निजी चिकित्सा कॉलेजों द्वारा संचालित बी.एच.एम.एस., बी.ए.एम.एस., बी.यू.एम.एस. और बी.एन.वाई.एस. पाठयक्रमों के लिए अंतरिम फीस निर्धारित
रायपुर, 03 दिसम्बर 2010
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में निजी चिकित्सा महाविद्यालयों द्वारा संचालित बैचलर-ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी (बी.एच.एम.एस.), बैचलर-ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी (बी.ए.एम.एस.), बैचलर-ऑफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी (बी.यू.एम.एस.) और बैचलर-ऑफ नेचुरोपैथी एण्ड योगा साइंस (बी.एन.वाई.एस.) के पाठयक्रमों में सत्र 2010-11 में दाखिले के लिए अंतरिम शुल्क की घोषणा कर दी है। यह शुल्क उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश श्री व्ही. के. श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित फीस विनयामक समिति द्वारा निर्धारित की गयी है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्क निर्धारण्ा) अधिनियम 2008 के तहत इस समिति का गठन किया है। तकनीकी शिक्षा, जनशक्ति नियोजन और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा यहां मंत्रालय से 19 नवम्बर को जारी आदेश में कहा गया है कि समिति की ओर से निर्धारित यह शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू होगा और तब तक लागू रहेगा, जब तक कि फीस विनियामक समिति द्वारा कोई अन्य शुल्क निर्धारित नहीं कर दिया जाता।
फीस विनियामक समिति द्वारा निर्धारित अंतरिम वार्षिक फीस (शिक्षण शुल्क एवं अन्य शुल्क) बी.एच.एम.एस. पाठयक्रमों हेतु छदामी लाल चौकसे मेमोरियल होम्योपैथी मेडिकल कालेज एण्ड रिसर्च सेन्टर लाल खदान बिलासपुर के लिए 42 हजार 500 रूपए और महाराणा प्रताप होम्योपैथी मेडिकल कालेज न्यू राजेनद्र नगर रायपुर के लिए 42 हजार 500 रूपए, रायपुर होम्योपैथी मेडिकल यूनीवर्सिटी एण्ड हास्पिटल रामकुण्ड रायपुर के लिए 42 हजार 500 रूपए निर्धारित है। समिति द्वारा बी.ए.एम.एस. पाठयक्रमों हेतु छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कालेज मानकी राजनांदगांव के लिए 54 हजार 500 रूपए और राजीव लोचन आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज चंदखुरी दुर्ग के लिए 54 हजार 500 रूपए निर्धारित किया गया हैैं। समिति द्वारा बी.एन.वाई.एस. पाठयक्रमों के लिए श्री महावीर कालेज ऑफ योगा एण्ड नैचुरोपैथी नगपुरा दुर्ग के लिए 37 हजार 500 रूपए और मोहसिन मिलाट यूनानी मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल बैजनाथपारा रायपुर के लिए 44 हजार 500 रूपए अंतरिम वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि समिति द्वारा निर्धारित फीस से अधिक फीस लेना अथवाा निधारित मद से अन्य मद में फीस लेना केपीटेशन फीस कहलायेगा और इसके लिए दोषी संस्था पर अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यह फीस सत्र 2010-11 में प्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए है और यही फीस पूरे पाठयक्रम की अवधि के लिए लागू रहेगी। काशन मनी डेढ़ हजार रूपए केवल एक बार प्रवेश के समय लिया जाएगा, जो वापसी योग्य है। इस सत्र में प्रवेशित छात्र-छात्राओं से अगर किसी संस्थान ने निर्धारित शुल्क से अधिक राशि ली हो तो उसे वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि आधे वर्ष के लिए वार्षिक फीस की आधि राशि ही लिया जाना है। यदि कोई सेमेस्टर डेढ़ वर्ष का है तो छात्र से आनुपातिक डेढ़ वर्ष का ही फीस लिया जाना है, न कि दो वर्ष का। निर्धारित समय पर फीस जमा नहीं करने पर छात्र-छात्रा से अधिकतम 25 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से विलम्ब शुल्क भी लिया जा सकेगा। संस्था द्वारा परिवहन शुल्क, छात्रावास शुल्क और मेस शुल्क 'न लाभ-न हानि' के आधार पर उपयोगकर्ता से लिया जाना है। विश्वविद्यालयीन शुल्क और काउंसिलिंग शुल्क क्रमश: विश्वविद्यालय और संचालनालय/शासन द्वारा जो निर्धारित किया गया है, वहीं लिया जाना चाहिए। निर्धारित की गयी फीस अधिकतम है। कोई संस्था अगर चाहे तो इससे कम फीस भी ले सकती है। विकास शुल्क की सम्पूर्ण राशि तथा अनिवार्य व्यय के बाद शेष रह गयी राशि का उपयोग केवल उसी संस्था के विकास के लिए व्यय किया जा सकेगा। इस राशि का अन्य संस्था या अन्य कार्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकेगा। अंतिम फीस का निर्धारण यदि अन्तरिम फीस से अधिक होता है, तो अन्तर की राशि छात्र-छात्रा को संस्था में जमा करनी होगी और यदि कम होता है, तो अन्तर की राशि संस्था द्वारा छात्र-छात्रा को वापस देय होगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह आदेश उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण क्रमांक डब्ल्यू.पी.(सी.) नं.-2112/2010 और 2388/2010 के अध्यधीन रहेगी और इन प्रकरणों में उच्च न्यायालय द्वारा दिए जाने वाले आदेश यहा निर्देश के अनुसार इस आदेश में बदलाव किया जा सकेगा।

