छत्तीसगढ़ में 1.25 करोड़ लोगों को मिलेगा रोजगार प्रशिक्षण
कुशल तकनीशियन और प्रशिक्षित मानव संसाधन के रूप में तैयार होंगे लोग
क्षमता विकास मिशन के प्रथम चरण में साठ शासकीय आई.टी.आई का चयन
प्रशिक्षण के इच्छुक व्यक्ति साल भर दे सकेंगे आवेदन
लगातार चलेगा अल्प अवधि प्रशिक्षण का सिलसिला
रायपुर 22 अप्रैल 2010
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में आगामी बारह साल के भीतर अर्थात वर्ष 2022 तक कार्यशील जनसंख्या में से एक करोड़ 25 लाख लोगों को कुशल तकनीशियन और प्रशिक्षित मानव संसाधन के रूप में तैयार करने और उन्हें रोजगार अथवा स्व-रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए संचालित छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता विकास मिशन के तहत प्रथम चरण में साठ शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं का चयन किया गया है। मिशन के तहत राज्य में छह निजी संस्थाओं को भी प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में शामिल किया गया है। मिशन के संचालन के लिए राज्य सरकार के तकनीकी शिक्षा और जनशक्ति नियोजन विभाग को नोडल विभाग के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गयी है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता विकास मिशन से संबंधित विभिन्न प्रकार के 45 सेक्टरों में एक हजार 090 पाठयक्रमों को चिन्हांकित किया गया है, जिनमें 14 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण अल्प अवधि का होगा और लगातार चलेगा।
विभागीय अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इन पाठयक्रमों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाईडर) के रूप में राज्य के चयनित साठ शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में आई.टी.आई. माना तथा रायपुर और महिला आई.टी.आई. रायपुर सहित हथबंद, तिल्दा, कसडोल, बलौदाबाजार, गरियाबंद, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, मोहला, बिलासपुर, महिला आई.टी.आई. बिलासपुर, आई.टी.आई. गौरेला, मरवाही, दुर्ग, महिला आई.टी.आई. भिलाई तथा आई.टी.आई. संजारी, सुरेगांव, बेरला, बालोद, बेमेतरा, मारो, परपोड़ी, डौंडीलोहारा, महासमुंद, बसना, धमतरी, सारागांव, चिरमिरी, कांकेर, महिला आई.टी.आई. कांकेर तथा भानुप्रतापपुर, महिला आई.टी.आई. नारायणपुर, आई.टी.आई. अंतागढ़, सुकमा, गीदम, बस्तर, जगदलपुर, केशकाल, कोंडागांव, रायगढ़, महिला आई.टी.आई. रायगढ़, आई.टी.आई. घरघोड़ा, खरसिया, तपकरा, धर्मजयगढ़, पुसौर, सरिया, कुनकुरी, तमनार, पत्थलगांव, सारंगढ़, अम्बिकापुर, प्रतापपुर, कबीरधाम, महिला आई.टी.आई. कोरबा, आई.टी.आई. कोरबा और पाली शामिल हैं। इनके अलावा जिन आधा दर्जन निजी संस्थाओं का चयन इन पाठयक्रमों के संचालन के लिए किया गया है, उनमें मानव संसाधन विकास केन्द्र, भिलाई इस्पात संयंत्र भिलाई नगर, ग्रेसियस कॉलेज ऑफ नर्सिंग अभनपुर, मानव मित्र समिति समता कॉलोनी रायपुर, डी.एल.एस.पी.जी. कॉलेज सरकंडा बिलासपुर, लेप्रोसी मिशन छत्तीसगढ़ वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, बेलदारपारा चाम्पा, एस.ओ.एस. बाल ग्राम, माना कैम्प रायपुर और पी.एन.एस. कॉलेज राजेन्द्र नगर बिलासपुर शामिल हैं। विस्तृत जानकारी इन सभी शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और निजी संस्थाओं से भी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता विकास मिशन, तकनीकी शिक्षा संचालनालय छत्तीसगढ़ शासन, बैरनबाजार, रायपुर के कार्यालय में आकर अथवा वहां के टेलीफोन नम्बर 0771-4045142 अथवा 4090060 पर सम्पर्क किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए निर्धारित विषयों में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, भारतीय मिठाईयों और खाद्य पदार्थों के उत्पादन, रेडिमेड वस्त्र निर्माण, रेशम उद्योग, कुक्कुट पालन (पोल्ट्री