देश की मजबूती के लिए आर्थिक रूप से सशक्त बनना जरूरी - श्री दत्त
आयकर विभाग के 150 वर्ष पूरा होने पर समापन कार्यक्रम का आयोजन

भारत में आयकर विभाग के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने आज इंदौर में आयोजित समापन समारोह की अध्यक्षता की। अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि किसी भी देश के तेज विकास के साथ-साथ उसके सशक्त और मजबूत होने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है। आज हमारा देश न केवल तेजी से विकास कर रहा है बल्कि विश्व का नेतृत्व करने की दृष्टि से भी आगे बढ़ रहा है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि भारत आर्थिक रूप से भी सक्षम, समर्थ और सबल बने तथा यहां की विषमताओं को दूर करने की दिशा में व्यापक कार्य किये जाये।
इसके पहले राज्यपाल श्री दत्त ने मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के आयकर विभाग द्वारा वर्ष भर चले समारोह के समापन कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित करके किया। श्री दत्त ने आगे कहा कि अपने अस्तित्व के 150 वर्षों में आयकर के रूप में जहां वर्ष 1960-61 में एक करोड़ 33 लाख रूपए का कर संग्रहण हुआ था वही पिछले वित्तीय वर्ष में यह बढ़कर 4 लाख 60 हजार करोड़ रूपए हो गया है। यह इस बात का प्रतीक है कि आयकर विभाग सक्षमता और कुशलता से अपना कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा की आयकर सहित विभिन्न कर राशि से जहां देश और लोगों के विकास के लिए अनेक कार्य किये जाते हैं, संसाधन निर्मित किये जाते हैं वहीं देश को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किये जाते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि कर का संग्रह एक अप्रिय तथा तकलीफ भरा काम है क्योंकि इसे लोगों की आय के एक हिस्से के रूप में प्राप्त किया जाता है लेकिन इस कार्य को उस समय और अधिक स्वीकार्य और जनभागीदारी से युक्त बनाया जा सकता है, जब इसकी प्रक्रिया को पारदर्शी तथा लोगो के मित्रवत बनाया जाए। इसके द्वारा अधिक से अधिक आयकर की प्राप्ति हो,इसके लिए कर नियमों को सरल, आसान तथा आम लोगों के आसानी से समझ में आने लायक बनाने की भी जरूरत है।
श्री दत्त ने कहा कि दुनिया में हर सरकार कर लगाती है और यह शासन की आय का महत्वपूर्ण स्रोत होता है। प्राचीन भारत में कौटिल्य जिन्हें चाणक्य के नाम से भी जाना जाता है, ने प्रशासन द्वारा लगाये जाने वाले करों का विवरण दिया था तथा एक सशक्त राज्य के लिए इसकी महत्ता बताई थी। मनु ने भी मनु संहिता में प्रशासन द्वारा लिये जाने वाली करों से संबंधित कर्तव्यों और सिध्दांतों का वर्णन किया है। प्रारंभिक मध्ययुगीन भारत में भूमि और कृषि का विकास होने पर इससे लिये जाने वाला कर राज्य के आय का प्रमुख स्रोत बन गया। बाद में कर की संचरना में विविधिता आई और आयकर अस्तिव में आया। राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि समय के बीतने के साथ-साथ लोगों के व्यवहार में एक दु:खद एवं नाटकीय बदलाव आ रहा है। अभी लम्बा समय नहीं बीता है जब लोग करों के भुगतान को अपनी नैतिक जिम्मेदारी तथा कर्तव्य मानते थे। लेकिन आज आर्थिक रूप से सशक्त होने के बावजूद तथा भौतिकतावादी आचरण के कारण करों के संग्रहण के लिये अधिक प्रयास करना पड़ रहा है। ऐसे समय आयकर विभाग की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि वे समाज के वंचितों के उत्थान और भलाई के लिये धनी लोगों से कर संग्रहण के लिये व्यापक प्रयास करें। उन्होंने महात्मा गांधी के सपने का भी स्मरण किया, जिसमें उन्होंने विषमता और गरीबी को दूर करने पर जोर दिया था। राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के सभी आयकर देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में महानिदेशक आयकर विभाग, भोपाल श्री विजय शर्मा ने हाल ही में आयकर विभाग द्वारा उठाये गये कदमों की महत्वपूर्ण जानकारी दी। मुख्य आयकर आयुक्त भोपाल श्री कमलेश अर्गल ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य आयकर आयुक्त रायपुर श्री ए.के. जैन ने वर्ष भर चले कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री दत्त ने वर्ष के दौरान लगाये गये कला प्रदर्शनी पर आधारित किताब का विमोचन किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य आयकर आयुक्त इंदौर श्री एस.के. मिश्रा ने आभार व्यक्त किया। यह उल्लेखनीय है कि 24 जुलाई 1860 को श्री जेम्स विलसन ने भारत में आयकर का शुभारंभ किया था। इसके 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर एक साल तक चलने वाले समारोह का शुभारंभ 24 जुलाई 2010 को प्रारंभ हुआ जिसका समापन आज इंदौर में हुआ।

