लक्ष्मी बनी सरस्वती
रायपुर 17 मार्च 2010
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के विकासखंड पाली स्थित ग्राम बड़े बांका की लक्ष्मीदेवी अब इस गांव के लिए सरस्वती बन गई है। लक्ष्मी ने चालीस वर्ष की उम्र में जिला साक्षरता समिति द्वारा आयोजित समतुल्यता परीक्षा महाअभियान में न सिर्फ 5वीं की परीक्षा में 77.5 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया बल्कि अब अपने पति के साथ गांव के निरक्षर लोगों को पढ़ना-लिखना सिखा रही है। शिक्षा के प्रति गहरी रूचि रखने वाली लक्ष्मीदेवी ने ठान लिया है कि वह अपने गांव के सभी निरक्षरों को साक्षर बनाकर पांचवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कराएगी।
बड़े बांका गांव की लक्ष्मी अस्वस्थ होने के साथ जीवन से निराश हो गई थी तथा जिन्दगी से पलायन करने जैसा घातक कदम भी उठा लिया था। ऐसे समय साक्षरता अभियान में मिली सफलता ने उसके जीवन में एक नई आशा का संचार किया। पांचवी की परीक्षा में सम्मानजनक स्थान पाने पर प्रशस्ति पत्र के साथ मेडल भी मिलने से लक्ष्मी का उत्साह और बढ़ गया जिससे वह साक्षरता के प्रचार-प्रसार के साथ परीक्षा के फार्म भरवाने जुट गई। आज लक्ष्मी गांव में साक्षरता के पुनीत कार्य में शामिल होने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है तथा अब तक पांचवीं तथा आठवीं की समतुल्यता परीक्षा के लिए 72 लोगों के फार्म भरवा चुकी है। लक्ष्मी देवी गांव के विद्यालय में जनभागीदारी समिति की सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रही है और जब बच्चे स्कूल नहीं पहुंचते है तो वह बच्चों के घर जाकर बच्चों के माता-पिता को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करती है। लक्ष्मीदेवी ने गांव में संचालित सतत शिक्षा केंद्र के लिए उपयुक्त भवन नहीं होने पर अपने पति की सलाह पर स्वयं के मकान को सतत शिक्षा केंद्र के लिए दान कर दिया है। अब तो लक्ष्मी अपने पति को भी पढ़ा रही है तथा उन्हें पांचवी की परीक्षा में बैठाने फार्म भर लिया है।
बड़े बांका गांव की लक्ष्मी अस्वस्थ होने के साथ जीवन से निराश हो गई थी तथा जिन्दगी से पलायन करने जैसा घातक कदम भी उठा लिया था। ऐसे समय साक्षरता अभियान में मिली सफलता ने उसके जीवन में एक नई आशा का संचार किया। पांचवी की परीक्षा में सम्मानजनक स्थान पाने पर प्रशस्ति पत्र के साथ मेडल भी मिलने से लक्ष्मी का उत्साह और बढ़ गया जिससे वह साक्षरता के प्रचार-प्रसार के साथ परीक्षा के फार्म भरवाने जुट गई। आज लक्ष्मी गांव में साक्षरता के पुनीत कार्य में शामिल होने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है तथा अब तक पांचवीं तथा आठवीं की समतुल्यता परीक्षा के लिए 72 लोगों के फार्म भरवा चुकी है। लक्ष्मी देवी गांव के विद्यालय में जनभागीदारी समिति की सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रही है और जब बच्चे स्कूल नहीं पहुंचते है तो वह बच्चों के घर जाकर बच्चों के माता-पिता को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करती है। लक्ष्मीदेवी ने गांव में संचालित सतत शिक्षा केंद्र के लिए उपयुक्त भवन नहीं होने पर अपने पति की सलाह पर स्वयं के मकान को सतत शिक्षा केंद्र के लिए दान कर दिया है। अब तो लक्ष्मी अपने पति को भी पढ़ा रही है तथा उन्हें पांचवी की परीक्षा में बैठाने फार्म भर लिया है।
क्रमांक 4429/परिहार

