साल वनों को 'बोरर' से बचाने कार्यशाला आयोजित
रायपुर, 30 नवम्बर 2011
कुदरत की अनमोल देन साल वनों को एक खतरनाक कीड़े साल छेदक यानी 'साल बोरर' से बचाने के लिए राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार के वन विभाग और मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यशाला का आज शुभारंभ हुआ। दो सत्रों में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में साल बोरर के प्रबंधन से संबंधित विभिन्न तकनीकी उपायों पर विशेषज्ञों ने विचार मंथन किया। 
कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के निदेशक डॉ. एम.एस.नेगी ने कहा कि साल वृक्ष भारत में प्राकृतिक और आर्थिक दृष्टि से सागौन के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण और सर्वाधिक कीमती वृक्ष माना गया है। उन्होंने कार्यशाला में बताया कि भारत में साल वनों का क्षेत्रफल लगभग एक लाख 05 हजार 790 वर्ग किलोमीटर का है। इसमें से करीब 26 हजार 042 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में फैला हुआ है, जो पूरे देश के साल वनों का लगभग 25 प्रतिशत है। डॉ. नेगी ने कार्यशाला में यह भी बताया कि इसमें से छत्तीसगढ़ में साल वनों का कुल क्षेत्रफल 19 हजार 682 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का करीब 46 प्रतिशत है। इसे ध्यान में रखकर छत्तीसगढ़ में साल वनों की इस बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा बहुत जरूरी है। शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री धीरेन्द्र शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साल वनों को 'बोरर' के प्रकोप से बचाने के लिए सभी जरूरी सतर्कतामूलक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार के वन विभाग के विशेषज्ञ अधिकारी और जबलपुर के उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से इस दिशा में विचार मंथन कर और भी ज्यादा व्यापक सुरक्षा तैयारी करेंगे।
श्री शर्मा ने बताया कि इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग और उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के बीच पांच वर्षों के लिए द्विपक्षीय अनुबंध किया गया है। कार्यशाला में उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के वन कीट प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. एन.राय चौधरी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, प्रभागाध्यक्ष वन संवर्धन प्रभाग डॉ. एस.डी. सोनकर और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए.एन.कुलकर्णी ने साल बोरर कीट प्रकोप के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने साल छेदक इस कीड़े के बारे में भी बताया और इसके प्रकोप से पीड़ित वृक्षों का लक्षणों के आधार पर वर्गीकरण करने और इस कीड़े से बचाव सहित साल वृक्षों के प्राकृतिक रूप से दोबारा उत्पादन की संभावनाओं को लेकर भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यशाला में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री रामप्रकाश और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री बी.के.सिन्हा भी उपस्थित थे। प्रथम सत्र में वन विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, वनमण्डलाधिकारी, उप वनमण्डाधिकारी भी शामिल हुए। दूसरे सत्र में वनपरिक्षेत्राधिकारियों और मैदानी अमले को इस महत्वपूर्ण विषय पर तकनीकी जानकारी दी गयी। कार्यशाला में उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के वैज्ञानिकों सहित छत्तीसगढ़ के अनेक शिक्षाविद, वन और पर्यावरण विशेषज्ञ तथा समाज सेवी संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के निदेशक डॉ. एम.एस.नेगी ने कहा कि साल वृक्ष भारत में प्राकृतिक और आर्थिक दृष्टि से सागौन के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण और सर्वाधिक कीमती वृक्ष माना गया है। उन्होंने कार्यशाला में बताया कि भारत में साल वनों का क्षेत्रफल लगभग एक लाख 05 हजार 790 वर्ग किलोमीटर का है। इसमें से करीब 26 हजार 042 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में फैला हुआ है, जो पूरे देश के साल वनों का लगभग 25 प्रतिशत है। डॉ. नेगी ने कार्यशाला में यह भी बताया कि इसमें से छत्तीसगढ़ में साल वनों का कुल क्षेत्रफल 19 हजार 682 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का करीब 46 प्रतिशत है। इसे ध्यान में रखकर छत्तीसगढ़ में साल वनों की इस बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा बहुत जरूरी है। शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री धीरेन्द्र शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साल वनों को 'बोरर' के प्रकोप से बचाने के लिए सभी जरूरी सतर्कतामूलक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार के वन विभाग के विशेषज्ञ अधिकारी और जबलपुर के उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से इस दिशा में विचार मंथन कर और भी ज्यादा व्यापक सुरक्षा तैयारी करेंगे।
श्री शर्मा ने बताया कि इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग और उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के बीच पांच वर्षों के लिए द्विपक्षीय अनुबंध किया गया है। कार्यशाला में उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के वन कीट प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. एन.राय चौधरी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, प्रभागाध्यक्ष वन संवर्धन प्रभाग डॉ. एस.डी. सोनकर और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए.एन.कुलकर्णी ने साल बोरर कीट प्रकोप के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने साल छेदक इस कीड़े के बारे में भी बताया और इसके प्रकोप से पीड़ित वृक्षों का लक्षणों के आधार पर वर्गीकरण करने और इस कीड़े से बचाव सहित साल वृक्षों के प्राकृतिक रूप से दोबारा उत्पादन की संभावनाओं को लेकर भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यशाला में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री रामप्रकाश और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री बी.के.सिन्हा भी उपस्थित थे। प्रथम सत्र में वन विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, वनमण्डलाधिकारी, उप वनमण्डाधिकारी भी शामिल हुए। दूसरे सत्र में वनपरिक्षेत्राधिकारियों और मैदानी अमले को इस महत्वपूर्ण विषय पर तकनीकी जानकारी दी गयी। कार्यशाला में उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के वैज्ञानिकों सहित छत्तीसगढ़ के अनेक शिक्षाविद, वन और पर्यावरण विशेषज्ञ तथा समाज सेवी संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
क्रमांक- 3902/स्वराज्य

