विश्व का नेतृत्व करे भारत -श्री दत्त
आई.आई.एम. के विद्यार्थियों को राज्यपाल ने संबोधित किया
भारतीय प्रबंधन संस्थान का दूसरा बैच प्रारंभ
रायपुर, 11 जुलाई 2011
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने आज यहां भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर (आई.आई.एम.) के पोस्ट ग्रेजुएट के दूसरे बैच का शुभारंभ दीप-प्रज्त्वलित कर किया। उन्होंने देश के इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमारे युवाओं के सामने जहां एक ओर संभावनाओं का खुला आकाश मौजूद है वहीं दूसरी ओर सैकड़ों चुनौतियां भी है। आज समय आ गया है कि भारत विश्व में अपनी भूमिका को और बेहतर रूप से समझे और अपनी नेतृत्व क्षमता से विश्व का नेतृत्व करे। उन्होंने कहा कि आज से इस संस्थान के नवप्रवेशी युवाओं की नई यात्रा प्रारंभ हो रही है और उन्हें अपनी नई जिम्मेदारी निभाने के लिए तत्पर होने की जरूरत है।
श्री दत्त ने कहा कि आगामी 15 जुलाई को भारत एक बार फिर से पी.एस.एल.वी. का प्रक्षेपण करने जा रहा है। इसके माध्यम से एक साथ बारह सेटेलाईट अंतरिक्ष में स्थापित किए जाएंगे। यह क्षमता भारत के सामर्थ्य को प्रदर्शित करता है, लेकिन आज हमें विकास के लिए अनेक सुधार करने की जरूरत है वहीं अनुशासन बढ़ाने की जरूरत है। आज हमारा देश आजाद है और हमें ऐसा सुशासन स्थापित करने की जरूरत है जिससे देश और यहां के लोगों का सर्वांगीण्ा विकास हो सके। उन्होंने वर्क (कार्य) की वैज्ञानिक परिभाषा बताते हुए कहा कि कोई भी कार्य तभी कहलाता है जब फोर्स के माध्यम से वह उसका डिस्प्लेसमेंट होता है। इसी तरह 'कोशिश' उस समय तक अपूर्ण है जब तक की उसका परिण्ााम नहीं मिले।
राज्यपाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपना एक लक्ष्य निर्धारित करें और जब उन्हें इस लक्ष्य की प्राप्ति हो जाये तो वे अपने लक्ष्य को और आगे बढ़ायें। उन्होंने कहा कि प्रदेश एवं देश स्थित प्रबंधन संस्थानों के विद्यार्थियों में दायित्वों के निवर्हन की क्षमता है और आशा है कि वे अपनी क्षमता और उन पर की गई अपेक्षा के अनुरूप अच्छी भूमिका निभायेंगे।
श्री दत्त ने कहा कि यदि हमें तेज गति आगे बढ़ना है तो चुनौतियों के साथ-साथ उच्च लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कोशिश करनी होगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य और जानवर में केवल इतना अंतर है कि जानवर केवल अपनी इच्छा के अनुरूप कार्य करता है, जबकि मनुष्य अपनी बौध्दिक क्षमता के अनुरूप कार्य करने को स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि संपदा का निर्माण या धन की प्राप्ति केवल प्रार्थना से नहीं हो सकती बल्कि इसके लिए हमें व्यवस्थित योजना बनाकर ठोस कार्य करने की जरूरत है। राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि वे सफलता को अपना लक्ष्य बनायें तथा इसके लिए नवाचार तथा नेतृत्व को अपने में समाहित करें।
राज्यपाल ने हजारों साल पहले बाहरी आक्रमणों से चीन को बनाने के लिए ग्रेट वाल के निर्माण करने तथा द्वितीय विश्व युध्द के विध्वंस के बाद जापान के उत्थान कर विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का उदाहरण्ा दिया। उन्होंने कहा कि भारत के लोग केवल अच्छे सेल्समैन ही नहीं बनें, बल्कि अच्छे निर्माता और अच्छे उपभोक्ता भी बने। उन्होंने कहा कि भारत में सदियो पुराने ज्ञान का समृध्द भंडार है। हमें इस ज्ञान का लाभ उठाने के साथ-साथ नये अनुसंधान पर भी जोर देने की जरूरत है जिससे हम 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना भली-भांति कर सके। उन्होंने विद्यार्थियों से नेतृत्व क्षमता, दृढ़ता, साहस, बढ़ाने तथा नकारात्मक सोच से दूर रहने पर जोर दिया।
आई.आई.एम. रायपुर के डायरेक्टर श्री बी.पी. सहाय ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश एवं प्रदेश में मानवीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिये मानव संसाधन विभाग ने झारखंड, उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ जैसे नवोदित एवं पिछड़े राज्यों में भारतीय प्रबंधन संस्थानों की स्थापना की है। इसे गुणवत्तायुक्त प्रबंधकीय की उच्च स्तरीय संस्था बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रबंधन के क्षेत्र में विश्व भर में हो रहे परिवर्तनों और चुनौतियों की ओर छात्रों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिये सतत तैयार रहना चाहिए और इसके लिये व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. एम.के. कानादासन ने आभार व्यक्त किया। इसके पहले डॉ. नवल वाजपेयी ने संस्थान में बच्चों की भर्ती प्रक्रिया की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के रायपुर में 11 अक्टूबर 2010 को आई.आई.एम. की शुरूआत की गई थी। वर्तमान में यह संस्था शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर, सेजबहार रायपुर में संचालित है तथा संस्था का भवन नया रायपुर में बन रहा है। इस संस्थान में प्रवेश के लिए अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षा ली जाती है तथा यहां प्रबंधन मेें दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएशन पाठयक्रम संचालित किए जाते हैं।
राज्यपाल ने दिये बच्चों के प्रश्नों के उत्तर
इस अवसर पर राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गये विभिन्न प्रश्नों का उत्तर भी दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की समाज को एकरूप बनाये जाने की जरूरत है। हमारे समाज में घर के समीप के किराना स्टोर से लेकर नुक्कड़ के ठेलों तक की एक लम्बी श्रृंखला निजी माध्यम के द्वारा व्यवसाय का व्यापक कार्य करती है। उन्होंने कहा कि विदेशों में उच्च संस्थानों द्वारा उच्च स्तरीय गुणवत्ता के साथ कम लाभ लेकर भी अपने ज्यादा टर्नओवर के माध्यम से लाभ अर्जित किया जाता है। उन्होंने कहा कि पावर सहित अनेक सेक्टरों में न केवल नवाचार की जरूरत है बल्कि उनमें मांग को बढ़ावा दिये जाने के लिए भी अनेक उपाय करने की जरूरत है।