फार्मिंग), मछली पालन और उससे जुड़े क्षेत्र, खिलौना निर्माण, रत्न एवं आभूषण निर्माण, खादी, बीमा, जूट उत्पादन, आटो मोबाईल रिपेयरिंग, बैंकिग तथा एकाउंटिंग, हेयर ड्रेसिंग, फैशन डिजायनिंग, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, प्लास्टिक प्रसंस्करण, गलीचा निर्माण, इलेक्ट्रिकल और फेब्रिकेशन, मेडिकल और नर्सिंग, पर्यटन व्यावसाय, मीडिया, काष्ठ कला, सिक्यूरिटी, प्रिंटिंग कार्य, पेपर प्रोडक्ट्स और टेक्सटाईल के अन्तर्गत कॉटन, डब्लिंग, विडिंग, रिलिंग, वेविंग, केमिकल प्रोसेसिंग, क्वालिटी कंट्रोल आदि पाठयक्रम शामिल हैं। ये पाठयक्रम राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.व्ही.टी.) से मान्यता प्राप्त माडयूलर इम्पायेबल स्कीम (एम.ई.एस.) के तहत तैयार किए गए हैं। आवेदन के लिए न्यूनतम आयु सीमा 14 वर्ष तय की गई है, जबकि कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है। अर्थात 14 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति इस प्रशिक्षण में शामिल हो सकता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने इच्छुक लोगों से आवेदन पत्र पूरे साल भर लिए जाएंगे और उन्हें उपलब्ध अधोसंरचनाओं के आधार पर अलग-अलग समूहो में प्रशिक्षण दिया जाएगा। क्षमता विकास मिशन के अन्तर्गत प्रशिक्षण के लिए राज्य के सभी शासकीय और पात्रता रखने वाले मान्यता प्राप्त संस्थानों का पंजीयन उनमें उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं के आधार पर किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार राज्य के स्कूल-कॉलेजों और तकनीकी संस्थाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं, शाला त्यागी बच्चों, औद्योगिक कामगारों, सरकारी और निजी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों, खेती में लगे किसानों और मजदूरों सहित सभी लोगों को इस योजना के तहत अपने कौशल उन्नयन और क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने का मौका मिलेगा। उन्हें प्रशिक्षित कर रोजगार तथा स्व-रोजगार के अवसरों में वृध्दि करना इस योजना का प्रमुख लक्ष्य है। यहां तक कि पांचवी कक्षा उत्तीर्ण व्यक्ति भी इस योजना के विभिन्न पाठयक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रख कर प्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी के जीवन यापन से जुड़े क्षेत्रों के अन्तर्गत कृषि खाद्य प्रसंस्करण, वन और वनोपज आधारित उद्योगों तथा ग्रामोद्योग को भी शामिल किया है। इसके अलावा राज्य में तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में बिजली, खदान और खनिज उद्योग, स्टील और सीमेंट उद्योग, अधोसंरचना निर्माण, सर्विस सेक्टर और शिक्षा को भी चिन्हांकित किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एम.ई.एस. पाठयक्रमों की अलग-अलग अवधि के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण शुल्क निर्धारित किए गए हैं। जिस एम.ई.एस. पाठयक्रम की अवधि 90 घंटे की होगी, उसका प्रशिक्षण शुल्क पांच सौ रूपए और 91 घंटे से 180 घंटे के पाठयक्रमों के लिए प्रशिक्षण शुल्क एक हजार रूपए निर्धारित किया गया है, वहीं 181 घंटे से 270 घंटे के पाठयक्रम का प्रशिक्षण शुल्क डेढ़ हजार रूपए रखा गया है। अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं और नि:शक्त श्रेणी के आवेदकों को प्रशिक्षण शुल्क में पच्चीस प्रतिशत की छूट दी जाएगी। प्रशिक्षण के बाद आयोजित परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर प्रशिक्षण्ाार्थियों को प्रशिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क वापस कर दिया जाएगा। परीक्षा शुल्क निर्धारित पाठयक्रमों के अनुसार पांच सौ से आठ सौ रूपए तक होगा। प्राप्त आवेदनों पत्रों की समीक्षा के बाद पात्रता रखने वाले आवेदकों का चयन प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। ऐसे आवेदक, जो राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.