छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता संग्रहण की तैयारियां शुरू
इस बार 16.39 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ते की आवक होने का अनुमान
लगभग 13.76 लाख गरीब परिवारों को मिल सकता है 131.12 करोड़ का पारिश्रमिक
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश
संग्रहण कार्य का नियमित निरीक्षण करें अधिकारी
रायपुर 05 अप्रैल 2011
हर साल की तरह इस वर्ष भी गर्मियों में लाखों ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आमदनी के लिए मौसमी रोजगार दिलाने वाले तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य की तैयारियां छत्तीसगढ़ में तेजी से शुरू हो गयी है। यह एक समयबध्द अभियान है। इसके सुचारू संचालन के लिए राज्य सरकार के मुख्य सचिव श्री पी.जॉय.उम्मेन ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और वनमंडलाधिकारियों को पत्र भेजकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। श्री उम्मेन ने इन अधिकारियों से कहा है कि लगभग एक माह तक चलने वाले संग्रहण कार्य के दौरान फड़ों (संग्रहण केन्द्रों) और गोदामों का नियमित रूप से और बारीकी से निरीक्षण किया जाए। मुख्य सचिव ने इस पत्र की प्रतिलिपि राज्य शासन के सभी जिलों के प्रभारी सचिवों (प्रमुख सचिवों और सचिवों) को भी अपने-अपने प्रभार जिलों में संग्रहण कार्य के निरीक्षण करने और शासन के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। श्री उम्मेन ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजकर कहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस को तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य के समय पर्याप्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जाएं।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों और वनमंडलाधिकारियों को सम्बोधित पत्र में कहा है कि तेन्दूपत्ता संग्रहण एक महत्वपूर्ण कार्य है। इस वर्ष लगभग तेरह लाख 76 हजार गरीब परिवारों को अनुमानित सोलह लाख 39 हजार मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण से लगभग 131 करोड़ 12 लाख रूपए का पारिश्रमिक मिलने की उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा संग्राहकों को लगभग 200 करोड़ रूपए का प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) भी मिलेगा। इन संग्राहकों में अधिकांश गरीबी रेखा श्रेणी के आदिवासी हैं। मुख्य सचिव ने पत्र में आगे लिखा है कि इस वर्ष तेन्दूपत्ते का अग्रिम विक्रय बहुत अच्छी दरों पर हुआ है। तेन्दूपत्ते का औसत विक्रय मूल्य दो हजार 577 रूपए प्रति मानक बोरा है। अनुमानित उत्पादन के आधार पर राज्य के तेन्दूपत्ते का मूल्य लगभग 422 करोड़ रूपए होगा। इस राशि पर 25 प्रतिशत की दर से वाणिज्यिक-कर और तीन प्रतिशत की दर से वन विकास उपकर पृथक से प्राप्त होगा। चूंकि तेंदूपत्ते का विक्रय मूल्य बहुत अधिक है, अत: ये संभावनाएं हैं कि कुछ क्रेताओं तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा अनियमिततायें कर यह प्रयास किया जा सकता है कि संग्राहकों को संग्रहण पारिश्रमिक या कुछ अधिक राशि का भुगतान कर पत्ता बगैर अभिलेख में दर्ज किये प्राप्त कर लिया जाए, ताकि विक्रय मूल्य तथा संग्रहण पारिश्रमिक की बहुत बड़ी अंतर की राशि तथा उस पर देय करों से बचा जा सके। अत: संग्रहण केन्द्रों तथा गोदामों का नियमित निरीक्षण बारीकी से अधिकारियों द्वारा किया जाए।
मुख्य सचिव ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा वन विभाग की समीक्षा के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण में कमी के कारणों पर चिंता व्यक्त की गयी थी और उन्होंने निर्देश दिए थे कि जो भी कठिनाइयां हैं, उनका समाधान कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि जितना अधिक पत्ता टूटेगा, उतना ही अधिक संग्रहण पारिश्रमिक और प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) संग्राहकों को प्राप्त होगा। मुख्य सचिव श्री उम्मेन ने पत्र में जिला कलेक्टरों और वनमण्डलाधिकारियों को यह भी लिखा है कि तेंदूपत्ता संग्रहण के समय यथासंभव अन्य रोजगारमूलक कार्यों पर जोर ना दिया जाए ताकि ग्रामीणों को संग्रहण कार्य के समय इस कार्य से और शेष अवधि में अन्य योजनाओं के कार्यों में अधिक से अधिक मजदूरी प्राप्त हो सके। प्रत्येक जिले में तेंदूपत्ता टूटने की अलग-अलग अवधि लगभग तीस दिनों की होती है। अत: इस अवधि को निर्धारित कर संग्रहण कार्य कराने वाले विभागों और संस्थाओं को सूचित कर दें। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की डयूटी इस महीने के अंतिम सप्ताह तक लगा देने के निर्देश दिए हैं। श्री उम्मेन ने यह भी कहा है कि इस कार्य को सिर्फ छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ अथवा वन विभाग का कार्य न मानकर राज्य स्तरीय कार्यक्रम के रूप में सम्पन्न किया जाए।

