स्कूलों में अगले सत्र से जीवन विद्या की शिक्षा : सामाजिक मुद्दों पर भी बच्चों के बीच होगी चर्चा
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रोहणीपुरम में राज्य स्तरीय मेधावी छात्र अलंकरण समारोह आयोजित
रायपुर, 22 दिसम्बर 2010
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के स्कूलाें में अगले शिक्षा सत्र से कक्षा पहली से बारहवीं तक बच्चों को जीवन विद्या और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ ही प्रतिदिन प्रथम कालखण्ड में पर्यावरण सुरक्षा, हम और हमारा स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, सुगम यातायात, चेतना विकास, योग, सामूहिक कर्तव्य जैसे विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर विद्यार्थियों के बीच चर्चा होगी। श्री अग्रवाल आज यहां सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरस्वती विहार रोहणीपुरम में आयोजित राज्य स्तरीय मेधावी छात्र अलंकरण समारोह 2010 को अध्यक्षीय आसंदी से सम्बोधित कर रहे थे। विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोविन्द प्रसाद शर्मा समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस समारोह में सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ से सम्बध्द सरस्वती शिशु मंदिरों के मेधावी बच्चों तथा छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा आयोजित हायर सेकेण्डरी एवं हाई स्कूल परीक्षा वर्ष 2010 में प्रावीण्य सूची में स्थान बनाने वाले सरस्वती शिशु मंदिरों के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

श्री अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा संस्थानों में ऐसी शिक्षा देनी चाहिए जिससे बच्चे आगे चलकर सच्चे देशभक्त बने। श्री अग्रवाल ने इस अवसर पर समाज में अच्छे कार्य करने वालों के सम्मान की परम्परा विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे सामाजिक सरोकारों से जुड़ने की प्रेरणा अन्य लोगाें को भी मिलेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री ने समारोह में पुरस्कृत विद्यार्थियों से राष्ट्रवाद का अलख जगाने का आग्रह किया। डॉ. गोविन्द शर्मा ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में स्कूलों में बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा देने से विचारों में गहनता, स्पष्ट रूप से समझने की क्षमता और हर विषय को जानने की उत्सुकता बच्चों के मन में पैदा होती है। इससे विवेक, बुध्दि और समझ शक्ति बढ़ती है। श्री शर्मा ने कहा कि विद्याभारती अखिल भारतीय सरस्वती शिक्षा संस्थान से जुड़े सरस्वती शिशु मंदिरों में समाज और राष्ट्र से जुड़ने की शिक्षा दी जाती है। विद्याभारती की धरातल राष्ट्रवाद और मानवतावाद के विचारों पर केन्द्रित है। मातृभाषा में गुणात्मक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिरों की पहचान बन गई है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि जो समाज युवा प्रतिभाओं का सम्मान नहीं करता वह समाज कभी प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने बच्चों से अनुकरण करने की प्रवृत्ति त्यागने का आग्रह करते हुए अपने विवेक से आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जीवन में स्वयं दीपक बनकर आगे बढ़ें और समाज का मार्गदर्शन करें। इस अवसर पर श्री शारदा भैया ने कहा कि बच्चों के लिए सम्मानित होने का समय संकल्प लेने का समय होता है। बच्चे महाभारत के अर्जुन के समान अपने लक्ष्य पर नजर रखें। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व के सर्वागीण विकास की बात तो सभी करते है। इसका अक्षरश: पालन विद्याभारती के शैक्षणिक संस्थानों में किया जाता है। मनुष्य की पहचान उसकी गुणवत्ता होती है। बच्चों को गुणवत्ता विकसित करने खुद प्रयास करना चाहिए।
समारोह में वार्षिक शैक्षिक पत्रिका 'कीर्तिमान' नवम् सत्र 2010-11 का विमोचन भी किया गया। इस पत्रिका में पुरस्कृत बच्चों की सम्पूर्ण जानकारी उनकी उपलब्धियों के साथ प्रकाशित की गई। इस अवसर पर विद्याभारती सरस्वती शिक्षा संस्थान से जुड़े अनेक बुध्दिजीवी भी उपस्थित थे।

