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शैक्षणिक गुणवत्ता से देश को मिले बेहतर नेतृत्व-श्री दत्त

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When Jun 06, 2011
from 06:55 PM to 06:55 PM
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राज्यपाल ने शैक्षणिक काउंसिलिंग पर दिया जोर


विश्वविद्यालय समन्वय समिति की अठारहवीं बैठक

 

रायपुर 06 जून 2011
1113-060611
प्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री शेखर दत्त की अध्यक्षता में आज यहां राजभवन के सभाकक्ष में विश्वविद्यालय समन्यवय समिति की 18वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री श्री हेमचंद यादव, कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू, समस्त विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण और विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
बैठक में राज्यपाल ने शैक्षणिक गुणवत्ता पर सर्वाधिक जोर दिया और कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों की सार्थकता तभी है जब वे भावी पीढ़ी को बेहतर तरीके से तैयार करें, जिससे वे देश को सभी क्षेत्रों में बेहतर नेतृत्व दे सके। शैक्षणिक संस्थाएं ऐसे विद्यार्थी तैयार करें जो रोजगार प्राप्ति के प्रारंभिक स्तर पर ही केवल अच्छी शुरूआत नहीं करें बल्कि ऊंचे मुकाम पर भी पहुंचे और वहां भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें (विद्यार्थी स्ट्रांग बिगनर ही नहीं बने बल्कि बेस्ट फिनिशर भी बने)। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास करने और निखारने पर जोर दिया तथा उच्च शिक्षा के साथ-साथ उद्योग, व्यवसाय और कृषि आदि के बीच भी परस्पर समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होने विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान के साथ-साथ प्रायोगिक शिक्षा देने पर भी बल दिया।
राज्यपाल ने कहा कि आज हर व्यक्ति अपनी युवा पीढ़ी को उच्च एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के प्रति न केवल सतर्क है बल्कि समर्पित भी है। स्कूल शिक्षा के समय से ही विद्यार्थियों को अपनी रूचियों और रूझान के अनुसार राज्य के साथ-साथ देश और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक संस्थानों, ब्रान्चों और उनकी फीस, एडमिशन प्रक्रिया, रियायत फीस के सीटों की संख्या आदि की जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए राज्यपाल ने स्कूली स्तर से ही विद्यार्थियो की जागरूकता तथा मार्गदर्शन के लिए काउंसिलिंग की व्यवस्था करने पर जोर दिया। इसी तरह उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से पढ़ाई पूरी कर उत्तीर्ण होकर निकलने वाले विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार संबंधी जानकारी देने के लिए भी काउंसिलिंग कराये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्व के विकसित देशों में काउंसिलिंग का कार्य सफलतापूर्वक किया जाता है। अगर हम भी काउंसिलिंग का कार्य सफलतापूर्वक कर सकें तो यह हमारे राज्य के लिए एक अच्छी शुरूआत होगी।
    श्री दत्त ने शैक्षणिक संस्थानों से आव्हान किया कि वे शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए हरसंभव उपाय करें जिससे नैक के आधार पर राज्य की संस्थाओं को अच्छी ग्रेडिंग मिल सके तथा शैक्षणिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ का नाम देश में जाना जाये।
श्री दत्त ने कहा कि प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों की पृथक-पृथक आवश्यकताएं और कार्य क्षेत्र हैं, लेकिन इसके बावजूद भी उनमें अनेक एक जैसी समस्यायें, आवश्यकताएं, उद्देश्य हैं जिसके कारण प्रक्रिया और कार्यवाही में एकरूपता होने से कई अनावश्यक विसंगतियों से छुटकारा पाया जा सकता हैं।
राज्यपाल ने बैठक में जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों से सम्बध्दता लिए जाने वाले सभी शैक्षणिक संस्थानों और महाविद्यालयों के पास समुचित अधोसंरचनाएं और योग्य शिक्षक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होने चाहिए, तभी यहां के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी जोर दिया कि निजी महाविद्यालयों में पर्याप्त अधोसंरचना और शिक्षकों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से रहनी चाहिए तथा ऐसी संस्थाएं जो मार्गदर्शन के अनुरूप इसकी उपलब्धता कराने में असमर्थ है उनके विरूध्द कठोर से कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। राज्यपाल ने संस्थाओं की जांच के लिए आकस्मिक निरीक्षण करने पर बल दिया। बैठक में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से सम्बध्द होने वाले महाविद्यालयों के पोस्ट ग्रेजुएट, अंडर ग्रेजुएट आदि कोर्सेस की फीस की राशि बढ़ाये जाने का भी निर्णय लिया गया है।
