छत्तीसगढ़ में अनुमानित पचास लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य
कस्टम मिलिंग के लिए राईस मिलों को मिलेगा 28.63 लाख टन धान
भारतीय खाद्य निगम को दिया जाएगा दस लाख टन धान
उपार्जन के लिए मार्कफेड को अब तक 2.35 लाख गठान बारदाने उपलब्ध
रायपुर 16 नवम्बर 2010
समर्थन मूल्य नीति के तहत राज्य सरकार की एजेंसी के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा प्रदेश की एक हजार 333 प्राथमिक सहकारी समितियों के माध्यम से धान खरीदी का कार्य युध्द स्तर पर किया जा रहा है। चालू खरीफ विपणन वर्ष में खरीदी के लिए एक हजार 587 उपार्जन केन्द्र बनाए गए हैं, जहां 50 लाख मीटरिक टन धान खरीदी का अनुमानित लक्ष्य प्रदेश सरकार द्वारा दिया गया है।
राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस अनुमानित लक्ष्य में से 28 लाख 63 हजार 500 मीटरिक टन धान कस्टम मिलिंग के लिए राईस मिलरों को सीधे उपार्जन केन्द्रों से उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा दस लाख मीटरिक टन धान भारतीय खाद्य निगम को दिया जाएगा, जबकि शेष ग्यारह लाख 36 हजार 500 मीटरिक टन धान मार्कफेड के 59 संग्रहण केन्द्रों में भण्डारित करने की योजना बनायी गयी है। भारतीय खाद्य निगम को उपार्जन प्रक्रिया के तहत खरीदे जा रहे धान के अंतरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है। मार्कफेड के अधिकरियों ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का कार्य भारत सरकार के निर्धारित मापदण्ड के अनुसार किया जा रहा है। इसके लिए उपार्जन कार्य से संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है, और उन्हें आर्द्रता मापने के लिए उपार्जन केन्द्रों में आर्द्रता मापक यंत्र (मॉश्चर मीटर) रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन के निर्धारित लक्ष्य के अनुसार धान उपार्जन के लिए समितियों में दो लाख 50 हजार गठान अर्थात् 12 करोड़ 50 लाख नग बारदानों की जरूरत है। पिछले वर्ष आठ हजार गठान बारदानों के अलावा दो लाख 45 हजार गठान बारदानों की खरीदी का आदेश महानिदेशक आपूर्ति और डिस्पोजल (डी.जी.एस. एण्ड डी.) भारत सरकार, वाणिज्य विभाग कोलकाता को दिए गए हैं। वहां से कल 15 नवम्बर तक दो लाख 27 हजार गठान बारदाने विभिन्न उपार्जन केन्द्रों को प्राप्त हो चुके हैं। इस प्रकार मार्कफेड को प्राप्त कुल दो लाख 35 हजार गठान बारदाने राज्य में उपलब्ध हैं, जिनकी गुणवत्ता का परीक्षण हर जिले में कलेक्टर द्वारा गठित समिति के माध्यम से कराने का प्रावधान भी राज्य शासन द्वारा किया गया है। गुणवत्ता परीक्षण के लिए कलेक्टरों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। गुणवत्ता विहीन बारदाने मिलने पर ऐसे बारदानों को अमानक श्रेणी में रखकर उनमें धान की भराई नहीं की जाती और इस बारे में डी.जी.एस. एण्ड डी. को सूचित कर संयुक्त रूप से परीक्षण कराने के बाद ऐसे बारदानों का निराकरण डी.जी.एस. एण्ड डी. द्वारा किया जाता है। उपार्जन केन्द्रों से धान के परिवहन, हमाली, डनेज के लिए दरों का निर्धारण पिछले वर्षो की तरह इस वर्ष भी जिला कलेक्टरों द्वारा गठित समितियों की ओर से निविदा के जरिए किया जा रहा है। इन दरों का अंतिम अनुमोदन मार्कफेड के प्रबंध संचालक द्वारा किया जाता है।

