अबूझमाड़ के वनवासियों ने सीखा बांस से अगरबत्ती काड़ी बनाना
वन विभाग की ओर से नि:शुल्क औजार भी दिया गया
रायपुर 28 दिसम्बर 2010
छत्तीसगढ़ के नक्सल पीड़ित नारायणपुर जिले के मुख्यालय नारायणपुर में विगत दिवस वन विभाग द्वारा स्थानीय वनवासियों को अगरबत्ती निर्माण में उपयोगी बांस काड़ी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में अबूझमाड़ क्षेत्र से विस्थापित आदिवासी सहित आसपास के ग्रामों के 126 हितग्राहियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के बाद राज्य शासन की ओर से इन हितग्राहियों को काड़ी निर्माण के लिए जरूरी औजार (किट) भी नि:शुल्क वितरित किया गया।
नारायणपुर के बाँस प्रसंस्करण केन्द्र में आयाजित इस प्रशिक्षण में जिला कलेक्टर श्री एल.एस.केन और वन मण्डलाधिकारी श्री व्ही. माथेश्वरन विशेष रूप से उपस्थित थे। कलेक्टर श्री केन ने कहा कि अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने के लिए बांस काड़ी निर्माण एक अच्छी योजना है। प्रशिक्षण के बाद इन वनवासियों को बांस भी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि काड़ी बनाने में ज्यादा तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं है और सरलतापूर्वक ग्रामीण अपने घर में भी काड़ी निर्माण कर सकते हैं। वन मण्डलाधिकारी श्री माथेश्वरन ने कहा कि नारायणपुर वन मण्डल के जंगलों में साल, बीजा, सागौन के साथ अत्यधिक मात्रा में बांस के पौधे पाए जाते हैं। यह बांस स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण साधन हैं। बांस से विभिन्न तरह की उपयोगी सामग्रियों का निर्माण और ग्रामीण शिल्पकारों की कौशल को निखारने के लिए राज्य शासन द्वारा जिला मुख्यालय नारायणपुर में बांस प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि अगरबत्ती की अत्यधिक मांग और क्षेत्र में बांस की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों को अगरबत्ती काड़ी निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद अगली कड़ी में ग्राम बेनूर, धौड़ाई और छोटेडोंगर में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वनवासियों द्वारा निर्मित यह सभी काड़ी की खरीदी वन विभाग द्वारा किया जाएगा।
नारायणपुर के बाँस प्रसंस्करण केन्द्र में आयाजित इस प्रशिक्षण में जिला कलेक्टर श्री एल.एस.केन और वन मण्डलाधिकारी श्री व्ही. माथेश्वरन विशेष रूप से उपस्थित थे। कलेक्टर श्री केन ने कहा कि अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने के लिए बांस काड़ी निर्माण एक अच्छी योजना है। प्रशिक्षण के बाद इन वनवासियों को बांस भी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि काड़ी बनाने में ज्यादा तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं है और सरलतापूर्वक ग्रामीण अपने घर में भी काड़ी निर्माण कर सकते हैं। वन मण्डलाधिकारी श्री माथेश्वरन ने कहा कि नारायणपुर वन मण्डल के जंगलों में साल, बीजा, सागौन के साथ अत्यधिक मात्रा में बांस के पौधे पाए जाते हैं। यह बांस स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण साधन हैं। बांस से विभिन्न तरह की उपयोगी सामग्रियों का निर्माण और ग्रामीण शिल्पकारों की कौशल को निखारने के लिए राज्य शासन द्वारा जिला मुख्यालय नारायणपुर में बांस प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि अगरबत्ती की अत्यधिक मांग और क्षेत्र में बांस की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों को अगरबत्ती काड़ी निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद अगली कड़ी में ग्राम बेनूर, धौड़ाई और छोटेडोंगर में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वनवासियों द्वारा निर्मित यह सभी काड़ी की खरीदी वन विभाग द्वारा किया जाएगा।
क्रमांक-5386/पटेल

