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जनसामान्य में समाचार की सत्यता समझने की प्रवृत्ति विकसित करने की जरूरत : राज्यपाल श्री शेखर दत्त

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When Aug 01, 2010
from 08:00 PM to 08:00 PM
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'प्रायोजित समाचार की चुनौतियां' विषय पर संगोष्ठी आयोजित

 रायपुर, 01 अगस्त 2010

2043-010810

    राज्यपाल श्री शेखर दत्त आज रायपुर में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय द्वारा 'प्रायोजित समाचार की चुनौतियां' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में शामिल हुए। राज्यपाल श्री दत्त ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रचार, विज्ञापन एवं प्रमोशन पत्रकारिता नहीं है, बल्कि किसी सूचना के संचार, अन्वेषण, समालोचना, समीक्षा एवं टिप्पणी के माध्यम से सच को सामने लाना पत्रकारिता है। पत्रकारिता से जुड़े लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे जनसामान्य को जागरूक, प्रबुध्द उपभोक्ता (नागरिक) बनाने की दिशा में प्रयास करें, ताकि लोग प्रायोजित एवं यथार्थ समाचार के बीच का अन्तर समझ सके।

   श्री दत्त ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार और समालोचकों की मीडिया के प्रति रचनात्मक जिम्मेदारी एवं प्रस्थिति हमेशा बनी रहेगी। मीडिया अपनी समीक्षा एवं परिमार्जन करने में स्वयं सक्षम है। भाषा से संवाद या संचार होता है। भाषा का सही तरीके से इस्तेमाल कर जनसामान्य तक सूचनाओं को पहुंचाना पत्रकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्पिक मैके संस्था भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रतिबध्द है और वर्तमान समय में हमारे देश में दो प्रकार की धाराएं दिखाई पड़ती हैं - एक क्लासिकल और दूसरी पॉप। उसी प्रकार पत्रकारिता में भी क्लासिकल पत्रकारिता के अंतर्गत समीक्षा, समालोचना तथा टिप्पणी शामिल होती है, जबकि पॉप पत्रकारिता में मुद्दा कम तथा विज्ञापन व प्रस्तुतिकरण आकर्षक होता है। ऐसी पत्रकारिता अधिक समय तक नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि खराब उत्पाद हमेशा नहीं बिक सकता। जीत हमेशा सच की होती है और मीडिया सच को सामने लाने का महत्वपूर्ण साधन है। श्री दत्त ने कहा कि पत्रकार स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा, स्वच्छता आदि के संबंध में नवीन नीतियों एवं योजनाओं के समाचार से पाठकों को अवगत कराते हैं और इसे बढ़ावा देते हैं। नई योजना के प्रचार-प्रसार के लिए सूचना, संचार एवं प्रशिक्षण तीन चरण अपनाए जाते हैं। पत्रकारों का यह दायित्व है कि सूचनाओं का प्रसारण करें और लोगों के विचारों में परिवर्तन लाने का कार्य करें।

  वरिष्ठ पत्रकार श्री ललित सुरजन ने कहा कि चुनाव के समय प्रचार-प्रसार सामग्री को समाचार के रूप में प्रकाशित-प्रसारित करना निस्संदेह पत्रकारिता की नैतिकता के खिलाफ है। इससे समाचारों की विश्वसनीयता पर ऑंच आती है, जनता के बीच उसका सम्मान घटता है तथा राजनेताओं के सामने पत्रकारिता की चारित्रिक दुर्बलता प्रकट होती है। दूसरी ओर राजनेताओं को इसका कोई खास लाभ नहीं मिलता। भारतीय मतदाता चुनाव के समय अपने मताधिकार का उपयोग विवेक के साथ करता है तथा ऊपरी चमक-दमक व मीडिया में प्रायोजित खबरों से वह प्रभावित नहीं होता। स्वस्थ पत्रकारिता के विकास हेतु जनतंत्र में शासन को भी समुचित उपाय करना चाहिए, जो कि नहीं किए जा रहे हैं। स्वामित्व का विकेंद्रीकरण, एकाधिकार पर अंकुश, कारपोरेट पूंजी से विच्छेद, प्राइस-पेज शेडयूल, लागत मूल्य पर अखबार की बिक्री आदि ऐसे ही कुछ उपाय हैं।

