकासखण्डों में खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के बच्चें खेल प्रतिभा सम्पन्न हैं। उन्हें आगे बढ़ने के लिए समुचित अवसर उपलब्ध कराने के जरूरत है। श्री अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष से खेल प्रतियोगिताओं के लिए हर विकासखण्ड को हर वर्ष एक लाख रूपए का अनुदान दिया जाएगा। इसमें 75 हजार रूपए खेल सामग्री क्रय करने पर व्यय किया जा सकता है। शेष 25 हजार रूपए का उपयोग प्रतियोगिता आयोजन के समय किया जा सकता है।
क्रमांक-2368/राजेश

