छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के ग्यारह साल : समितियों में आया लगभग 3.33 करोड़ टन धान
किसानों को मिली 26 हजार करोड़ से ज्यादा राशि
विगत आठ वर्षों में हुआ 23 हजार करोड़ से ज्यादा भुगतान
रायपुर, 30 नवम्बर 2011
किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए समर्थन मूल्य नीति के तहत छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2003-04 से विगत वर्ष 2010-11 तक आठ वर्षों में राज्य सरकार ने सहकारी समितियों के माध्यम से दो करोड़ 93 लाख 19 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी की है। इसके लिए किसानों को 23 हजार 898 करोड़ 58 लाख रूपए का भुगतान किया गया है। इसे मिलाकर राज्य निर्माण के ग्यारह वर्षों में प्रदेश की सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर किसानों से तीन करोड़ 32 लाख 80 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है और इसके लिए उन्हें 26 हजार 28 करोड़ 60 लाख रूपए कीमत का भुगतान किया गया है। 
खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि राज्य में इस दौरान समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का आंकड़ा पांच लाख 87 हजार मीटरिक टन से बढ़कर पिछले खरीफ विपणन वर्ष 2010-11 में 51 लाख 14 हजार मीटरिक टन तक पहुंच गया, जबकि इस खरीफ विपणन वर्ष 2011-12 में 55 लाख टन धान की आवक होने का अनुमान है। प्रदेश की एक हजार 333 प्राथमिक सहकारी समितियों के लगभग एक हजार 880 उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी का लगभग साढ़े तीन माह तक चलने वाला विशेष अभियान विगत पांच नवम्बर से शुरू हो गया है। इस वर्ष समितियों में अब तक दस लाख मीटरिक टन से ज्यादा धान की आवक हो चुकी है। इसके लिए किसानों को लगभग एक हजार 108 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अधिकारियों को धान खरीदी के दौरान समितियों और उपार्जन केन्द्रों में किसानों की सुविधा के लिए हर प्रकार की जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विगत तीन वर्ष में राज्य सरकार ने पारदर्शिता की दृष्टि से धान खरीदी की सम्पूर्ण प्रक्रिया का कम्प्यूटरीकरण करते हुए उपार्जन से लेकर भुगतान तक प्रत्येक कार्य की जानकारी को वेबसाईट पर प्रदर्शित करते हुए ऑन लाईन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का अकेला राज्य है, जो अपने किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर उनसे धान खरीद रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि एक नवम्बर 2000 को अस्तित्व में आए नये छत्तीसगढ़ राज्य में इसके निर्माण के प्रथम वर्ष 2000-2001 में समितियों में 308 करोड़ 22 लाख रूपए का पांच लाख 87 हजार मीटरिक टन धान खरीदा गया था। वर्ष 2001-02 में लगभग एक हजार 027 करोड़ 81 लाख रूपए का 19 लाख मीटरिक टन धान खरीदा गया। वर्ष 2002-03 में 14 लाख 74 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी हुई। इसके लिए किसानों को लगभग 794 करोड़ रूपए की कीमत का भुगतान किया गया। वर्ष 2003-04 में सहकारी समितियों में धान खरीदी का आंकड़ा बढ़कर 27 लाख 05 हजार मीटरिक टन तक पहुंच गया। इसके लिए किसानों को लगभग एक हजार 520 करोड़ रूपए की धन राशि का भुगतान समर्थन मूल्य के रूप में किया गया। वर्ष 2005-06 में 35 लाख 86 हजार मीटरिक टन धान खरीद कर समितियों के माध्यम से किसानों को दो हजार 090 करोड़ रूपए की धनराशि दी गयी।
अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2006-07 में 37 लाख 07 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी हुई और किसानों को समर्थन मूल्य नीति के तहत इसके लिए दो हजार 348 करोड़ 79 लाख रूपए प्राप्त हुए। वर्ष 2007-08 में 31 लाख 51 हजार मीटरिक टन धान खरीद कर समितियों के जरिए किसानों को दो हजार 994 करोड़ 72 लाख रूपए का समर्थन मूल्य दिया गया। वर्ष 2008-09 में समितियों के उपार्जन केन्द्रों में 37 लाख 47 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी हुई, जिसकी कीमत के रूप में किसानों को चार हजार 237 करोड़ 50 लाख रूपए की धनराशि का भुगतान किया गया। वर्ष 2009-10 में समितियों के उपार्जन केन्द्रों में 44 लाख 27 हजार मीटरिक टन धान खरीदकर किसानों को चार हजार 699 करोड़ का भुगतान किया गया, जबकि पिछले खरीफ विपणन वर्ष 2010-11 में 51 लाख 14 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी हुई और किसानों को चार हजार 992 करोड़ 71 लाख रूपए का भुगतान किया गया।

