छत्तीसगढ़ हाट में 'जगार-2011' का भव्य शुभारंभ
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सपत्निक किया शिल्प कलाओं का अवलोकन
उत्कृष्ट शिल्प के लिए सात शिल्पकारों को राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान
रायपुर, 11 अप्रैल 2011

राजधानी रायपुर के पण्डरी स्थित छत्तीसगढ़ हाट में आज शाम प्रदेश के राज्यपाल श्री शेखर दत्त और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर शिल्प मेला 'जगार-2011' का भव्य शुभारंभ किया। इस शिल्प मेले में छत्तीसगढ़ के विविध शिल्प विधाओं के साथ-साथ देश के 14 राज्यों के शिल्प कलाओं का भी प्रदर्शन और विक्रय किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ हाट परिसर के नव-निर्मित मुक्ताकाश मंच में आयोजित शुभारंभ समारोह में राज्यपाल श्री दत्त और मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न विधाओं के उत्कृष्ट शिल्प कलाकृतियों के लिए सात शिल्पकारों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित भी किया। यह जगार 22 अप्रैल तक आयोजित रहेगा।
जगार के शुभारंभ के उपरान्त राज्यपाल और मुख्यमंत्री, राज्य के प्रथम महिला श्रीमती सुष्मिता दत्त, मुख्यमंत्री की धर्म पत्नी श्रीमती वीणा सिंह, ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले तथा विशिष्टजनों सहित विभिन्न शिल्प स्टालों में पहुंचकर यहां प्रदर्शित की जा रही शिल्प कलाओं का अवलोकन किया और उनकी भूरि-भूरि सराहना करते हुए शिल्पकारों को उनके हुनर के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी।
शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी शिल्प कलाओं के लिए प्रसिध्द और समृध्द
है। यहां के कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा से देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है। छत्तीसगढ़ की हस्तशिल्प कला, बुनकर कला, टेराकोटा, बेलमेटल कला, बांस शिल्प आदि प्रसिध्द है। यह कला इन कलाकारों के जीवन का अभिन्न अंग हैं। इन कलाकारों ने हमारे राज्य को जहां विशिष्ट पहचान दी है साथ ही साथ संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन भी किया है। जगार महोत्सव का आयोजन इन्हीं कलाकारों के प्रति सम्मान जगाने का प्रयास है। श्री दत्त ने नागरिकों से अपील की कि वे इन शिल्प कलाकारों की न केवल प्रशंसा करें, बल्कि उनकी कलाओं का उपयोग भी करें और उनके प्रचार-प्रसार करने में भी अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की कलाकृति न केवल देश के विभिन्न भागों में बल्कि विदेशों में भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी और यहां की कला और कलाकारों को आगे बढ़ने के लिए नागरिकों तथा शासन से हमेशा सहयोग मिलता रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जगार की परिकल्पना के लिए राज्यपाल श्री शेखर दत्त के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि रायपुर संभाग के कमिश्नर के रूप में उन्होंने जगार की कल्पना की थी। खुशी की बात है कि उन्होंने जो बीज बोया था उसका व्यापक विकास और विस्तार हुआ है। जगार के माध्यम से प्रयास है कि आम नागरिक इन शिल्पकारों की कलाकृतियों को नजदीक से देख सकें, समझ सकें और सीख सकें, साथ-साथ राज्य के कलाकारों को भी अपने बाजार को बेहतर बनाने का तथा बाजार की मांग को समझने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि इस बात की जरूरत है कि छत्तीसगढ़ के शिल्प को छत्तीसगढ़ मॉडल, एकताल मॉडल, कोण्डागांव मॉडल आदि के रूप में पेटेंट कराया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि डोंगरगढ़ में प्रति वर्ष मेले का आयोजन होता है। यहां शिल्प ग्राम के विकास के