अब स्थानीय निकायों की आडिट रिपोर्ट भी विधानसभा में पेश करने का प्रावधान
छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा (संशोधन) विधेयक 2011 विधान सभा में पारित
छत्तीसगढ़ में त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं सहित नगरीय निकायों के हिसाब-किताब की सालाना आडिट रिपोर्ट अब नियमित रूप से विधानसभा में पेश की जाएगी। राज्य शासन की ओर से कल यहां विधानसभा में प्रस्तुत किए गए छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा (संशोधन), विधेयक 2011 को सदन में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। अब यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा (संशोधन) अधिनियम 2011 के रूप में लागू हो जाएगा। संशोधित विधेयक के अनुसार सभी स्थानीय निकायों के लेखों का अंकेक्षण प्रतिवेदन विधान सभा पटल पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिस तरह महालेखाकार का प्रतिवेदन प्रस्तुत होता है। स्थानीय निकायों से आशय है सभी नगर पालिक निगम, सभी नगर पालिका परिषद ,सभी नगर पंचायत, सभी जिला पंचायत, सभी जनपद पंचायत और सभी ग्राम पंचायतों से है।
अधिनियम के अनुसार सभी स्थानीय निकायों के लेखों की संपरीक्षा के संबंध में संचालक स्थानीय निधि संपरीक्षा का वार्षिक प्रतिवेदन वित्त विभाग को प्रस्तुत किया जाएगा। वित्त विभाग वार्षिक प्रतिवेदन के प्राप्त होने के पश्चात यथाशीघ्र विधानसभा के समक्ष इसे प्रस्तुत करेगा। तेरहवें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुसार स्थानीय निकायों की लेखा परीक्षा और जवाबदेहिता निर्धारित करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। इस विधेयक के पारित होने से जनप्रतिनिधियों को स्थानीय निकायों के कार्यों और आय-व्यय की वास्तविक स्थिति की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में स्थानीय निकायों का अंकेक्षण संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा द्वारा किया जाता है। वर्तमान में अंकेक्षण के बाद अंकेक्षण प्रतिवेदन संबंधित निकाय की सामान्य परिषद में रखा जाता है। सार्वजनिक धन के दुरूपयोग को रोकने में यह अधिनियम कारगर होगा।