    कैंपस सलेक्शन पर जोर
 राज्यपाल ने प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थाओं को ऐसे प्रयास करने को कहा जिससे उनके शैक्षणिक संस्थानों में कैंपस सलेक्शन हो सके। उन्होंने कहा कि कैंपस सलेक्शन का होना यह प्रदर्शित करता है कि नियोक्ता उस संस्थान के संबंध में कैसे विचार रखते हैं।
बस्तर विश्वविद्यालय में नये पाठयक्रमों को स्वीकृति मिली
    बैठक में बस्तर विश्विद्यालय जगदलपुर में एम.एस.सी. सूक्ष्म जीव विज्ञान (माइक्रोबायोलॉजी) तथा एम.बी.ए. नवीन पाठयक्रम प्रारंभ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके अलावा उनके द्वारा दिये गये मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एम.एस.डब्ल्यू.) को भी अनुमोदित किया गया। परन्तु उनके द्वारा दिये गये मास्टर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन पाठयक्रम के स्थान पर एम.एस.सी. आई.टी. प्रारंभ किये जाने के स्थायी समिति के अभिमत को अनुमोदित किया गया। बैठक में पं. सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर के प्रस्ताव, जिसमें उनके द्वारा वहां जिसके द्वारा विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करने का आग्रह किया गया था को स्वीकृति प्रदान की गई।
परीक्षा से जुड़े पारिश्रमिक कार्यो की दरें बढ़ी
    बैठक में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के एक अन्य प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई, जिसके अंतर्गत परीक्षा कार्य से जुड़े विभिन्न कार्यो के लिए पारिश्रमिक की दर को संशोधित कर बढ़ाया गया है। उल्लेखनीय है कि इसके पहले वर्ष 2003 में स्वीकृत प्रश्न पत्र रचना, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन, परीक्षा कार्य अधीक्षण, परीक्षा कार्य अवधि में वीक्षण एवं अन्य सभी कार्यो के लिए पारिश्रमिक दर निर्धारित की गई थी। इन दरों के काफी कम होने के कारण परीक्षा से जुड़े हुए लोगों द्वारा बार-बार बढ़ाये जाने का आग्रह किया जाता था।
बैठक में राज्य के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय शिक्षण विभागों में शैक्षणित सत्र 2011-12 में छात्र संघ की गठन अथवा चुनाव किये जाने के संबंध में भी चर्चा की गई। यह निर्णय लिया गया की लिंगदोह समिति की रिपोर्ट के अनुरूप स्ट्रक्चर्स इलेक्शन मॉडल राज्य में बनाया जाना है तथा इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये निर्देशाें का पालन किया जाना है। बैठक में शैक्षणिक सत्र 2011-12 के लिये अकादमिक कैलेण्डर का अनुमोदन किया गया। बैठक में राज्यपाल ने समन्वय समिति की पिछली बैठकों में लिये गये निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास किए जाने पर बल दिया। बैठक में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय द्वारा मांगे जाने पर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा बजट में आवंटित राशि समय पर विमुक्त की जाये, जिससे विश्वविद्यालय इनका समय पर सद्उपयोग कर सकें। इसी तरह विश्वविद्यालय को भी निर्देशित किया गया कि उपयोगिता प्रमाण पत्र सक्षम एजेंसियों को समय सीमा पर प्रदान करें।
बैठक में विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण सर्वश्री पद्मश्री डॉ. ए.टी. दाबके, डॉ. एस.के. पाण्डेय, श्री सच्चिदानंद जोशी, डॉ. मांडवी सिंह, डॉ. एम.पी. पाण्डेय, डॉ. बी.सी. मल्ल, प्रो. जयलक्ष्मी ठाकुर, डॉ. एस.के. वर्मा, डॉ. ए.आर. चंद्राकर, कृषि विभाग के प्रमुख सचिव श्री डी.एस. मिश्रा, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री सी.के. खेतान, राज्यपाल के सचिव श्री जवाहर श्रीवास्तव, तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव श्री के. सुब्रमणियम,, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के सचिव श्री ए.के. सामंत रे, राज्यपाल के संयुक्त सचिव श्री निरंजन दास सहित समिति के सदस्यगण उपस्थित थे।
क्रमांक-1113/पंकज/शुक्ल

 

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