लघु वनोपज व्यापारियों से होगी बकाया राजस्व की वसूली
वन मंत्री ने दिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश
पांच सौ से अधिक व्यापारियों पर है 60.79 करोड़ रुपए का बकाया
रायपुर, 28 नवम्बर 2010
लघु वनोपज व्यापारियों से बकाया राजस्व की वसूली के लिए छत्तीसगढ़ में राज्य शासन द्वारा विशेष अभियान चलाया जाएगा। वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी ने वन विभाग के अधिकारियों को इस आशय के निर्देश को दिए हैं। वन मंत्री ने कहा है कि लम्बे समय से बकाया राजस्व जमा नहीं कराने वाले व्यापारियों के विरूध्द राजस्व वसूली प्रकरण (आर.आर.सी) दर्ज कर सख्ती से राजस्व वसूली किया जाए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के बत्तीस वन मण्डलों में लघु वनोपज विशेषकर तेन्दूपत्ता व्यवसाय से जुड़े पांच सौ 24 व्यापारियों के उपर 60 करोड़ 79 लाख रुपए का राजस्व बकाया है। श्री उसेण्डी ने वसूली की प्रगति की समीक्षा करते हुए वर्तमान वसूली को नाकाफी बताया और इसमें और अधिक तेजी लाने के निर्देश दिए।
वन विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रदेश के 32 वन मण्डलों में सबसे अधिक राजस्व बकाया जशपुर वन मण्डल के सत्रह तेन्दूपत्ता व्यापारियों पर है। इनसे राज्य शासन को 18 करोड़ 79 लाख रुपए की राशि वसूल करना है। इसी प्रकार उत्तर सरगुजा वन मण्डल के 53 व्यापारियों से दस करोड़ 35 लाख रुपए, धरमजयगढ़ वन मण्डल के बारह व्यापारियों से सात करोड़ 59 लाख रुपए, रायगढ़ वन मण्डल के 32 व्यापारियों से तीन करोड़ 66 लाख रुपए, कोरबा वन मण्डल के 28 व्यापारियों से दो करोड़ 53 लाख रुपए की राशि वसूल किया जाना है। पूर्व भानुप्रतापपुर वन मण्डल, खैरागढ़ वन मण्डल और उत्तरी कोण्डागांव वनमण्डल को छोड़कर शेष वनमण्डलों के व्यापारियों से भी बकाया राशि वसूल किया जाना है।
जगदलपुर वन मण्डल के नौ व्यापारियों से लगभग 88 लाख रुपए, सुकमा वन मण्डल में पन्द्रह व्यापारियों से 97 लाख रुपए, दंतेवाड़ा वन मण्डल में एक व्यापारी से सात लाख रुपए, बीजापुर वन मण्डल में चौदह व्यापारियों से 15 लाख रुपए, कांकेर वनमण्डल में सात व्यापारियों से एक करोड़ 47 लाख रुपए, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मण्डल में 35 व्यापारियों से एक करोड़ सात लाख रुपए, दक्षिण कोण्डागांव वन मण्डल में 11 व्यापारियों से दो करोड़ 14 लाख रुपए, नारायणपुर वन मण्डल में चार व्यापारियों से 64 लाख रुपए, दुर्ग वन मण्डल में आठ व्यापारियों से 32 हजार रुपए, राजनांदगांव वन मण्डल में 70 व्यापारियों से 75 लाख रुपए, कवर्धा वन मण्डल में तीन व्यापारियों से सवा नौ लाख रुपए, रायपुर वन मण्डल में 33 व्यापारियों से एक करोड़ पांच लाख रुपए, पूर्व रायपुर वन मण्डल में 32 व्यापारियों से एक करोड़ 60 लाख रुपए, धमतरी वन मण्डल में सात व्यापारियों से 50 लाख रूपए, महासमुंद में तीन व्यापारियों से दस लाख 18 हजार रुपए, उदंती में दो व्यापारियों से 27 लाख रुपए, बिलासपुर वन मण्डल में 21 व्यापारियों से 40 लाख रुपए, मरवाही वन मण्डल में नौ व्यापारियों से 58 लाख रुपए, कटघोरा वन मण्डल में एक व्यापारी से 93 लाख रुपए, जांजगीर चाम्पा वन मण्डल में दो व्यापारी से छह लाख रुपए, दक्षिण सरगुजा वन मण्डल में 36 व्यापारियों से एक करोड़ 79 लाख रुपए, पूर्वी सरगुजा वन मण्डल में 20 व्यापारियों से एक करोड़ 60 लाख रुपए, कोरिया वन मण्डल में पन्द्रह व्यापारियों से एक करोड़ 28 लाख रुपए तथा मनेन्द्रगढ़ वन मण्डल में एक व्यापारी से दो लाख 85 हजार रुपए वसूल किया जाना है।

