तेरहवें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत पंचायतों में वर्ष 2010-11 में लिए जाने वाले कार्यो की कार्ययोजना अनुमोदित
स्वच्छता, स्वास्थ्य और पेयजल पर अधिक जोर
रायपुर, 22 दिसम्बर 2010
छत्तीगढ़ में तेरहवें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत चालू वित्तीय वर्ष के दौरान जिलों को प्रदत्त आबंटन से पंचायतों में कराए जाने वाले कार्यो की कार्ययोजना का अनुमोदन कर दिया गया है। इसमें स्वच्छता, स्वास्थ्य और पेयजल पर अधिक जोर दिया गया है। तेरहवें वित्त आयोग के तहत प्रदेश की पंचायत राज संस्थाओं को चालू वित्ती वर्ष 2010-11 में अधोसंरचना कार्यो के लिए 86 करोड़ 21 लाख रूपए की प्रथम किश्त आबंटित की जा चुकी है। इसमें 77 करोड़ 77 लाख रूपए का सामान्य अनुदान और आठ करोड़ 44 लाख रूपए का विशेष क्षेत्र मूल अनुदान शामिल है। अनुमोदित कार्य योजना अनुसार जिलों को आबंटित निधि से जो कार्य कराए जाने है उनमें स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा, पोषण, विकास कार्य एवं अधोसंरचना निर्माण कार्य, समाज कल्याण, सौर ऊर्जा/विद्युत ऊर्जा और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट को शामिल किया गया है।
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को परिपत्र भेज कर अनुमोदित कार्य योजना के अनुसार आबंटित राशि का उपयोग नियमानुसार सुनिश्चित कराने कहा है। परिपत्र में कहा गया है कि जिन कार्यो के लिए प्राक्कलन और लागत निर्धारित है उन कार्यो में निर्धारित लागत के अनुसार स्वीकृति दी जाए। जो कार्य निर्धारित लागत की सूची में नहीं है उन कार्यो में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के जिले में पदस्थ अधिकारियों से स्थल निरीक्षण के बाद तैयार प्राक्कलन के आधार पर उन कार्यो की प्रशासकीय स्वीकृतियां नियमानुसार जारी की जाए। जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि ग्राम पंचायतों को निर्देशित करे कि वे स्वच्छता, स्वास्थ्य और पेयजल के कार्यो में सर्वप्रथम निधि का उपयोग करें। कार्यवार प्रशासकीय स्वीकृति आदेश की प्रति संचालक पंचायत एवं समाज सेवा कार्यालय को भेजी जाए।
जिला कलेक्टरों को परिपत्र के साथ भेजी गई कार्ययोजना के अनुसार स्वास्थ्य के क्षेत्र में आबंटित धनराशि का 35 प्रतिशत व्यय किए जाने का प्रावधान किया गया हैं। गांवों में गरीब परिवारों के शुष्क शौचालय और सार्वजनिक स्थानों, भवनों में शौचालयों का निर्माण, सार्वजनिक स्थल पर मूत्रालय सुविधा, शालाओं में पेयजल सुविधा और शौचालयों, मूत्रालय स्थल, पेयजल शुध्दिकरण के उपकरण नाली निर्माण, हैण्ड पम्प के पास सोख्ता गढ्ढे का निर्माण और गांव की गलियों में नाली निर्माण कार्य किए जाए। पेयजल के क्षेत्र में प्राप्त आबंटन की 15 प्रतिशत धनराशि व्यय करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत गांवों में नलजल सुविधा, हैण्डपंप और उसमें विद्युत पंप प्रदाय, पानी टंकी निर्माण आदि सुविधा उपलब्ध कराना। हैण्डपंप के पास नाली और सोख्ता गढ्ढे का निर्माण शामिल है। शिक्षा के क्षेत्र में प्राप्त आबंटन धनराशि का 10 प्रतिशत व्यय करने का प्रावधान किया गया है। इसमें प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला, शाला भवन निर्माण और मरम्मत, अहाता निर्माण, छात्रावास, आश्रम शाला, आश्रम में शेड निर्माण, वाचनालय, छात्रावास उपकरण, विद्युत व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था, आदिवासी कन्या छात्रावास अधीक्षक आवास गृह, खेल मैदान, स्टेडियम निर्माण किया जायेगा। पोषण के क्षेत्र में प्राप्त आबंटन का 5 प्रतिशत धनराशि व्यय किए जाने का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत आंगनबाड़ी के उपकरण, सामग्री का प्रदाय के कार्य विशेष तौर से पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि से वंचित जिलो में लिए जाए। उचित मूल्य सह गोदाम निर्माण, मध्यान्ह भोजन गृह/शेड निर्माण एवं खाना पकाने के उपकरणों का प्रदाय जैसे रसोई गैस किया जा सकता है।
विकास कार्य एवं अधोसंरचना निर्माण कार्य क्षेत्र में प्राप्त आबंटन का 25 प्रतिशत धनराशि के व्यय का प्रावधान है। प्रावधानित राशि में से सर्व प्रथम ग्राम पंचायत भवन, राजीव गांधी सेवा केन्द्र भवन को स्वीकृति में वरीयता दी जाएगी। इसके उपरान्त शेष बचे आबंटन से सी.सी.रोड, पुल-पुलिया, प्रथम श्रेणी मार्ग निर्माण, सामुदायिक भवन निर्माण, जनपद और जिला पंचायत भवन निर्माण, यात्री प्रतिक्षालय निर्माण, रंगमंच, चबूतरा निर्माण, मंगल भवन, तालाबों में घाट निर्माण, दुकान निर्माण एवं बाजार शेड निर्माण, मुक्तिघाम, पुस्तकालय भवन, पूर्व में निर्मित अधोसंरचना के रख-रखाव के कार्य कराए जाएंगे। राजीव गांधी सेवा केन्द्र के निर्माण्ा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से समन्वयन करने पर विचार किया जाएगा। समाज कल्याण के क्षेत्र में प्राप्त आबंटन की 2 प्रतिशत राशि व्यय करने का प्रावधान है। जिसमें विकलांगों और मानसिक अशक्तों के लिए गृह आश्रम शाला, उपकरण, रहवासी सुविधा, केन्द्रों में शैक्षणिक सुविधा आदि उपलब्ध कराना है। सौर ऊर्जा और विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में आबंटित धनराशि का तीन प्रतिशत व्यय करने का प्रावधान है। इसमें गांवों की गलियों में विद्युत विस्तार, विद्युतिकरण, पम्पों का ऊर्जीकरण, सामुदायिक विद्युत प्रणाली, सौर ऊर्जा, ऊर्जा प्रबंधन इत्यादि कार्य शामिल है। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट क्षेत्र में आबंटित राशि का 5 प्रतिशत (0.5 प्रतिशत राज्य, 0.5 प्रतिशत जिला पंचायत, जनपद पंचायत में 1.5 प्रतिशत और ग्राम पंचायत में 2.5 प्रतिशत) व्यय में से कार्यालयीन व्यय उपकरण, विद्युत, विद्युत देयक भुगतान, स्टेशनरी, कम्प्यूटर क्रय डाटाबेस सूचना केन्द्र, फर्नीचर, कर्मचारी मानदेय भुगतान, आउट सोर्सिंग, भ्रमण व्यय, लेखा संधारण इत्यादि पर व्यय होगा। विशेष क्षेत्र मूल अनुदान की धनराशि कार्य योजना वर्ष 2010-11 में प्रस्तावित राशि का व्यय केवल अनुसूचित क्षेत्रों के विकास कार्यो में ही किया जायेगा।

