सार्वजनिक एवं निजी सहभागिता से होगा बांस प्रसंस्करण केन्द्रों का संचालन : वन मंत्री
बांस लगाने पर मिलेगा प्रति पौधा 20 रुपए अनुदान
रायपुर, 16 जून 2011
छत्तीसगढ़ में वन विभाग द्वारा संचालित बांस प्रसंस्करण केन्द्रों का संचालन अब लोक-निजी सहभागिता (पी.पी.पी.) के आधार पर किया जाएगा। प्रथम चरण में प्रदेश के सत्रह में से दस प्रसंस्करण् केन्द्रों में यह योजना लागू की जाएगी। इससे यहां कार्य करने वाले बांस शिल्पकारों को नियमित रोजगार के साथ ही उनके व्यापार विस्तार में भी मदद मिलेगी। वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित अधिकारियों की बैठक में यह फैसला किया गया। वन मंत्री ने जन-जीवन में बांस की उपयोगिता को देखते हुए इसके विस्तार पर जोर दिया। श्री उसेण्डी ने बताया कि बांस पौधा लगाने पर किसानों को राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के अंतर्गत 20 रुपए प्रति पौधा के हिसाब से अनुदान भी दिया जाएगा।
वन मंत्री श्री उसेण्डी ने प्रदेश में बांस के घटते वनों पर चिंता प्रकट करते हुए इनका अधिकाधिक रोपण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बांस एक ऐसा पौधा है जिसका हर एक हिस्सा उपयोगी होता है। इनका रोपण्ा जंगलों के साथ-साथ खेतों में भी किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बांस के पौधे लगाने पर किसानों को राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत दो किश्तों में बीस रुपए का अनुदान दिया जाता है। मंत्री ने बताया कि सरगुजा संभाग में खेत की मेड़ों में बांस की खेती सफल साबित हुई है। इस तरह के प्रयास अन्य जिलों में भी किया जाना चाहिए। श्री उसेण्डी ने प्रदेश के बंसोड़ परिवारों को शासन के नियमानुसार नियमित रूप से बांस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। छत्तीसगढ़ में पांच हजार 227 पंजीकृत बंसोड़ परिवार हैं और राज्य शासन की ओर से उन्हें प्रति परिवार प्रति वर्ष डेढ़ हजार बांस उपलब्ध कराया जाता है। बाजार दर से लगभग आधी कीमत पर बांस उन्हें दिया जाता है ताकि इसका उपयोग कर वे अपनी आजीविका अच्छी तरह चला सकें।
वन मंत्री ने कहा कि बांस शिल्पकारों को नियमित रूप से रोजगार उपलब्ध कराने के लिए इनके द्वारा निर्मित सामग्रियों की आपूर्ति शासकीय कार्यालयों में भी होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए भण्डार क्रय नियम में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में बांस के कम उत्पादन वाले जिलों में अभिवहन पास (टी.पी.) जारी करने का अधिकार ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन विभाग) श्री नारायण सिंह सहित प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री धीरेन्द्र शर्मा और प्रबंध संचालक वन विकास निगम श्री आर.के.शर्मा उपस्थित थे।

