पेयजल व्यवस्था : नक्सल पीड़ित जिलों के लिए छत्तीसगढ़ ने केन्द्र से मांगा चार सौ करोड़ रूपए का विशेष पैकेज : श्री कश्यप
प्रदेश में हैण्ड पम्पों की संख्या अब राष्ट्रीय औसत से अधिकशौचालय निर्माण के लिए लोगों को आर्थिक सहायता
देने के राज्य सरकार के प्रयास सराहनीय : भारत सरकार के सचिव ने कहा
रायपुर 09 सितंबर 2010

नक्सल पीड़ित जिलों में पेयजल व्यवस्था के लिए छत्तीसगढ़ ने केन्द्र सरकार से चार सौ करोड़ रूपए के विशेष पैकेज की मांग की है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने इसका प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेज दिया है। यह जानकारी राजधानी रायपुर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता कार्यक्रम पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में विभागीय मंत्री श्री केदार कश्यप ने दी। कार्यशाला का शुभारंभ प्रदेश के स्कूल शिक्षा और लोक निर्माण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री केदार कश्यप ने कार्यशाला में बताया कि सम्पूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ में सरकारी अनुदान से लगभग सत्रह लाख घरों में पक्के शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार के लगातार प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश में हैण्डपम्पों की संख्या राष्ट्रीय औसत की दृष्टि काफी आगे हो गयी है। देश में पेयजल के लिए हैण्डपम्पों का राष्ट्रीय औसत प्रत्येक ढाई सौ की आबादी पर एक हैण्ड पम्प का है, जबकि छत्तीसगढ़ में आज की स्थिति में हर 70 से 80 लोगों पर एक हैण्ड पम्प की सुविधा उपलब्ध करा दी गयी है। कार्यशाला में भारत सरकार के ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अरूण कुमार मिश्रा ने छत्तीसगढ़ में पक्के शौचालयों के निर्माण के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक गरीब परिवार को दी जा रही 1900 रूपए की विशेष आर्थिक सहायता का उल्लेख किया और इसके लिए राज्य सरकार की विशेष रूप से तारीफ की। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ के इस प्रावधान को एक मॉडल के रूप में पूरे देश में लागू करने के बारे में गंभीरता से विचार कर रही है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था एवं स्वच्छता के लिए केन्द्र शासन से विशेष पैकेज की मांग की। श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति, वन क्षेत्रों की बहुलता, ग्रामीण जन-जीवन तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग की जनसंख्या को देखते हुए विशेष परियोजना संचालित करने की जरूरत है। केन्द्र शासन और राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से ऐसी योजनाएं बनाई जानी चाहिए, जिनसे छत्तीसगढ़ की भविष्य की पेयजल की जरूरतों की आसानी से पूर्ति हो सके। छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों का व्यापक अध्ययन करने के बाद स्वच्छता के लिए भी कार्य योजना बनायी जाए। श्री अग्रवाल ने आज यहां आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
यह कार्यशाला केन्द्र शासन के ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा राज्य शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यशाला के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर राज्य शासन के संसदीय सचिव श्री महेश गागड़ा, पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि, समाज सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग भारत सरकार के सचिव श्री अरूण कुमार मिश्रा, छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव श्री पी. जॉय उम्मेन, ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग भारत सरकार के संयुक्त सचिव द्वय श्री जे.एस. माथुर, श्री विजय भास्कर, राज्य शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री दिनेश कुमार श्रीवास्तव सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न राजस्व संभागों के कमिश्नर, जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इनके अलावा महिला सशक्तिकरण के लिए जमुना लाल बजाज राष्ट्रीय स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित राजनांदगांव जिले की श्रीमती फूलबासन यादव विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में कार्यशाला में शामिल हुई और उन्होंने इस विषय में अपने अनुभव भी सुनाए।
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने कार्यशाला में कहा कि छत्तीसगढ़ में शुध्द पेयजल की आपूर्ति तथा स्वच्छता के लिए भी अनेक उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में स्वच्छता के विभिन्न कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन के कारण भी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान बनी है। राज्य सरकार द्वारा विभिन्न स्वच्छता कार्यक्रमों के तहत गरीबी रेखा श्रेणी के परिवारों को उनके घरों में शौचालय निर्माण के लिए सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को भी शौचालय निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करने के साथ-साथ स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखने के लिए छत्तीसगढ़ में जनजागरूकता की सबसे ज्यादा जरूरत है। इस दिशा में सामुदायिक शौचालय अधिक कारगर साबित होगा। श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बड़े-बड़े गांवों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए कार्ययोजना बनाकर अमल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सामुदायिक शौचालय के रख-रखाव के लिए समुचित उपाय होना चाहिए। हर जिले में कम से कम सौ गांव का चयन कर वहां सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया जाए।