व्ही.पी.) से मान्यता प्राप्त माडयूलर इम्पायेबल स्कीम (एम.ई.एस) के तहत निर्धारित पाठयक्रमों में कौशल रखते हैं और सीधे परीक्षा में शामिल होकर प्रमाण-पत्र प्राप्त करना चाहते हैं, वे अपना आवेदन फार्म वेबसाईट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट डीजीईटी डॉट जीओव्ही डॉट इन/एमईएस (www.dget.gov.in/mes) पर फार्म शीर्षक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं। इस वेबसाईट पर योजना का विस्तृत विवरण भी उपलब्ध है। आवेदक निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन पत्र आवश्यक प्रमाण-पत्रों सहित अपने नजदीकी पंजीकृत आई.टी.आई. में जमा कर सकते हैं।
विभागीय अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इन पाठयक्रमों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाईडर) के रूप में राज्य के चयनित साठ शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में आई.टी.आई. माना तथा रायपुर और महिला आई.टी.आई. रायपुर सहित हथबंद, तिल्दा, कसडोल, बलौदाबाजार, गरियाबंद, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, मोहला, बिलासपुर, महिला आई.टी.आई. बिलासपुर, आई.टी.आई. गौरेला, मरवाही, दुर्ग, महिला आई.टी.आई. भिलाई तथा आई.टी.आई. संजारी, सुरेगांव, बेरला, बालोद, बेमेतरा, मारो, परपोड़ी, डौंडीलोहारा, महासमुंद, बसना, धमतरी, सारागांव, चिरमिरी, कांकेर, महिला आई.टी.आई. कांकेर तथा भानुप्रतापपुर, महिला आई.टी.आई. नारायणपुर, आई.टी.आई. अंतागढ़, सुकमा, गीदम, बस्तर, जगदलपुर, केशकाल, कोंडागांव, रायगढ़, महिला आई.टी.आई. रायगढ़, आई.टी.आई. घरघोड़ा, खरसिया, तपकरा, धर्मजयगढ़, पुसौर, सरिया, कुनकुरी, तमनार, पत्थलगांव, सारंगढ़, अम्बिकापुर, प्रतापपुर, कबीरधाम, महिला आई.टी.आई. कोरबा, आई.टी.आई. कोरबा और पाली शामिल हैं। इनके अलावा जिन आधा दर्जन निजी संस्थाओं का चयन इन पाठयक्रमों के संचालन के लिए किया गया है, उनमें मानव संसाधन विकास केन्द्र, भिलाई इस्पात संयंत्र भिलाई नगर, ग्रेसियस कॉलेज ऑफ नर्सिंग अभनपुर, मानव मित्र समिति समता कॉलोनी रायपुर, डी.एल.एस.पी.जी. कॉलेज सरकंडा बिलासपुर, लेप्रोसी मिशन छत्तीसगढ़ वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, बेलदारपारा चाम्पा, एस.ओ.एस. बाल ग्राम, माना कैम्प रायपुर और पी.एन.एस. कॉलेज राजेन्द्र नगर बिलासपुर शामिल हैं। विस्तृत जानकारी इन सभी शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और निजी संस्थाओं से भी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता विकास मिशन, तकनीकी शिक्षा संचालनालय छत्तीसगढ़ शासन, बैरनबाजार, रायपुर के कार्यालय में आकर अथवा वहां के टेलीफोन नम्बर 0771-4045142 अथवा 4090060 पर सम्पर्क किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए निर्धारित विषयों में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, भारतीय मिठाईयों और खाद्य पदार्थों के उत्पादन, रेडिमेड वस्त्र निर्माण, रेशम उद्योग, कुक्कुट पालन (पोल्ट्री फार्मिंग), मछली पालन और उससे जुड़े क्षेत्र, खिलौना निर्माण, रत्न एवं आभूषण निर्माण, खादी, बीमा, जूट उत्पादन, आटो मोबाईल रिपेयरिंग, बैंकिग तथा एकाउंटिंग, हेयर ड्रेसिंग, फैशन डिजायनिंग, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, प्लास्टिक प्रसंस्करण, गलीचा निर्माण, इलेक्ट्रिकल और फेब्रिकेशन, मेडिकल और नर्सिंग, पर्यटन व्यावसाय, मीडिया, काष्ठ कला, सिक्यूरिटी, प्रिंटिंग कार्य, पेपर प्रोडक्ट्स और टेक्सटाईल के अन्तर्गत कॉटन, डब्लिंग, विडिंग, रिलिंग, वेविंग, केमिकल प्रोसेसिंग, क्वालिटी कंट्रोल आदि पाठयक्रम शामिल हैं। ये पाठयक्रम राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.व्ही.टी.) से मान्यता प्राप्त माडयूलर इम्पायेबल स्कीम (एम.ई.