अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की तैयारी शुरू :छत्तीसगढ़ में मनाया जाएगा प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह
रायपुर, तीन सितम्बर 2010
छत्तीसगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस आठ सितम्बर के अवसर पर प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह नौ सितम्बर से शुरू होगा। सप्ताह के दौरान प्रतिदिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा सभी जिला कलेक्टरों एवं जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को इस संबंध में परिपत्र जारी कर दिया गया है।
इस प्रपत्र के अनुसार प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह के प्रथम दिन जिला स्तर, विकासखण्ड स्तर और ग्राम पंचायत स्तर पर 'साक्षर महिला-साक्षर भारत' विषय पर संगोष्ठी या परिचर्चा आयोजित की जाएंगी। इस कार्यक्रम में साहित्यकारों, लेखकों, पत्रकारों, बुध्दिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को आमंत्रित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कम से कम 60 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। दूसरे दिन सभी शैक्षणिक संस्थाओं में कार्यक्रम होंगे। इसी प्रकार ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में साक्षर भारत कार्यक्रम पर केन्द्रित क्वीज प्रतियोगिता, भाषण, वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला, मेहंदी, रंगोली आदि की प्रतियोगिताएं होंगी। भाषण, वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताएं साक्षर महिला-साक्षर भारत, साक्षरता से सशक्तिकरण, जेण्डर समानता और साक्षरता से कौशल विकास पर आधारित होंगी। इन प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं, महिला नव साक्षरों, शिक्षिकाआें, महिला जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों की महिला कर्मियों को प्राथमिकता से शामिल किया जाएगा।
प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह के तीसरे दिन जिला स्तर, विकासखण्ड स्तर और ग्राम पंचायत स्तर पर जन-प्रतिनिधियों के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। साक्षर भारत पर केन्द्रित विचार-गोष्ठी, गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। जन शिक्षण संस्थाओं एवं स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी सह-विक्रय किया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं द्वारा तैयार खाद्य पदार्थों की प्रदर्शनी व प्रतियोगिताएं रखी गयी हैं। इनमें छत्तीसगढ़ी व्यंजन जैसे ठेठरी, खुरमी, पेपची, बोबरा, पीड़िया, चीला, देहरोरी, फेनी, कुसली, ऐरसा, गुलगुला की प्रदर्शनी लगेंगी। चौथे दिन महिला साक्षरता पर केन्द्रित जागृति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में महिला स्व-सहायता समूहों, मितानिनों, आंगनबाड़ी कायकर्ताओं, महिला मंडलों आदि की सदस्यों के बीच महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर चर्चा की जाएगी इसके अलावा खो-खो, कबड्डी, फुगड़ी, मटका फोड़, रस्सा खीच, दौड़, सूई-धागा दौड़ और कुसी दौड़ के कार्यक्रम रखे गए हैं। गीत प्रतियोगिता में एकल गीत, समूह गीत, जसगीत, भोजली, ददरिया, कर्मा, भड़ौनी, भजन-कीर्तन और रामायण गायन की प्रतियोगिताएं रखी गयी है। नृत्य प्रतियोगिता में कर्मा, पंथी, सुआ, राउत नाच एवं स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले नृत्य एवं गीत का प्रदर्शन होगा। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले नृत्यों एवं गीतों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती है। पांचवे दिन समस्त प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों में साक्षरता संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में साहित्यकारों/ रचनाकारों/ नव साक्षरों/असाक्षरों/ समतुल्यता शिक्षार्थियों से महिला सशक्तिकरण व महिला साक्षरता विषय पर चर्चा की जा सकती है। जन शिक्षण संस्थाओं के सहयोग से साक्षर भारत कार्यक्रम पर केन्द्रित स्लोगन, गीत व पोस्टर की प्रतियोगिताएं होंगी।
प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह का समापन 14 सितम्बर को होगा। 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस भी मनाया जाता है। इस दिन गुणवत्तापूर्ण वाचन के अनेक विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं। गुणवत्तापूर्ण वाचन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के उद्बोधन के बाद उनके साथ उपस्थित जनसमुदाय द्वारा आधे घंटे तक वाचन किया जाएगा। वाचन कार्यक्रम में पढ़ी गयी पुस्तक के संबंध में मुख्य अतिथि द्वारा विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। साक्षर भारत कार्यक्रम के लिए चिन्हित प्रत्येक प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र में अनिवार्य रूप से वाचन का कार्यक्रम होगा। इसके लिए प्रत्येक वाचन केन्द्र में पांच-पांच सदस्यों का वाचक समूह बनाया जाएगा। इन समूहों में स्कूली छात्र-छात्राओं, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों, युवा क्लबों, क्रिकेट क्लबों, रामायण एवं लीला मंडलियों के सदस्यों को विशेष तौर पर शामिल किया जाएगा। इसके अलावा नव साक्षरों/समतुल्यता शिक्षार्थियों/स्वयंसेवी अनुदेशिकाओं का सम्मान करने के लिए जिला स्तर से ग्राम पंचायत स्तर तक कार्यक्रम रखे जाएंगे। साक्षरता अनुदेशकों द्वारा 10 असाक्षरों को साक्षर बनाने का संकल्प पत्र भरा जाएगा।
