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धान खरीदी के लिए दो सौ नये उपार्जन केन्द्र :एक हजार उपार्जन केन्द्रों में बनेंगे पक्के चबूतरे

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When May 03, 2011
from 06:15 PM to 06:15 PM
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प्रमुख सचिव श्री ढांड ने की विभागीय योजनाओं की समीक्षा

आगामी 30 जून तक कस्टम मिलिंग करने के निर्देश

    रायपुर 03 मई 2011
 
        राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2011-12 में समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी के लिए दो सौ नये धान उपार्जन केन्द्र खोले जाएंगे। इन्हें मिलाकर प्रदेश में धान खरीदी केन्द्रों की संख्या बढ़कर एक हजार 789 हो जाएगी। इतना ही नहीं धान के सुरक्षित भण्डारण के लिए भी मुंगेली (बिलासपुर) बाराद्वार-बिर्रा (जांजगीर-चाम्पा) और छोटे हरदी (जिला रायगढ) सहित पांच जगहों पर मार्कफेड के नये संग्रहण केन्द्र बनाए जाएंगे। खरीदी केन्द्रों में किसानों की सुविधा और धान की सुरक्षा के लिए करीब एक हजार केन्द्रों में इस वर्ष साढ़े चार हजार पक्के चबूतरे बनाए जाएंगे। खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री विवेक ढांड ने आज यहां नवीन विश्राम गृह में विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी। श्री ढांड ने कस्टम मिलिंग में कुछ जिलों की धीमी प्रगति पर असंतोष प्रकट किया और आगामी 30 जून तक अनिवार्य रूप से शत-प्रतिषत कस्टम मिलिंग करने के निर्देश दिए। भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में जगह की समस्या को देखते हुए 30 जून तक अस्थायी रूप से लेव्ही वसूली स्थगित रखने को भी कहा है।
561-030511

       श्री ढांड ने बैठक में जिलेवार कस्टम मिलिंग की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में इस वर्ष 51 लाख 14 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी की गई है। यह धान पिछले साल की तुलना में लगभग सात लाख मीटरिक टन अधिक है। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम को दस लाख सात हजार मीटरिक टन धान की आपूर्ति करने के बाद 11 लाख मीटरिक टन धान कस्टम मिलिंग के लिए बचा हुआ है। विषेषकर जांजगीर-चाम्पा, सरगुजा और राजनांदगांव जिलों में कस्टम मिलिंग की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहने पर नाराजगी प्रकट करते हुए सभी जिलों में आगामी 30 जून तक अनिवार्य रूप से मिलिंग कराने के निर्देष दिए हैं। श्री ढांड ने बताया कि दूसरे प्रदेशों से धान की आवाजाही पर लगा प्रतिबंध इस माह की पहली तारीख से हटा लिया गया है। लिहाजा कोई भी व्यक्ति दूसरे प्रदेश से धान अब छत्तीसगढ़ में ला सकता है।
        प्रमुख सचिव ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली सहित मध्यान्ह भोजन और आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए पूरक पोषण आहार के लिए दिसम्बर 2011 तक के लिए खाद्यान्न का भण्डारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनाज भण्डारण के लिए यदि कहीं जगह उपलब्ध नहीं है तो किराये पर गोदाम लिया जा सकता है। राज्य भण्डार गृह निगम द्वारा प्रदेश के विभिन्न इलाकों में स्वीकृत गोदामों का निर्माण कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। श्री ढांड ने उपार्जन केन्द्रों में किसानों की सुविधा और धान की सुरक्षा के लिए निर्मित की जाने वाली चबूतरों की जानकारी भी ली। वर्तमान में प्रदेश के नौ जिलों के एक हजार उपार्जन केन्द्रों में चार हजार 391 पक्के चबूतरों का निर्माण किये जाने की योजना है। इनमें नौ सौ केन्द्रों में चबूतरे का निर्माण मण्डी बोर्ड द्वारा और एक सौ दो उपार्जन केन्द्रों में 457 चबूतरों का निर्माण सम्बंधित समितियों द्वारा किया जाएगा। श्री ढांड ने पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित अन्य योजनाओं के अंतर्गत भी चबूतरा निर्माण का प्रस्ताव भेजने को कहा है। उन्होंने दस लाख रुपए से अधिक आमदनी वाले प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को अपने स्वयं के निधि से चबूतरा बनाने का सुझाव भी दिया। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र में धान खरीदी और स्टेकिंग के लिए चार से छह चबूतरा बनाया जाएगा।
        प्रमुख सचिव श्री ढांड ने घरेलू गैस की आपूर्ति बढ़ाने के साथ ही इनके दुरूपयोग रोकने के लिए खाद्य अधिकारियों और वितरण कम्पनियों को निर्देषित किया। उन्हाेंने कहा कि जिलों में मांग के अनुसार इनकी आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए उपभोक्ताओं को डबल गैस कनेक्षन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके अलावा हॉटलों, ढाबों की भी समय-समय पर सघन जांच किया जाना चाहिए। बैठक में सचिव खाद्य श्री प्रदीप पंत, पंजीयक सहकारिता श्री अमृत खलको, मार्कफेड के प्रबंध संचालक श्री अविनाष चम्पावत, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक श्री कौषलेन्द्र सिंह, राज्य भण्डार गृह निगम के प्रबंध संचालक डॉ. जितिन कुमार, मण्डी बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री अनिल साहू, नियंत्रक मापतौल श्री वासनिकर सहित भारतीय खाद्य निगम के अधिकारी उपस्थित थे।

 क्रमांक-561/पटेल
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