प्रबंधकों और फड़ मुंशियों से हड़ताल पर न जाने की अपील
प्रबंधकों का वेतन 350 रुपए प्रतिमाह बढ़ा, अब 3850 रूपए वेतन
प्रबंधकों और फड़ मुंशियों की आगामी 30 अप्रैल से हड़ताल पर जाने की घोषणा से निपटने वनोपज संघ ने की वैकल्पिक व्यवस्था
रायपुर 28 अप्रैल 2010
छत्तीसगढ राज्य निर्माण से अभी तक राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति के प्रबंधकों का वेतन सात दफे बढ़ाया गया है। समिति प्रबंधकों को वर्तमान में तीन हजार 500 रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है जिसमें एक अप्रैल 2010 से 350 रुपए और बढ़ाया गया है। इसके फलस्वरूप प्रबंधकों को अब तीन हजार 850 रुपए मासिक वेतन मिलेगा। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ के प्रबंध संचालक श्री ए.के. सिंह ने समिति प्रबंधकों और फड़ मुंशियों से आगामी 30 अप्रैल से प्र्रस्तावित हड़ताल पर नहीं जाने की अपील की है। प्रबंध संचालक ने वर्तमान में जारी तेन्दूपता संग्रहण कार्य को देखते हुए प्रदेश के लाखों आदिवासी एवं गरीब तेन्दूपत्ता संग्राहकों के हित में हड़ताल वापस लेने की अपील भी प्रबंधकों और फड़ मुंशियों से की है।
प्रबंध संचालक ने बताया कि राज्य में कुल 915 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधक है। इन प्रबंधकों के संघ ने तृतीय वर्ग कर्मचारी के समकक्ष नियमित करने अथवा आठ हजार 500 रुपए मासिक वेतनमान निर्धारित किये जाने की मांग की है। इन अंशकालीन प्रबंधकों को वर्तमान में तीन हजार 500 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। प्रबंधकों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए विगत एक मार्च 2008 से निर्धारित वेतन दो हजार 700 रुपये मासिक से बढ़ाकर एक नवम्बर 2008 से तीन हजार 500 रुपए निर्धारित किया गया। इसके बाद पिछले 30 मार्च 2010 को आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के संचालक मण्डल की बैठक में वेतन में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए तीन हजार 850 रुपए मासिक निर्धारित किया गया है। पड़ोसी मध्यप्रदेश राज्य में अभी भी लघु वनोपज संघ के प्रबंधकों को तीन हजार 500 रुपए मासिक के हिसाब से वेतन भुगतान किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय इन प्रबंधकों को तीन समूहों 'अ' 'ब' और 'स' श्रेणी में विभाजित कर इन्हें मासिक वेतन क्रमश: एक हजार, नौ सौ और छह सौ रुपए दिया जाता था। राज्य गठन के बाद अभी तक सात दफे प्रबंधकों के वेतन में वृध्दि की जा चुकी है। प्रतिमाह तीन हजार 800 के हिसाब से वेतन भुगतान किये जाने पर कुल सालाना वित्तीय भार चार करोड़ 23 लाख रुपए है। यदि आठ हजार 500 रुपए प्रति महीने के हिसाब से वेतन भुगतान किया जाएगा तो सालाना नौ करोड़ 33 लाख रुपये का व्यय भार आएगा।
इसी तरह प्राथमिक वनोपज सहकारी समिमियों के फड़ मुंशियों द्वारा उन्हें दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी घोषित करने और प्रतिमाह एक हजार 500 रुपए मानदेय की मांग की गई है। वर्तमान में फड़ मुंशियों की संख्या लगभग 10 हजार है तथा इनकी नियुक्ति प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों द्वारा की जाती है। ये फड़ मुंशी कमीशन के आधार पर तेन्दूपत्ते की बूटा कटाई और संग्रहण का कार्य कराते हैं जो कि लगभग एक माह का कार्य है। इस कार्य के लिए उन्हें तेरह रुपए प्रति मानक बोरे के हिसाब से कमीशन दिया जाता है। इसके अलावा चरण पादुका वितरण हेतु संग्राहकों के पैरों के नाप लेने एवं चरणपादुका वितरण में इनकी सहायता ली जाती है। पैरों के माप लेने के लिए दो रुपए प्रति संग्राहक और चरण पादुका वितरण के लिए दो रुपए प्रति संग्राहक भुगतान किया जाता है। इसके सिवाय फड़ मुंशियों से पूरे वर्ष भर कोई कार्य नहीं लिया जाता है।
इस विषय में यह भी उल्लेखनीय है कि समिति में तेन्दूपत्ते के विक्रय से जो भी लाभ होता है,उसी आय में से समिति प्रबंधकों को वेतन भुगतान किया जाता है। प्रबंधकों के वेतन या अन्य मदों में जितना अधिक व्यय होगा, उतने ही अनुपात में तेन्दूपत्ता संग्राहकों को कम बोनस मिलेगा। वर्तमान में तेन्दूपत्ते का संग्रहण प्रांरभ हो चुका है। इसलिए ऐसे समय पर किसी प्रकार का धरना या प्रदर्शन किया जाना उचित नहीं है। हड़ताल को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य के सुचारू संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। इस दौरान वन विभाग तथा अन्य विभागों के शासकीय कर्मचारी जिनकी नियुक्ति पोषक अधिकारी तथा फड़ अभिरक्षक के रूप में की गई है, उनके द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य संपन्न किया जायेगा।

