संस्कृत भाषा के इतिहास को जानने का अवसर मिला विश्व संस्कृत पुस्तक मेले में
छत्तीसगढ़ के सौ से अधिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए
रायपुर 19 जनवरी 2011

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में आयोजित विश्व संस्कृत पुस्तक मेला देवभाषा संस्कृत के इतिहास और वर्तमान में इस भाषा के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों को जानने-समझने का अच्छा माध्यम बना। पुस्तक मेले में संस्कृत साहित्य के अनेक प्रकाशकों ने अपने स्टॉल लगाकर मेले में आने वाले लोगों को संस्कृत साहित्य से परिचय कराया। छत्तीसगढ़ के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं के सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने भी विश्व संस्कृत पुस्तक मेले में शामिल होकर संस्कृत भाषा के विकास की नई दृष्टि, नए संकल्प और नये प्रकल्पों को जाना। छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामंडलम के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधि मंडल इस मेले में शामिल हुआ। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल भी इस पुस्तक मेले के दूसरे दिन आयोजित समारोह में शामिल हुए और राज्य में संस्कृत भाषा को विकसित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासाें की जानकारी दी। उन्होंने भविष्य में विश्व संस्कृत पुस्तक मेला छत्तीसगढ़ में आयोजित करने का आग्रह मेले के आयोजकों से किया।
पुस्तक मेले में देश के सभी राज्यों के संस्कृत भाषा के विद्वानों ने भागीदारी की। पुस्तक मेले का आयोजन बेंगलुरू के नेशनल हाईस्कूल बसवंड गुड़ी के विशाल प्रांगण में किया गया। इस प्रांगण में संस्कृत भाषा के पुस्तकों के साथ-साथ संस्कृत में सन्निहित विज्ञान पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। मेला परिसर जयतु भारतम्, जयतु संस्कृतम, वदतु-वदतु संस्कृत भाषा और जयतु-जयतु संस्कृत भाषा के उद्धोष से गूंजता रहा। परिसर में देश के विभिन्न राज्यों में संस्कृत भाषा के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों को सूचना पट्टिकाओं के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम द्वारा भी प्रदेश में संस्कृत भाषा के उन्नयन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सूचना पट्टिकाएं लगायी गई। मेले में प्रतिदिन संस्कृत वृन्दगान, संस्कृत संगोष्ठी, पुस्तक लोकार्पण समारोह एवं संस्कृत सम्मान कार्यक्रमों के अलावा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। छत्तीसगढ़ राज्य से संस्कृत भाषा की विदुषी डॉ. श्रीमती पुष्पा दीक्षित पुस्तक मेले में मंचीय प्रतिभागी के रूप में शामिल हुई। उनकी कृतियों का लोकार्पण भी किया गया।
संस्कृत भारती संस्कृत के प्रांतीय अध्यक्ष संत काशीनाथ चतुर्वेदी, संस्कृत भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री श्री देवेन्द्र कुमार, छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् के सचिव डॉ. सुरेश कुमार शर्मा, श्री पी.डी. मिश्रा, सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम्, डॉ. विद्यावती चन्द्राकर सहायक प्राध्यापक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद डॉ. श्री तोयनिधि वैष्णव प्राध्यापक शासकीय संस्कृत महाविद्यालय रायपुर, तथा डॉ. नन्हें प्रसाद द्विवेदी सहित अन्य विद्वानों, संस्कृत शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने विश्व संस्कृत पुस्तक मेले में भागीदारी की।
पुस्तक मेले में देश के सभी राज्यों के संस्कृत भाषा के विद्वानों ने भागीदारी की। पुस्तक मेले का आयोजन बेंगलुरू के नेशनल हाईस्कूल बसवंड गुड़ी के विशाल प्रांगण में किया गया। इस प्रांगण में संस्कृत भाषा के पुस्तकों के साथ-साथ संस्कृत में सन्निहित विज्ञान पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। मेला परिसर जयतु भारतम्, जयतु संस्कृतम, वदतु-वदतु संस्कृत भाषा और जयतु-जयतु संस्कृत भाषा के उद्धोष से गूंजता रहा। परिसर में देश के विभिन्न राज्यों में संस्कृत भाषा के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों को सूचना पट्टिकाओं के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम द्वारा भी प्रदेश में संस्कृत भाषा के उन्नयन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सूचना पट्टिकाएं लगायी गई। मेले में प्रतिदिन संस्कृत वृन्दगान, संस्कृत संगोष्ठी, पुस्तक लोकार्पण समारोह एवं संस्कृत सम्मान कार्यक्रमों के अलावा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। छत्तीसगढ़ राज्य से संस्कृत भाषा की विदुषी डॉ. श्रीमती पुष्पा दीक्षित पुस्तक मेले में मंचीय प्रतिभागी के रूप में शामिल हुई। उनकी कृतियों का लोकार्पण भी किया गया।
संस्कृत भारती संस्कृत के प्रांतीय अध्यक्ष संत काशीनाथ चतुर्वेदी, संस्कृत भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री श्री देवेन्द्र कुमार, छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् के सचिव डॉ. सुरेश कुमार शर्मा, श्री पी.डी. मिश्रा, सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम्, डॉ. विद्यावती चन्द्राकर सहायक प्राध्यापक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद डॉ. श्री तोयनिधि वैष्णव प्राध्यापक शासकीय संस्कृत महाविद्यालय रायपुर, तथा डॉ. नन्हें प्रसाद द्विवेदी सहित अन्य विद्वानों, संस्कृत शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने विश्व संस्कृत पुस्तक मेले में भागीदारी की।
क्रमांक-5772/राजेश

