बारहवीं पंचवर्षीय योजना में पिछड़े राज्यों के लिये विषेष योजनाएं बने
योजना आयोग के क्षेत्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सुझाव
योजना आयोग द्वारा 12वीं पंचवर्षीय योजना के एप्रोच पेपर पर विचार विमर्श के लिये आज बिहार की राजधानी पटना में आयोजित पूर्वी राज्यों के क्षेत्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों के लिये विशेष योजनाएं प्रारंभ करने पर जोर दिया गया। राज्य की ओर से आयोजना मद के लिये अधिक संसाधन जुटाने के लिये खनिजों पर न्यूनतम 20 प्रतिशत रायल्टी निर्धारित करने, मायनिंग कंपनियों के शुध्द मुनाफे की एक चौथाई राशि विकास कार्यों एवं स्थानीय लोगों के कल्याण के लिये खर्च किये जाने और देश में वनीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य से अधिक वन क्षेत्रों का संधारण करने वाले राज्यों को संधारण व्यय की प्रतिपूर्ति किये जाने की मांग की गई।
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष शिवराज सिंह एवं प्रमुख सचिव, वित्त एवं योजना अजय सिंह ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया, केन्द्रीय योजना, राज्य मंत्री श्री अश्वनी कुमार एवं योजना आयोग के सदस्यों के समक्ष प्रस्तुतिकरण दिया। सम्मेलन में बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार, ओड़िशा के मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक, झारखंड के उप मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल के योजना मंत्री तथा इन राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की।
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मांग की गई कि केन्द्र द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिये लागू की गयी समन्वित कार्य योजना को समूचे अनुसूचित क्षेत्रों में लागू किया जाए और सर्व शिक्षा अभियान के तहत आदिवासी क्षेत्रों में सभी स्कूल भवनों के साथ छात्रावास बनाने का प्रावधान किया जाए। आदिवासी क्षेत्रों की कृषि के विकास के लिये अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की मांग भी राज्य सरकार द्वारा रखी गयी। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों ने योजना आयोग का ध्यान इस ओर विशेष रूप से आकर्षित किया गया कि वर्तमान में छोटे व मध्यम कस्बों और नगरों में मौलिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिये केन्द्र द्वारा नगण्य धनराशि उपलब्ध करायी जाती है, जिसमें 12वीं पंचवर्षीय योजना में महती वृध्दि क़ी जानी चाहिए। कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिये राष्ट्रीय कृषि विकास योजना तथा माइक्रो माइनर सिंचाई योजनाओं के आकार बढ़ाने पर जोर दिया गया। रेल व सड़क अधोसंरचना निर्माण के विकास के लिये वर्तमान में प्रचलित पी पी पी मॉडल में सुधार करने और रेलवे विभाग को अधिक राजस्व देने वाले छत्तीसगढ़ के खनिज धारित क्षेत्रों में रेलवे लाइन प्राथमिकता के साथ बिछाने की आवश्यकता बताई गई।

