गरीबों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में खाद्य की विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका : श्री साहू
खाद्य विभाग के अधिकारियों का चार दिवसीय मूलभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ
रायपुर, 11 अक्टूबर 2010

खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के द्वारा राज्य के 34 लाख से अधिक गरीब परिवारों को मात्र एक रूपए और दो रूपए किलो में 35 किलो चावल उपलब्ध कराकर उन्हें खाद्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है। इसमें खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के महत्वपूर्ण भूमिका है। डॉ. साहू आज यहां निमोरा स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के सभा कक्ष में खाद्य विभाग के अधिकारियों का चार दिवसीय मूलभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विभाग के सचिव सह आयुक्त श्री प्रदीप पंत उपस्थित थे।
डॉ. साहू ने कहा कि पिछले कुछ समय से खाद्य विभाग की जिम्मेदारी बहुत बढ़ी है। धान उपार्जन, उसकी मिलिंग कराना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दस हजार 549 राशन दुकानों के माध्यम से राज्य के 34 लाख से अधिक राशन कार्ड धारकों को राशन एवं अन्य सामग्री उपलब्ध कराना, जमाखोरो एवं कालाबाजारी करने वालों के विरूध्द कार्रवाई आदि कार्य करना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसे खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार करते हुए कार्य किया है, जो सराहनीय है। श्री साहू ने कहा कि राज्य शासन द्वारा ग्राम पंचायतों एवं महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से उचित मूल्य दुकानों के संचालन हेतु बिना ब्याज के प्रति दुकान 75 हजार रूपए के मान से 42 करोड़ रूपए कार्यशील पूंजी के रूप में उपलब्ध करायी है। राज्य शासन के इस निर्णय से राशन दुकान संचालन में ग्राम पंचायतों एवं महिला स्वसहायता समूहाें की दीर्घकालीन सहभागिता सुनिश्चित हुई है।
डॉ. सियाराम साहू ने कहा कि प्रदेश में पहली बार खाद्य विभाग के अधिकारियों का मूलभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में अधिकारीगण खाद्य एवं समसामयिक विषयों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के क्षेत्र हो अथवा समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी की बात, छत्तीसगढ़ माडल की सराहना अन्य राज्यों में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हो रही है। यहां पर इन क्षेत्रों में जो काम किए गए हैं। इस कार्य को देखने और समझने के लिए महाराष्ट्र, उड़ीसा, बिहार, कर्नाटक राज्यों के खाद्य मंत्री अपने अधिकारियों के दलों के साथ छत्तीसगढ़ आकर अपने-अपने राज्यों में लागू करने की मंशा जाहिर की गई है जो राज्य के लिए गौरव की बात है। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली की छत्तीसगढ़ माडल और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के कार्य को अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं। इसके लिए विभाग के अधिकारी बधाई के पात्र है। श्री साहू ने कहा कि खाद्य विभाग के कार्य प्रणाली में भी बहुत कुछ बदलाव आया है। अधिक से अधिक कार्य कम्प्यूटरों के माध्यम से होने लगा है। विभाग की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है, दायित्व बढ़े है, काम बढ़ा है। ऐसे में इसे और कुशलतापूर्वक करने की दृष्टि से यह प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि विभाग के अधिकारीगण प्रशिक्षित होकर भविष्य में अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन करेंगे और छत्तीसगढ़ के लोगों को पूर्ण रूप से खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में सफल होंगे।
विभाग के सचिव सह आयुक्त श्री प्रदीप पंत ने कहा कि देश के साथ-साथ राज्य का भी विकास दर बढ़ा है। रोटी के लिए संघर्ष करने वालों की भी संख्या बढ़ी है। राज्य शासन द्वारा इन लोगों के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा महंगाई के इस दौर में प्रदेश 70 प्रतिशत लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान कर सराहनीय कार्य किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों को इन कार्यों पर शत-प्रतिशत खरा उतरने का प्रयास करना है, ताकि प्रदेश का नाम रोशन हो। खाद्य विभाग के उप संचालक श्री राजीव जायसवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर राज्य के सभी जिलों से आए खाद्य अधिकारी उपस्थित थे।
डॉ. साहू ने कहा कि पिछले कुछ समय से खाद्य विभाग की जिम्मेदारी बहुत बढ़ी है। धान उपार्जन, उसकी मिलिंग कराना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दस हजार 549 राशन दुकानों के माध्यम से राज्य के 34 लाख से अधिक राशन कार्ड धारकों को राशन एवं अन्य सामग्री उपलब्ध कराना, जमाखोरो एवं कालाबाजारी करने वालों के विरूध्द कार्रवाई आदि कार्य करना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसे खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार करते हुए कार्य किया है, जो सराहनीय है। श्री साहू ने कहा कि राज्य शासन द्वारा ग्राम पंचायतों एवं महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से उचित मूल्य दुकानों के संचालन हेतु बिना ब्याज के प्रति दुकान 75 हजार रूपए के मान से 42 करोड़ रूपए कार्यशील पूंजी के रूप में उपलब्ध करायी है। राज्य शासन के इस निर्णय से राशन दुकान संचालन में ग्राम पंचायतों एवं महिला स्वसहायता समूहाें की दीर्घकालीन सहभागिता सुनिश्चित हुई है।
डॉ. सियाराम साहू ने कहा कि प्रदेश में पहली बार खाद्य विभाग के अधिकारियों का मूलभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में अधिकारीगण खाद्य एवं समसामयिक विषयों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के क्षेत्र हो अथवा समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी की बात, छत्तीसगढ़ माडल की सराहना अन्य राज्यों में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हो रही है। यहां पर इन क्षेत्रों में जो काम किए गए हैं। इस कार्य को देखने और समझने के लिए महाराष्ट्र, उड़ीसा, बिहार, कर्नाटक राज्यों के खाद्य मंत्री अपने अधिकारियों के दलों के साथ छत्तीसगढ़ आकर अपने-अपने राज्यों में लागू करने की मंशा जाहिर की गई है जो राज्य के लिए गौरव की बात है। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली की छत्तीसगढ़ माडल और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के कार्य को अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं। इसके लिए विभाग के अधिकारी बधाई के पात्र है। श्री साहू ने कहा कि खाद्य विभाग के कार्य प्रणाली में भी बहुत कुछ बदलाव आया है। अधिक से अधिक कार्य कम्प्यूटरों के माध्यम से होने लगा है। विभाग की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है, दायित्व बढ़े है, काम बढ़ा है। ऐसे में इसे और कुशलतापूर्वक करने की दृष्टि से यह प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि विभाग के अधिकारीगण प्रशिक्षित होकर भविष्य में अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन करेंगे और छत्तीसगढ़ के लोगों को पूर्ण रूप से खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में सफल होंगे।
विभाग के सचिव सह आयुक्त श्री प्रदीप पंत ने कहा कि देश के साथ-साथ राज्य का भी विकास दर बढ़ा है। रोटी के लिए संघर्ष करने वालों की भी संख्या बढ़ी है। राज्य शासन द्वारा इन लोगों के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा महंगाई के इस दौर में प्रदेश 70 प्रतिशत लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान कर सराहनीय कार्य किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों को इन कार्यों पर शत-प्रतिशत खरा उतरने का प्रयास करना है, ताकि प्रदेश का नाम रोशन हो। खाद्य विभाग के उप संचालक श्री राजीव जायसवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर राज्य के सभी जिलों से आए खाद्य अधिकारी उपस्थित थे।
क्रमांक-3265/ लहरे

