जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यों में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए- प्रभारी मंत्री श्री अग्रवाल
बरसात के पूर्व सभी शासकीय कार्यालयों में
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश
स्कूली पाठयक्रम में शामिल करने विचार किया जायेगा
रायपुर, 19 मई 2010
जल संरक्षण और संवर्धन पर आयोजित कार्यशाला में लोक निर्माण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राजधानी रायपुर में वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति लोगों को जागरूक करने पुरखौती मुक्तांगन में वाटर हार्वेस्टिंग तकनीकों को प्रदर्शित करने जीवंत माडल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यों में रिमोट सेंसिंग तकनीक से प्राप्त डाटा का उपयोग किया जाए, जिससे कि इन कार्यों से अधिक से अधिक फायदा मिल सके। उन्होंने ग्रामीणों को रेन वाटर रिचार्जिंग की जानकारी देने विशेष ग्राम सभाएं आयोजित करने भी कहा। इस अवसर पर सांसद श्री रमेश बैस सहित सभी जनप्रतिनिधियों ने विचार व्यक्त किये।
प्रभारी मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज रेडक्रास सभा कक्ष में आयोजित जल संरक्षण और संवर्धन कार्यशाला में सभी विभागों को शासकीय कार्यालयों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम 30 जून तक लगाये जाने कहा। इसके साथ ही लोक निर्माण, जल संसाधन और वन विभाग को सभी विश्राम गृहों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य भी बरसात के पहले कराने के निर्देश दिये। उन्होंनें सेन्ट्रल ग्राउंड वाटर के अधिकारियों को रायपुर जिले में जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य सम्पन्न कराने के संबंध में आधुनिक तकनीक की जानकारी देने हेतु प्रशिक्षण देने के निर्देश दिये। इस अवसर पर विधायक श्री देवजी भाई पटेल, डा. शिव डहरिया, श्री चैत राम साहू, श्री नंद कुमार साहू, श्री कुलदीप जुनेजा, श्रीमती लक्ष्मी बघेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा एवं जनप्रतिनिधिगण, कलेक्टर श्री संजय गर्ग, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रजत कुमार सहित सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी एवं स्वंय सेवी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प्रभारी मंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सड़क के किनारे जहां पेड़ लगे हैं वहां बीच-बीच में छोटे-छोटे तालाब बनाये जा सकते हैं, इससे आस -पास हरियाली रहेगी और वाटर रिचार्जिंग भी होगा। इसके लिये ढलान एरिया को चुना जा सकता हैं। सभी नर्सरियों में भी तालाब बनाया जाए, जिससे नर्सरी के लिये पानी बाहर से लाने की आवश्कता नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि सड़कों के किनारे बहते पानी को भी कच्ची नाली बनाकर तथा ह्यूम पाइप के जरिये तालाबों को भरने के लिये जोड़ा जा सकता है, इसके लिये भी प्रयास किये जाए। श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को शहरों और गांवों के नजदीक बहने वाले नदी नालों को गहरा कराने और चैकडेम बनाने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इससे जल स्तर भी बढेग़ा और बारह महीने निस्तार के लिये पानी भी उपलब्ध रहेगा। जल संरक्षण और संवर्धन विषय को स्कूली पाठयक्रम में शमिल करने के सुझाव पर उन्होंने कहा कि अगले वर्ष पाठयक्रम में शामिल करने पर विचार किया जायेगा।
बैठक में श्री अग्रवाल ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों से कहा कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार टयूबवेल के नजदीक सोख्ता गढ्ढे बनाया जाए। इसी प्रकार उन्होंने नगर निगम को भी सभी जोन में आठ सौ सोख्ता गढ्ढे बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत के माध्यम से तालाब निर्माण एवं गहरीकरण के कार्य 15 जून तक पूर्ण कर लिये जाए। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से कहा कि जिन बांधों की लम्बे समय से सिल्ट सफाई नहीं करायी गई है या बांधों में गेट नहीं लगे हैं, उनमें बरसात के पहले गेट तथा सिल्ट सफाई के कार्य करा लिये जाए। सांसद श्री रमेश बैस ने कार्यशाला में पुराने तालाबों को सहेजने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुराने तालाब आज पटते जा रहे हैं, इन्हे बचाना जरूरी हो गया है। श्री बैस ने रायपुर शहर के पुराने तालाबों को पुर्नजीवित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे शहरी क्षेत्र में जल स्तर में वृध्दि होगी।
जिले में जल संरक्षण कार्यों में सहयोग के लिये छ.ग. भू-जल विद एसोसियेशन सहित विभिन्न संगठनों ने सहमति दी। इस संबंध में प्रभारी मंत्री ने जल संग्रहण और संवर्धन के संबंध में स्वंय सेवी संगठनों से आग्रह किया कि जो भी संस्था इस विषय में कार्य करना चाहते हैं, प्रस्ताव बनाकर दे सकते हैं। कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण और संवर्धन के लिये तीन वर्षों की कार्य योजना तैयार करने के लिये पूरे जिले को 15से 20 जोन में बांट कर वाटर रिचार्जिंग के लिये पचास-पचास करोड़ रूपये के कार्य कराने हेतु कार्य योजना बनायी जाए। उन्होने बताया कि जिले के लगभग 2200 नये तालाब निर्माण और तीन हजार तालाब गहरीकरण् के साथ ही दो हजार कुंआ खनन के कार्य संचालित किये जा रहे हैं।

