वन प्रबंधन समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ वन विभाग को मिला प्रथम पुरस्कार
समिति सदस्यों ने वन मंत्री से मुलाकात कर सौंपी शील्ड

केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कोलकाता में आयोजित संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सरकार के वन विभाग को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में बेहतर योगदान के लिए यह पुरस्कार मिला है। समिति सदस्यों ने आज दोपहर यहां वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी से उनके निवास में मुलाकात की और पुरस्कार के रूप में प्राप्त शील्ड और प्रमाण पत्र उन्हें दिखाया। श्री उसेण्डी ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सदस्यों और वन विभाग के अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी छत्तीसगढ़ में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के कार्यों की प्रशंसा की है।
सम्मेलन का आयोजन भारतीय जैव-सामाजिक अनुसंधान एवं विकास संस्थान (इबार्ड) द्वारा कोलकाता में 23 से 27 फरवरी तक किया गया। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सहित तेरह राज्यों की संयुक्त वन प्रबंधन समितियों ने हिस्सा लिया। रायपुर वन मण्डल के अर्जुनी परिक्षेत्र के परिक्षेत्राधिकारी श्री डी.के.साहू के नेतृत्व में प्रदेश की पांच संयुक्त वन प्रबंधन समितियों ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। इनमें संयुक्त वन प्रबंधन समिति धमनी वनमण्डल, रायपुर के सदस्य श्री रामनारायण यादव, संयुक्त वन प्रबंधन समिति दुगली, धमतरी वन मण्डल के सदस्य श्री मायाराम नागवंशी, सयुक्त वन प्रबंधन समिति कुल्हाड़ीघाट उदंती वन मण्डल के सदस्य श्री फूलचंद कमार, सयुक्त वन प्रबंधन समिति करियापहाड़, कांकेर वन मण्डल के सदस्य श्री नोहरसिंह शोरी और संयुक्त वन प्रबंधन समिति डोंगरगांव, जिला राजनांदगांव के श्री चंद्रशेखर उइके शामिल हैं। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की गतिविधियों और उपलब्धियों की विस्तृत और शानदार प्रस्तुति दी गई। आयोजन में इन समितियों द्वारा बांस से निर्मित सामग्रियों, और 'संजीवनी 'उत्पादों की विशेष रूप से सराहना की गई। छत्तीसगढ़ के अलावा सम्मेलन में दूसरा पुरस्कार आन्ध्रदेश और तीसरा पुरस्कार बिहार को प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि वनों की सुरक्षा में जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ में सात हजार 887 संयुक्त वन प्रबंधन समितियां क्रियाशील हैं। इन समितियों से जुड़े साढ़े 27 लाख सदस्य मिलकर प्रदेश के लगभग 33 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र की सुरक्षा और संवर्धन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

