शाला प्रवेश अभियान को मिली उल्लेखनीय सफलता : एक लाख से अधिक बच्चे पहुंचे स्कूल
नक्सल हिंसा प्रभावित दक्षिण बस्तर जिले में सबसे अधिक 29 हजार बच्चों को जोड़ा गया स्कूलों से
राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में शाला जाने योग्य सभी बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए चालू शिक्षा सत्र में संचालित शाला प्रवेश अभियान को उल्लेखनीय सफलता मिली है। इस अभियान के तहत इस साल बीते अक्टूबर माह तक की स्थिति में एक लाख तीन हजार 523 बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया गया। शाला प्रवेश अभियान को सबसे अधिक सफलता प्रदेश के नक्सल हिंसा प्रभावित जिला दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) मिली। इस जिले में शाला प्रवेश अभियान और अन्य प्रयासों से 29 हजार 725 बच्चों को स्कूलों से जोड़ा गया है।
राजीव गांधी शिक्षा मिशन के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि शाला प्रवेश अभियान के तहत बस्तर जिले में छह हजार 130, बीजापुर जिले में सात हजार 44, बिलासपुर जिले में तीन हजार 388, धमतरी जिले में तीन हजार 59, दुर्ग जिले में चार हजार 167, जांजगीर-चांपा जिले में आठ हजार 645, जशपुर जिले में एक हजार 305, उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले में दो हजार 410, कबीरधाम जिले में तीन हजार 20, कोरबा जिले में तीन हजार 931, कोरिया जिले में 910, महासमुन्द जिले में दो हजार 47, नारायणपुर जिले में एक हजार 316, रायगढ़ जिले में 865, रायपुर जिले में 19 हजार 495, राजनांदगांव जिले में एक हजार 561 तथा सरगुजा जिले में तीन हजार 399 बच्चों को स्कूलों में प्रवेश कराया गया।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी शाला त्यागी तथा शाला अप्रवेशी बच्चों को स्कूलों में दाखिल कराने एक माह तक शाला प्रवेश अभियान के तहत शाला प्रवेश उत्सव मनाया गया। 'स्कूल आ पढ़े बर, जिन्दगी ल गढ़े बर' के नारों के साथ यह उत्सव नये शिक्षा सत्र की शुरूआत में 16 जून से प्रारंभ होकर 15 जुलाई तक चला। अधिकारियों ने यह भी बताया कि दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में 37 स्थानों तथा बीजापुर जिले में 10 स्थानों में शाला अप्रवेशी तथा शाला त्यागी बच्चों के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत गुरूकुल आवासीय आश्रम शाला संचालित की जा रही है। इन शालाओं में बच्चों के लिए नि:शुल्क आवासीय सुविधा के साथ अध्ययन की व्यवस्था की गयी है। आश्रम शालाएं राहत शिविरों के नजदीक खोली गयी हैं। इन आश्रम शालाओं तक आवागमन की सुविधा भी उपलब्ध है।