लिए पचास लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गयी है। इसी तरह के शिल्प ग्रामों का विकास सिरपुर तथा अन्य जगहों में होने वाले मेलों में भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में बताया कि संभवत: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का एकताल ऐसा गांव है, जो पूरी तरह शिल्पियों का गांव है। यहां से प्रवेश करते ही शिल्प कलाओं की अदभूत और आकर्षित कर लेने वाली कलाओं के दर्शन होते हैं। यहां के कलाकारों ने देश के महामहिम राष्ट्रपति से ही नहीं बल्कि लंदन, पेरिस जैसे स्थानों से भी पुरस्कार अर्जित किए हैं। यहां के शिल्पकार पीढ़ियों से राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ और देश का नाम रौशन कर रहे हैं।
इस अवसर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि कलाकार एवं शिल्पकार अपने परिश्रम से साज-सज्जा एवं सुसज्जित करने वाली सामग्री का निर्माण करते हैं। राज्य गठन के पहले शिल्पकार एवं कलाकारों की कला को प्रोत्साहन देने के लिए उतना अधिक प्रयास नहीं हुआ था और न ही उनकी कला आगे बढ़ पायी थी। सन् 2000 तक केवल चौदह लाख रूपये का बजट प्रावधान था, जो अब बढ़कर आठ करोड़ रूपये से अधिक का हो चुका है। मंत्री श्री मोहले बताया कि कलाकारों की कलाकृतियों एवं शिल्पों के लिए देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जहां उनके विक्रय से करीब एक करोड़ रूपये का लाभ प्राप्त हुआ। इसके अलावा देश के अन्य भागों में भी प्रदर्शनी लगाने का प्रयास किया जा रहा है। शिल्प के नये डिजाईन के लिए पांच कलाकारों को दो-दो लाख रूपए की राशि से सम्मानित करने का भी प्रयास है। शासन द्वारा इन शिल्पकारों की कलाकृतियों के लिए बाजार एवं प्रशिक्षण की भी व्यवस्था भी की जा रही है।
छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष मेजर अनिल सिंह ने बताया कि राज्य में जगार का यह नौंवा वर्ष है और इन चंद वर्षों में इसे विशेष प्रसिध्दि मिली है। उन्होंने बस्तर एवं सरगुजा के विश्व प्रसिध्द कलाकृतियों एवं शिल्पों का उल्लेख किया और कहा कि इन कलाकारों और शिल्पकारों की आर्थिक हालत सुधारने की जरूरत है। आभार प्रदर्शन छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख सचिव श्री पी. रमेश कुमार ने आभार प्रदर्शन किया।
सम्मानित हुए शिल्पकार

समारोह में राज्यपाल श्री शेखर दत्त और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने उत्कृष्ट कलाकारों एवं शिल्पकारों को उनकी कृतियों के लिए वर्ष 2009 एवं 2010 के लिए शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। जिन कलाकारों को सम्मानित किया गया उनमें कोण्डागांव बस्तर की श्रीमती मीरा ठाकुर को माड़िया खम्बा बेलमेटल शिल्प, एकताल रायगढ़ के श्री त्रिनाथ झारा को गरीब किसान की कहानी बेलमेटल शिल्प, कोण्डागांव बस्तर के श्री तिजूराम विश्वकर्मा के सुफली दीया, लौह शिल्प, कोण्डगांव बस्तर के ही श्री दीपक देवांगन को श्री गणपति जी तुमा शिल्प, एकताल रायगढ़ के श्री भोगीलाल झारा को बैलगाड़ी में दुल्हा-दुल्हन की
विदाई बेलमेटल शिल्प, एकताल रायगढ़ के ही श्री अख्या झारा को गौर नाचा बेलमेटल शिल्प और ग्राम ओरसी रायपुर के श्री डाकेश्वर वर्मा को राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत एवं भारत माता काष्ठ शिल्प के लिए सम्मानित किया गया है।
इस अवसर पर रायपुर के महापौर डॉ. किरणमयी नायक, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील सोनी, विधायक श्री कुलदीप जुनेजा, अम्बिकापुर नगर निगम के महापौर प्रबोध मिंज, खादी बोर्ड के अध्यक्ष श्री गिरीधर गुप्ता के साथ-साथ बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