श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्वच्छता कार्यक्रमों की शत-प्रतिशत सफलता के लिए जनसहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रदेश के स्कूलों में बनाए गए शौचालयों तथा सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में बने शौचालयों का उपयोग सुनिश्चित करने इन शौचालयों में पानी की व्यवस्था करना जरूरी है। श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ का बहुत बड़ा हिस्सा खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है। इन क्षेत्रों के निवासियों को लोहा तथा आर्सेनिक तत्व मिले हुए पानी पीने की मजबूरी है। इन क्षेत्रों में पेयजल को साफ करने की तकनीक काफी महंगी है। इन इलाकों के हर टयूब- वेल में पानी साफ करने के लिए प्लांट लगाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए राज्य शासन पूरी गंभीरता और सक्रियता से प्रयास कर रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री केदार कश्यप ने बताया कि प्रदेश सरकार ने जनता को शुध्द पेयजल और स्वच्छता योजनाओं का लाभ दिलाने हर संभव प्रयास किए हैं। राष्ट्रीय मानदण्ड के अनुसार प्रत्येक ढाई सौ की जनसंख्या में एक हैण्डपम्प की जरूरत होती है, जबकि छत्तीसगढ़ में 70 से 80 व्यक्तियों के लिए एक हैण्डपम्प की सुविधा उपलब्ध है। श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर विशेषरूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के साफ पानी की सुविधा मुहैया कराने अनेक योजनाएं संचालित की गयी हैं। इसी प्रकार भू-जल के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत 17 लाख परिवारों के लिए शौचालय बनाए गए हैं, परन्तु इनका शत-प्रतिशत उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरण लाने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न विभागों के मैदानी कर्मचारियों को इस काम में लगाया जाना चाहिए। श्री कश्यप ने कहा कि राज्य में भू-जल संरक्षण और संवर्धन के लिए चेक डेम, स्टाप डेम, एनीकट जैसे उपायों के साथ पानी रोकने के अन्य अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्ष में गरीबी रेखा श्रेणी के परिवारों के लिए पक्के शौचालयों के निर्माण में 59 प्रतिशत और ए.पी.एल. परिवारों के यहां ऐसे शौचालयों के निर्माण में 41 प्रतिशत की प्रगति हुई है। शौचालय निर्माण की प्रगति स्कूलों में 93 प्रतिशत और आंगनबाड़ी केन्द्रों में 96 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। संसदीय सचिव श्री महेश गागड़ा ने कहा कि स्वच्छ भारत-समृध्द भारत की परिकल्पना को साकार करने में छत्तीसगढ़ का भी योगदान रहेगा। राज्य में स्वच्छता कार्यक्रमों को जिस गंभीरता से लागू किया जा रहा है, उससे लगता है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में इस दिशा में विशेष प्रगति होगी। उन्होंने वन क्षेत्रों में लोहा और फ्लोराईड युक्त प्रदूषित पानी को पीने योग्य बनाने के लिए विशेष काम करने की जरूरत बतायी।
केन्द्रीय ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अरूण कुमार मिश्रा ने कहा कि गुजरात और हिमाचल की तरह छत्तीसगढ़ में भी पेयजल और स्वच्छता कार्यक्रमों में काफी उल्लेखनीय प्रगति देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि पेयजल और स्वच्छता भी छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता में है यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों के पानी में खनिज तत्व पाए गए हैं, परन्तु बहुत गंभीर संकट की स्थिति नहीं हैं। श्री मिश्रा ने सम्पूर्ण स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरे प्रदेश में निर्मल छत्तीसगढ़ अभियान चलाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा श्रेणी के परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए 19 सौ रूपए की राशि दी जाती है। इसके लिए प्रदेश सरकार बधाई की पात्र है। केन्द्र सरकार इसे पूरे देश में लागू करने का विचार कर रही है।
राज्य शासन के मुख्य सचिव श्री उम्मेन ने स्वच्छता कार्यक्रमों के और अधिक कारगर क्रियान्वयन के लिए नये उपाय करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेयजल और स्वच्छता के क्षेत्र में हम वर्षो से काम करते हुए आ रहे हैं परन्तु इसमें आशातीत सफलता हमें नहीं मिल पायी है। इसके लिए वर्तमान में लागू योजनाओं की समीक्षा के बाद नये तरीके अपनाने होंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी डायरिया, पीलिया ,निमोनिया आदि बीमारियों से मौत की घटनाएं होती हैं। इन सभी बीमारियों की जड़ में पेयजल और स्वच्छता ही है। ऐसे में हमें और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले दो सालों में भू-जल के संरक्षण और संरक्षण के लिए सभी जिलों में प्रशंसनीय कार्य किए गए हैं। ये कार्य आगे भी चलते रहना चाहिए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री दिनेश श्रीवास्तव ने कार्यशाला आयोजित करने के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होने प्रदेश में संचालित पेयजल योजनाओं सहित सम्पूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम की उपलब्धियों की जानकारी भी दी।

