शिक्षा का अधिकार कानून को सफल बनाना हम सबकी जिम्मेदारी-स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल
दो दिवसीय कार्यशाला का समापन
रायपुर, 20 अगस्त 2010

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय कर्मियों की संवेदनशीलता के साथ दायित्व निर्वहन में अधिक सक्रियता पर जोर दिया है। श्री अग्रवाल ने कहा हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार कानून बेहतर तरीके से लागू हो और इस कानून का लाभ छत्तीसगढ़ के बच्चों को मिले। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधानों के अनुरूप अनेक कार्य शुरू हो चुके है। इन कार्यो को पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ पूर्ण करने के लिए विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना है। श्री अग्रवाल आज यहां स्कूल शिक्षा विभाग, राजीव गांधी शिक्षा मिशन और यूनीसेफ की छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला के समापन अवसर पर बोल रहे थे। यूनीसेफ की छत्तीसगढ़ इकाई की प्रमुख सुश्री शाहिन निलोफर ने समापन समारोह की अघ्यक्षता की।
इस कार्यशाला में दो दिन तक स्कूल शिक्षा विभाग, राजीव गांधी शिक्षा मिशन,आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति के मैदानी अधिकारियों के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाली विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों और शिक्षाविद्ों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने शिक्षा का अधिकार कानून के संबंध में व्यापक विचार विमर्श किया तथा इसे छत्तीसगढ़ में लागू करने के लिए जरूरी सुझाव दिए गए।
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा कि विभागीय दायित्वों को सफलता पूर्वक पूर्ण करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्यो को व्यवस्थित करने की जरूरत होती है। अधिकारियों को अपने कार्यो पूरा करने में अनावश्यक रूप से विलम्ब करने की प्रवृत्ति को त्यागना होगा। श्री अग्रवाल ने कहा कि कानून को लागू करने सबसे जरूरी नियमित मानिटरिंग की होगी। मानिटरिंग की कार्रवाई संकुल स्तर की जानी चाहिए। उसके बाद विकास खण्ड और जिला स्तर पर नियमित गहन समीक्षा की प्रक्रिया अपनायी जाए । श्री अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षकों पर इस कानून को लागू करने की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हमें शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को दूर करने के लिए सबसे पहले कार्रवाई करना चाहिए। संकुल स्तर, विकास खण्ड स्तर और जिला स्तर पर उनकी समस्याओं के शीध्र निराकरण के लिए कार्रवाई तत्परता से की जाए। अधिकारी स्कूलों का नियमित भ्रमण कर शिक्षकों की समस्याओं की जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों के हित में शुरू की योजनाओं का समुचित लाभ बच्चों को मिलना चाहिए। श्री अग्रवाल ने कहा कि नि:शक्त बच्चों के कल्याण के लिए राजीव गांधी शिक्षा मिशन के अंतर्गत अनेक योजनाएं संचालित है,परन्तु इन योजनाओं का पूरा लाभ नि:शक्त बच्चों को नहीं मिल रहा है। इस दिशा में संवेदनशील होकर और सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अनेक स्थानों में नि:शक्त बच्चों के लिए संचालित स्कूलों में पाठय-पुस्तकों की कमी भी देखने को मिली है। यह बड़ी चिंताजनक स्थिति है। विभिन्न योजनाओं के तहत इन बच्चों को उनकी जरूरत के अनुरूप श्रवण यंत्र, वैशाखी, ट्रायसिकल उपलब्ध करायी जा सकती है।
श्री अग्रवाल ने शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधानों की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें सामुदायिक सहभागिता पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। शिक्षकों के अलावा अभिभावकगणों को भी उत्तरदायित्व दिया गया है। इस बात की जानकारी अभिभावकों की दी जानी चाहिए। आम लोगों से आपसी समन्वय रख कर शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने से उनमें जागरूकता आएगी। शिक्षा मंत्री ने कानून को पूरी तरह लागू करने के लिए दी गई समय-सीमा में सभी कार्य पूर्ण करने के लिए अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। यूनीसेफ की छत्तीसगढ़ इकाई की प्रमुख सुश्री निलोफर ने अपने संबोधन में कानून के सफलतम क्रियान्वयन के लिए शिक्षा सुविधाओं के विकास से जुड़े सभी विभागों के बीच आपसी समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस कानून को लागू करने की जिम्मेदारी जिन पर है उनकी क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जाए। इसी के साथ कानून को लागू करने आगामी तीन साल के लिए समयबध्द योजना बनाई जाए। उन्होंने इसके लिए बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। संचालक, लोक शिक्षण श्री के.आर. पिस्दा ने इस दो दिवसीय कार्यशाला की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।

