तेन्दूपत्ता श्रमिकों को मिली सौगात : संग्राहकों को मिलेगा अब आठ सौ रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक
वनों की सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायतों में 'वनप्रहरी' नियुक्त होंगे
पुलिस चौकी की तर्ज पर होगी 'वन चौकियों' की स्थापना
वन मंत्री ने विधानसभा में की घोषणा
वन विभाग का 620.40 करोड़ रुपए की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित
रायपुर, 23 मार्च 2011
छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ते की संग्रहण दर में एक सौ रूपए प्रति मानक बोरे की बढ़ोतरी की गई है। संग्राहकों को चालू संग्रहण वर्ष 2011 में अब सात सौ रूपए प्रति मानक बोरे के बदले आठ सौ रूपए प्रति मानक बोरे की दर से पारिश्रमिक दिया जाएगा। प्रदेश के साढ़े 13 लाख से अधिक वनवासी परिवारों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। वनों की सुरक्षा के लिए नक्सल प्रभावित जिलों के प्रत्येक ग्राम पंचायत में वन प्रहरी नियुक्त किए जाएंगे। वनों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती प्रदान करते हुए पुलिस चौकियों की भांति वन चौकियां भी स्थापित की जाएंगी। वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी ने राज्य विधानसभा में विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान आज यहां घोषणा की। विधानसभा द्वारा वित्तीय वर्ष 2011-12 के लिए वन विभाग के लिए 620 करोड़ 40 लाख चार हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनि मत से पारित किया गया।
वन मंत्री श्री उसेण्डी ने विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जंगलों की सुरक्षा और वनवासियों का विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्री उसेण्डी ने कहा कि नक्सल प्रभावित जिलों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में वन प्रहरी योजना लागू की जाएगी। प्रथम चरण में आदिवासी बहुल बस्तर, सरगुजा, राजनांदगांव, कोरिया आदि जिलों के तीन हजार 89 युवाओं को कार्य पर रखने की योजना है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक शिक्षित बेरोजगार युवक का चयन कर उन्हें प्रतिमाह तीन हजार रूपए निश्चित मानदेय दिया जाएगा। ये वन प्रहरी वनों की सुरक्षा एवं विकास में वन विभाग को सहयोग प्रदान करेंगे।
वन मंत्री श्री उसेण्डी ने वनों की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए पुलिस की भांति वन चौकियों की स्थापना की घोषणा की। इस तरह स्थापित प्रत्येक वन चौकी के दायरे में लगभग 60 वर्ग किलोमीटर वनक्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी रहेगी। प्रथम चरण में प्रदेश के नक्सल प्रभावित 22 वन मण्डलों में 292 वन चौकियों की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक वन चौकी पर एक -एक उपवन क्षेत्रपाल और वन पाल सहित पांच से छह वनरक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इन वन चौकियों से ही सामूहिक गश्त की जाएगी और इन चौकियों में नई सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
वन मंत्री श्री उसेण्डी ने तेन्दूपत्ता संग्राहकों के मेधावी बच्चों को शिक्षा जारी रखने में सहयोग प्रदान करने के लिए शिक्षा प्रोत्साहन योजना प्रारंभ करने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत वन विभाग द्वारा तेन्दूपत्ता संग्राहकों के मेधावी बच्चों को व्यवसायिक शिक्षा में अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी। प्रत्येक चयनित छात्र को शिक्षा पूर्ण होते तक चार किश्तों में 25 हजार रुपए की छात्रवृत्ति मिलेगी। प्रथम वर्ष में दस हजार रुपए और शेष तीन वर्षों में पांच-पांच हजार रुपए दिए जाएंगे। इसी प्रकार प्राथमिक वनोपज सहकारी स्तर पर भी वन विभाग द्वारा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। आठवीं, दसवीं और बारहवीं की कक्षा में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को क्रमश: दो हजार, ढाई हजार और तीन हजार रुपए एकमुश्त राशि दी जाएगी। श्री उसेण्डी ने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल अचान-कमार अभ्यारण में सैलानियों के उपयोग के लिए तीन वाहन प्रदान करने की घोषणा भी की।
वन मंत्री ने कहा कि वन्य जंतुओं के संरक्षण और प्रबंधन पर वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में 59 करोड़ 23 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। हाथी समस्या के निराकरण हेतु विभाग सजग है। जशपुर जिले में बादलखोल तथा सरगुजा जिले में सेमरसोत और तमोरपिंगला अभ्यारण्य तथा इनसे लगे क्षेत्रों को शामिल कर एक हाथी रहवास क्षेत्र बनाया जाएगा। इन जंगली हाथियों के मार्गों के दोनों ओर इलेक्ट्रिक फेंसिंग करने का फैसला भी लिया गया है। प्रथम चरण में जशपुर और रायगढ़ जिले के 34 सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों का चयन किया गया है। श्री उसेण्डी ने बताया कि जंगली जानवरों के हमले से मौत होने पर दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाकर दो लाख रुपए और स्थायी रूप से अपंग होने पर 50 हजार रुपए कर दी गई है।
श्री उसेण्डी ने विधानसभा में बताया कि लघु वनोपज लाख उत्पादन के मामले में देश में छत्तीसगढ़ लगातार चार वर्षों से प्रथम स्थान पर रहा है। वर्ष 2011-12 में लाख विकास योजनाओं के लिए दो करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वनौषधि बोर्ड की गतिविधियों की जानकारी देते हुए वन मंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग डेढ़ हजार औषधीय पादप पाए जाते हैं। इनमें से करीब 73 विलुप्ति के करीब पहुंच चुके हैं। करीब चार घण्टे तक चली इस बजट चर्चा में सदस्य सर्वश्री लखमा कवासी, दीपक पटेल, धर्मजीत सिंह, फूलचंद सिंह, रामदेव राम, रामजी भारती, शिवराज सिंह उसारे, दूजराम बौध्द, जगेश्वर राम भगत, हृदय राम राठिया, सेवक राम नेताम, शक्राजीत नायक, डमरूधर पूजारी, टी.एस. सिंहदेव, रविन्द्र चौबे तथा श्रीमती अम्बिका मरकाम, डॉ. रेणु जोगी और श्रीमती सुमित्रा मारकोले ने हिस्सा लिया।