एस.) के तहत तैयार किए गए हैं। आवेदन के लिए न्यूनतम आयु सीमा 14 वर्ष तय की गई है, जबकि कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है। अर्थात 14 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति इस प्रशिक्षण में शामिल हो सकता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने इच्छुक लोगों से आवेदन पत्र पूरे साल भर लिए जाएंगे और उन्हें उपलब्ध अधोसंरचनाओं के आधार पर अलग-अलग समूहो में प्रशिक्षण दिया जाएगा। क्षमता विकास मिशन के अन्तर्गत प्रशिक्षण के लिए राज्य के सभी शासकीय और पात्रता रखने वाले मान्यता प्राप्त संस्थानों का पंजीयन उनमें उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं के आधार पर किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार राज्य के स्कूल-कॉलेजों और तकनीकी संस्थाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं, शाला त्यागी बच्चों, औद्योगिक कामगारों, सरकारी और निजी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों, खेती में लगे किसानों और मजदूरों सहित सभी लोगों को इस योजना के तहत अपने कौशल उन्नयन और क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने का मौका मिलेगा। उन्हें प्रशिक्षित कर रोजगार तथा स्व-रोजगार के अवसरों में वृध्दि करना इस योजना का प्रमुख लक्ष्य है। यहां तक कि पांचवी कक्षा उत्तीर्ण व्यक्ति भी इस योजना के विभिन्न पाठयक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रख कर प्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी के जीवन यापन से जुड़े क्षेत्रों के अन्तर्गत कृषि खाद्य प्रसंस्करण, वन और वनोपज आधारित उद्योगों तथा ग्रामोद्योग को भी शामिल किया है। इसके अलावा राज्य में तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में बिजली, खदान और खनिज उद्योग, स्टील और सीमेंट उद्योग, अधोसंरचना निर्माण, सर्विस सेक्टर और शिक्षा को भी चिन्हांकित किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एम.ई.एस. पाठयक्रमों की अलग-अलग अवधि के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण शुल्क निर्धारित किए गए हैं। जिस एम.ई.एस. पाठयक्रम की अवधि 90 घंटे की होगी, उसका प्रशिक्षण शुल्क पांच सौ रूपए और 91 घंटे से 180 घंटे के पाठयक्रमों के लिए प्रशिक्षण शुल्क एक हजार रूपए निर्धारित किया गया है, वहीं 181 घंटे से 270 घंटे के पाठयक्रम का प्रशिक्षण शुल्क डेढ़ हजार रूपए रखा गया है। अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं और नि:शक्त श्रेणी के आवेदकों को प्रशिक्षण शुल्क में पच्चीस प्रतिशत की छूट दी जाएगी। प्रशिक्षण के बाद आयोजित परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर प्रशिक्षण्ाार्थियों को प्रशिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क वापस कर दिया जाएगा। परीक्षा शुल्क निर्धारित पाठयक्रमों के अनुसार पांच सौ से आठ सौ रूपए तक होगा। प्राप्त आवेदनों पत्रों की समीक्षा के बाद पात्रता रखने वाले आवेदकों का चयन प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। ऐसे आवेदक, जो राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.व्ही.पी.) से मान्यता प्राप्त माडयूलर इम्पायेबल स्कीम (एम.ई.एस) के तहत निर्धारित पाठयक्रमों में कौशल रखते हैं और सीधे परीक्षा में शामिल होकर प्रमाण-पत्र प्राप्त करना चाहते हैं, वे अपना आवेदन फार्म वेबसाईट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट डीजीईटी डॉट जीओव्ही डॉट इन/एमईएस (www.dget.gov.in/mes) पर फार्म शीर्षक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं। इस वेबसाईट पर योजना का विस्तृत विवरण भी उपलब्ध है। आवेदक निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन पत्र आवश्यक प्रमाण-पत्रों सहित अपने नजदीकी पंजीकृत आई.टी.आई. में जमा कर सकते हैं।
क्रमांक 418/स्वराज्य