इस प्रपत्र के अनुसार प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह के प्रथम दिन जिला स्तर, विकासखण्ड स्तर और ग्राम पंचायत स्तर पर 'साक्षर महिला-साक्षर भारत' विषय पर संगोष्ठी या परिचर्चा आयोजित की जाएंगी। इस कार्यक्रम में साहित्यकारों, लेखकों, पत्रकारों, बुध्दिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को आमंत्रित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कम से कम 60 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। दूसरे दिन सभी शैक्षणिक संस्थाओं में कार्यक्रम होंगे। इसी प्रकार ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में साक्षर भारत कार्यक्रम पर केन्द्रित क्वीज प्रतियोगिता, भाषण, वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला, मेहंदी, रंगोली आदि की प्रतियोगिताएं होंगी। भाषण, वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताएं साक्षर महिला-साक्षर भारत, साक्षरता से सशक्तिकरण, जेण्डर समानता और साक्षरता से कौशल विकास पर आधारित होंगी। इन प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं, महिला नव साक्षरों, शिक्षिकाआें, महिला जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों की महिला कर्मियों को प्राथमिकता से शामिल किया जाएगा।
प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह के तीसरे दिन जिला स्तर, विकासखण्ड स्तर और ग्राम पंचायत स्तर पर जन-प्रतिनिधियों के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। साक्षर भारत पर केन्द्रित विचार-गोष्ठी, गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। जन शिक्षण संस्थाओं एवं स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी सह-विक्रय किया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं द्वारा तैयार खाद्य पदार्थों की प्रदर्शनी व प्रतियोगिताएं रखी गयी हैं। इनमें छत्तीसगढ़ी व्यंजन जैसे ठेठरी, खुरमी, पेपची, बोबरा, पीड़िया, चीला, देहरोरी, फेनी, कुसली, ऐरसा, गुलगुला की प्रदर्शनी लगेंगी। चौथे दिन महिला साक्षरता पर केन्द्रित जागृति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में महिला स्व-सहायता समूहों, मितानिनों, आंगनबाड़ी कायकर्ताओं, महिला मंडलों आदि की सदस्यों के बीच महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर चर्चा की जाएगी इसके अलावा खो-खो, कबड्डी, फुगड़ी, मटका फोड़, रस्सा खीच, दौड़, सूई-धागा दौड़ और कुसी दौड़ के कार्यक्रम रखे गए हैं। गीत प्रतियोगिता में एकल गीत, समूह गीत, जसगीत, भोजली, ददरिया, कर्मा, भड़ौनी, भजन-कीर्तन और रामायण गायन की प्रतियोगिताएं रखी गयी है। नृत्य प्रतियोगिता में कर्मा, पंथी, सुआ, राउत नाच एवं स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले नृत्य एवं गीत का प्रदर्शन होगा। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले नृत्यों एवं गीतों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती है। पांचवे दिन समस्त प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों में साक्षरता संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में साहित्यकारों/ रचनाकारों/ नव साक्षरों/असाक्षरों/ समतुल्यता शिक्षार्थियों से महिला सशक्तिकरण व महिला साक्षरता विषय पर चर्चा की जा सकती है। जन शिक्षण संस्थाओं के सहयोग से साक्षर भारत कार्यक्रम पर केन्द्रित स्लोगन, गीत व पोस्टर की प्रतियोगिताएं होंगी।
प्रौढ़ शिक्षार्थी सप्ताह का समापन 14 सितम्बर को होगा। 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस भी मनाया जाता है। इस दिन गुणवत्तापूर्ण वाचन के अनेक विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं। गुणवत्तापूर्ण वाचन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के उद्बोधन के बाद उनके साथ उपस्थित जनसमुदाय द्वारा आधे घंटे तक वाचन किया जाएगा। वाचन कार्यक्रम में पढ़ी गयी पुस्तक के संबंध में मुख्य अतिथि द्वारा विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। साक्षर भारत कार्यक्रम के लिए चिन्हित प्रत्येक प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र में अनिवार्य रूप से वाचन का कार्यक्रम होगा। इसके लिए प्रत्येक वाचन केन्द्र में पांच-पांच सदस्यों का वाचक समूह बनाया जाएगा। इन समूहों में स्कूली छात्र-छात्राओं, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों, युवा क्लबों, क्रिकेट क्लबों, रामायण एवं लीला मंडलियों के सदस्यों को विशेष तौर पर शामिल किया जाएगा। इसके अलावा नव साक्षरों/समतुल्यता शिक्षार्थियों/स्वयंसेवी अनुदेशिकाओं का सम्मान करने के लिए जिला स्तर से ग्राम पंचायत स्तर तक कार्यक्रम रखे जाएंगे। साक्षरता अनुदेशकों द्वारा 10 असाक्षरों को साक्षर बनाने का संकल्प पत्र भरा जाएगा।
क्रमांक-.2654/राजेश