     भारतीय जनसंचार संस्थान (इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मास कम्युनिकेशन) के प्रोफेसर श्री एम.के. श्रीवास्तव ने देश के महान नेता बाल गंगाधर तिलक को याद करते हुए कहा कि पत्रकारिता में सत्य कहने की परम्परा उन्होंने आरंभ की थी, जो आज भी समाप्त नहीं हुई है। प्रायोजित समाचार काफी समय से चले आ रहे हैं। पी. साईंनाथ जैसे वरिष्ठ पत्रकार ने चुनावों में  प्रायोजित समाचारों के मुद्दे को उजागर कर वैश्विक बना दिया। इससे हमारे देश की पत्रकारिता को गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यजनक है कि जिन अखबारों ने प्रायोजित समाचारों की गलत परम्परा शुरू की है, उसकी प्रसार संख्या और पाठक वर्ग पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। हमारे देश में बुराईयां पनप रही है और इसे दूर करने के लिए जनता की जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विज्ञापनों के समाचार पत्रों पर बढ़ते प्रभाव तथा विश्व में प्रायोजित समाचारों के बढ़ते दुष्प्रभाव आदि बातों का उल्लेख किए।

   कार्यक्रम के आरंभ में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति श्री सच्चिदानंद जोशी ने अपने स्वागत भाषण में देश के महान राष्ट्रवादी नेता बाल गंगाधर तिलक, कुशाभाऊ ठाकरे और हाल ही में दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार रामशंकर अग्निहोत्री को स्मरण करते हुए कहा कि उनकी स्मृति में इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। मीडिया में आज व्यावसायिकता का बढ़ना चिन्ता की बात है। इसके कारण समाचारों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगने लगा है। उन्होंने कहा कि प्रायोजित समाचारों की चुनौतियों का सामना करने के लिए आचार-संहिता बनाकर मीडिया को आत्मानुशासन लाना होगा तभी समस्या का समाधान संभव है।

  वरिष्ठ पत्रकार श्री श्रवण गर्ग ने कहा कि मीडिया हमेशा से ही लोकतंत्र में अपनी चौथे स्तंभ की भूमिका का निर्वाह करते रही है। आज प्रायोजित समाचार कैंसर की तरह हमारी व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, लेकिन आगे भी हम सब प्रायोजित समाचार तथा अन्य बुराईयों से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना भविष्य खोज रहे पत्रकार ईमानदारीपूर्वक कार्य करते हुए समाज की सेवा कर सकते हैं।

   वरिष्ठ पत्रकार श्री जयंशकर गुप्त ने कहा कि प्रायोजित समाचारों के कारण हमारे देश की पत्रकारिता की विश्वसनीयता में कमी आई है। उन्होंने कहा कि प्रायोजित समाचार अनेक बीमारियों का सम्मिश्रण है और इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों में अपने पेशे के लिए प्रतिबध्दता की कमी भी इसका एक मुख्य कारण है। कार्यक्रम में माधवराव सप्रे के छत्तीसगढ़ मित्र के 19वें पुनर्मुद्रण अंक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर डॉ. सुशील त्रिवेदी, सर्वश्री रमेश नैयर, दिवाकर मुक्तिबोध, देवीप्रसाद वर्मा, गिरीश पंकज, परितोष चक्रवर्ती, मिर्जा मसूद, गिरजाशंकर, अशोक सप्रे सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक तथा पत्रकारिता के छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम के अन्त में कुल सचिव श्री डी.एन. वर्मा ने आभार व्यक्त किया।

क्रमांक-2043/सांडिया/उषा किरण
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