कैम्पा विजन 2020 तैयार करने के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला प्रांरभ
वनोपज आधारित कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत : वन मंत्री
रायपुर 12 अक्टूबर 2010

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी ने आज यहां क्षतिपूर्ति वनीकरण के संबंध में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला 'कैम्पा विजन 2020' का शुभारंभ किया। इसमें अगले दस वर्ष अर्थात 2020 तक के लिए विजन दस्तावेज तैयार किया जाएगा। वन मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि वनों और वनवासियों के विकास के संबंध में यहां विषय विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श के बाद जो भी कार्ययोजना तैयार की जाएगी, वन विभाग द्वारा इस पर अमल किया जाएगा। उन्होंने लघु वनोपज के संग्रहण में लगे वनवासियों को ज्यादा लाभ दिलाने के लिए कुटीर उद्योग लगाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए वनवासियों को जरूरी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उम्मीद जताई कि कार्यशाला में वनों और वनवासियों के विकास के संबंध में सार्थक और विस्तृत चर्चा की जाएगी। । श्री उसेण्डी ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को बने अभी दस वर्ष हुए हैं। इस दौरान राज्य ने विकास संबंधी अनेक सोपान तय किए हैं। छत्तीसगढ़ की 44 प्रतिशत भू-भाग में जंगल का विस्तार राज्य के लिए गर्व का विषय है। इनका संरक्षण करते हुए वनों का और अधिक विस्तार करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। श्री उसेण्डी ने बताया कि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र द्वारा 123 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। राज्य में इस निधि से अगले एक वर्ष में एक लाख हेक्टेयर के रकबे में वृक्षारोपण, क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण और वन संरक्षण सहित विभिन्न प्रकार के कार्य किए जाने की कार्रवाई चल रही है। इस निधि के अंतर्गत वन अधिकारियों और कर्मियों की दक्षता बढ़ाने के लिए उन्हें वाहन सुविधा और संचार सुविधाओं से लैस किया गया है। इनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने सघन वनों के साथ विरल क्षेत्रों में भी कैम्पा निधि का उपयोग करने की सलाह दी।
वनमंत्री ने कहा कि राज्य में वनवासियों द्वारा लगभग एक सौ 60 तरह की लघु वनोपज का संग्रहण किया जाता है। कच्चे रूप मे संग्रहण और विक्रय से संग्राहकों को ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता है। उन्हें अपने घर में ही कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। इसके अलावा संग्रहण में लगे लोगों की क्षमता में सुधार कर उनमें उद्यमिता की भावना लाने की भी जरूरत है। श्री उसेण्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल पर आगामी 2022 तक छत्तीसगढ़ में एक करोड़ 25 लाख लोगों की कौशल विकास कर उन्हें स्व-रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। वनवासियों को भी इस योजना में शामिल करके उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रमुख सचिव वन श्री नारायण सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दशकों से पर्यावरण असंतुलन ने पूरी दुनिया की चिंता को बढ़ाया है। पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना पूरे विश्व के लिए चुनौती बन गई है। हरियाली और पेड़-पौधों को बचाने के लिए बड़ी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए कोई सार्थक पहल करने के पहले हमें उस समाज और उनकी संस्कृति को समझने की जरूरत है। श्री सिंह ने कहा कि हमारे जन-जातीय क्षेत्र वन और खनिज संपदा से परिपूर्ण हैं। इसके बावजूद जनजातीय लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं। प्रमुख सचिव ने कहा कि विकास के लिए कोई भी कार्ययोजना बनाते समय हमें स्थानीय लोगों की जरूरतों और उनकी भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। अनुभव यह कहता है कि अभी तक उन्हें नजर-अंदाज किया गया है। उन्होंने कैम्पा विजन में इनको साथ लेकर चलने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि उनको विश्वास में लिए बगैर क्षेत्र का संपूर्ण विकास किया जाना संभव नहीं है।
श्री नारायण सिंह ने कहा कि समय के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की रणनीति में बदलाव आया है। अब अशासकीय संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों और निजी व्यक्तियों की भूमिका बढ़ी है। ऐसे समूहों से समन्वय बनाकर ही कार्ययोजना बनानी चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज साढ़े सात हजार से अधिक संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के साढ़े 27 लाख वनवासी सदस्य प्रदेश के 51 प्रतिशत वनों की सुरक्षा में लगी हुई हैं। इन सदस्यों को रोजगार के साधन मुहैया कराकर इनकी माली हालत बढ़ाने की जरूरत है। सरकार के पास इन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए अनेक योजनाएं है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष सहित महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं से उन्हें मदद किया जा सकता है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री आर.के. शर्मा ने इस अवसर पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ सहित देश के नौ राज्यों- अरूणाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, आन्ध्रप्रदेश, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के विन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने राज्यों के 'कैम्पा विजन 2020' पर प्रस्तुतिकरण देंगे। प्रथम सत्र में आज छत्तीसगढ़ वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा) डॉ. ए.ए.बोआज द्वारा 'कैम्पा विजन 2020' पर छत्तीसगढ़ की कार्ययोजना का प्रारूप प्रस्तुत किया गया।
वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उम्मीद जताई कि कार्यशाला में वनों और वनवासियों के विकास के संबंध में सार्थक और विस्तृत चर्चा की जाएगी। । श्री उसेण्डी ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को बने अभी दस वर्ष हुए हैं। इस दौरान राज्य ने विकास संबंधी अनेक सोपान तय किए हैं। छत्तीसगढ़ की 44 प्रतिशत भू-भाग में जंगल का विस्तार राज्य के लिए गर्व का विषय है। इनका संरक्षण करते हुए वनों का और अधिक विस्तार करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। श्री उसेण्डी ने बताया कि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र द्वारा 123 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। राज्य में इस निधि से अगले एक वर्ष में एक लाख हेक्टेयर के रकबे में वृक्षारोपण, क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण और वन संरक्षण सहित विभिन्न प्रकार के कार्य किए जाने की कार्रवाई चल रही है। इस निधि के अंतर्गत वन अधिकारियों और कर्मियों की दक्षता बढ़ाने के लिए उन्हें वाहन सुविधा और संचार सुविधाओं से लैस किया गया है। इनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने सघन वनों के साथ विरल क्षेत्रों में भी कैम्पा निधि का उपयोग करने की सलाह दी।
वनमंत्री ने कहा कि राज्य में वनवासियों द्वारा लगभग एक सौ 60 तरह की लघु वनोपज का संग्रहण किया जाता है। कच्चे रूप मे संग्रहण और विक्रय से संग्राहकों को ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता है। उन्हें अपने घर में ही कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। इसके अलावा संग्रहण में लगे लोगों की क्षमता में सुधार कर उनमें उद्यमिता की भावना लाने की भी जरूरत है। श्री उसेण्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल पर आगामी 2022 तक छत्तीसगढ़ में एक करोड़ 25 लाख लोगों की कौशल विकास कर उन्हें स्व-रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। वनवासियों को भी इस योजना में शामिल करके उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रमुख सचिव वन श्री नारायण सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दशकों से पर्यावरण असंतुलन ने पूरी दुनिया की चिंता को बढ़ाया है। पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना पूरे विश्व के लिए चुनौती बन गई है। हरियाली और पेड़-पौधों को बचाने के लिए बड़ी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए कोई सार्थक पहल करने के पहले हमें उस समाज और उनकी संस्कृति को समझने की जरूरत है। श्री सिंह ने कहा कि हमारे जन-जातीय क्षेत्र वन और खनिज संपदा से परिपूर्ण हैं। इसके बावजूद जनजातीय लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं। प्रमुख सचिव ने कहा कि विकास के लिए कोई भी कार्ययोजना बनाते समय हमें स्थानीय लोगों की जरूरतों और उनकी भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। अनुभव यह कहता है कि अभी तक उन्हें नजर-अंदाज किया गया है। उन्होंने कैम्पा विजन में इनको साथ लेकर चलने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि उनको विश्वास में लिए बगैर क्षेत्र का संपूर्ण विकास किया जाना संभव नहीं है।
श्री नारायण सिंह ने कहा कि समय के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की रणनीति में बदलाव आया है। अब अशासकीय संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों और निजी व्यक्तियों की भूमिका बढ़ी है। ऐसे समूहों से समन्वय बनाकर ही कार्ययोजना बनानी चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज साढ़े सात हजार से अधिक संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के साढ़े 27 लाख वनवासी सदस्य प्रदेश के 51 प्रतिशत वनों की सुरक्षा में लगी हुई हैं। इन सदस्यों को रोजगार के साधन मुहैया कराकर इनकी माली हालत बढ़ाने की जरूरत है। सरकार के पास इन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए अनेक योजनाएं है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष सहित महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं से उन्हें मदद किया जा सकता है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री आर.के. शर्मा ने इस अवसर पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ सहित देश के नौ राज्यों- अरूणाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, आन्ध्रप्रदेश, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के विन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने राज्यों के 'कैम्पा विजन 2020' पर प्रस्तुतिकरण देंगे। प्रथम सत्र में आज छत्तीसगढ़ वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा) डॉ. ए.ए.बोआज द्वारा 'कैम्पा विजन 2020' पर छत्तीसगढ़ की कार्ययोजना का प्रारूप प्रस्तुत किया गया।
क्रमांक-3273/पटेल

