संविधान की सफलता के लिए सामाजिक न्याय के साथ होना चाहिए विकास : न्यायमूर्ति श्री पटनायक
गरीबों के कल्याण के लिए विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका की सक्रिय भागीदारी जरूरी : राज्यपाल श्री दत्त
भारतीय संविधान सबसे अनोखा और महत्वपूर्ण : डॉ. रमन सिंह
रायपुर 27 नवम्बर 2010

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अनंग कुमार पटनायक ने कहा है कि हमारे भारतीय संविधान ने नागरिकों को निश्चित रूप से अनेक मौलिक अधिकार दिए हैं। श्री पटनायक ने कहा कि इन अधिकारों का समुचित लाभ आम जनता तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संविधान की सफलता के लिए उसकी प्रस्तावना और सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप समाज के सभी वर्गो की बेहतरी के लिए काम होना चाहिए। न्यायमूर्ति श्री पटनायक ने आज शाम यहां छत्तीसगढ़ जन-प्रतिष्ठा व्याख्यान माला का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संविधान की सफलता तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक आर्थिक विकास का लाभ मिले। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को जीवन के अधिकार की गारंटी दी है। इस अधिकार के दायरे में भोजन, वस्त्र और मकान सहित स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ पर्यावरण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा और रोजगार के अधिकार भी आते हैं। इन अधिकारों का लाभ जरूरतमंद लोगों को मिले, इसके लिए बेहतर संसाधन जुटाना राज्य की जिम्मेदारी होती है।
श्री पटनायक ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभागृह में आयोजित समारोह में संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य और तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय पंडित रविशंकर शुक्ल की स्मृति में भारतीय संविधान पर केन्द्रित व्याख्यान दिया। व्याख्यान माला का आयोजन प्रदेश सरकार के जनसम्पर्क विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ संस्कृति फाउण्डेशन के सहयोग से किया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रदेश के राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने की। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक विशेष अतिथि के रूप में समारोह में उपस्थित थे। जनसम्पर्क विभाग के प्रमुख सचिव श्री एन. बैजेन्द्र कुमार ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने न्यायमूर्ति श्री पटनायक को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
व्याख्यान माला के मुख्य वक्ता की आसंदी से समारोह में न्यायमूर्ति श्री पटनायक ने भारतीय संविधान के विभिन्न पहलुओं के साथ आम जनता के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डाला। श्री पटनायक ने कहा कि हमारे संविधान का निर्माण दस, बीस या तीस वर्ष के लिए या फिर सीमित समय के लिए नहीं किया गया है। विधायिका आम जनता की जरूरतों के अनुरूप समय-समय पर संविधान में संशोधन करती रहती है, लेकिन संविधान की मूल भावना में बदलाव नहीं होता। श्री पटनायक ने कहा कि हम कानून को बदल सकते हैं, लेकिन अपने संविधान को नहीं। श्री पटनायक ने कहा कि हमारे संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार के रूप में जीवन का अधिकार मिला है। इसके अन्तर्गत आजीविका का अधिकार भी आता है। अगर किसी परियोजना के लिए लोगों की जमीन अधिग्रहित की जाती है तो उनके लिए रोजगार और पुनर्वास की उचित व्यवस्था के साथ वैकल्पिक बसाहट की भी व्यवस्था होनी चाहिए। न्यायमूर्ति श्री पटनायक ने इस सिलसिले में नर्मदा बचाओ आन्दोलन का भी उदाहरण दिया। श्री पटनायक ने कहा कि हमारे संविधान ने प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने के लिए अदालत जाने का अधिकार दिया है। उन्होंने इस व्याख्यान माला के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे देश और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मसलों पर सार्थक विचार-विमर्श होगा, जिसके निष्कर्षो का लाभ जनता को मिलेगा।
अध्यक्षीय आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए प्रदेश के राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने कहा कि समाज के सर्वाधिक पिछड़े और सबसे गरीब तबकों के विकास और कल्याण के लिए हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली में विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका में बेहतर ताल-मेल के साथ तीनों अंगों की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। श्री दत्त ने कहा कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे पिछड़े क्षेत्र से हाल ही में एक युवक का चयन डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए हुआ। उसे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का मौका मिला। निश्चित रूप से यह एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन हमें इस बात पर भी विचार करना होगा कि इस दुर्गम क्षेत्र और अत्यधिक पिछड़े आदिम समुदाय के किसी युवक को संविधान निर्माण के 60 वर्ष में हम पहली बार डॉक्टरी की पढ़ाई का अवसर दे पाए। उसे जनजातीय कोटे से नहीं बल्कि नि:शक्तजनों के कोटे से प्रवेश मिला। फिर भी यह संतोष का विषय है कि इतने पिछड़े क्षेत्र और पिछड़े समुदाय से किसी युवक को विकास की मुख्य धारा से जुड़ने का मौका मिला है। श्री दत्त ने भी व्याख्यान माला के आयोजन और उसके उद्देश्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति में इस प्रकार के वाद-विवाद और संवाद और उसके बाद निष्कर्षो के संचार की एक अच्छी परम्परा थी। जनसाधारण के संस्कारों में भी ये बातें आती थीं। राज्यपाल ने कहा कि नागरिकों के वैचारिक सशक्तिकरण के लिए भी इस तरह के व्याख्यान माला की महत्वूपर्ण भूमिका हो सकती है। श्री दत्त ने कहा कि आधुनिक पश्चिमी समाज इसलिए तेजी से विकसित हुआ क्योंकि वहां के लोगों ने अपनी समस्याओं को पहचान कर उन्हें परिभाषित करते हुए उनके निराकरण के लिए विचार-विमर्श के माध्यम से पहल शुरू की। श्री दत्त ने सुझाव दिया कि व्याख्यान माला में सभी लोगों को परस्पर चर्चा-परिचर्चा का अधिक से अधिक अवसर मिलना चाहिए। श्री दत्त ने उम्मीद जतायी कि विभिन्न सम-सामयिक विषयों पर नागरिकों के बीच इस आयोजन का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने व्याख्यान माला की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संविधान इस मायने में दुनिया का सबसे अनोखा और महत्वपूर्ण संविधान है, जिसमें चुनाव प्रणाली के जरिए ग्राम पंचायतों से लेकर विधानसभा और संसद तक लगभग बत्तीस लाख जनप्रतिनिधि आम जनता के द्वारा निर्वाचित होकर शासन की बागडोर सम्हालते हैं। यह हमारे देश और हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देश में तो राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना में दस-ग्यारह माह का लम्बा समय लग जाता है, जबकि हमारे यहां चुनाव परिणाम तत्काल घोषित होते हैं और चुनाव के बाद निर्वाचित जन-प्रतिनिधि शासन में आकर जनता की बेहतरी के लिए काम-काज करने लगते हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान काफी सुदृढ़ है। यह हमेशा कायम रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के दस वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और हम सब विकास के दशक में आ गए हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ में हमारी छत्तीस महान विभूतियों पर केन्द्रित व्याख्यान माला की शुरूआत की जा रही है, जिसमें विभिन्न विषयों और विभिन्न कार्य क्षेत्रों से देश के प्रसिध्द लोगों को क्रमश: आमंत्रित कर उनके व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे, ताकि हमारी नयी पीढ़ी भी उनके विचारों से लाभान्वित हो सके। यथासंभव माह में एक बार व्याख्यान का आयोजन होगा।
जनसम्पर्क विभाग के प्रमुख सचिव श्री एन. बैजेन्द्र कुमार ने स्वागत भाषण में व्याख्यान माला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन छत्तीसगढ़ संस्कृति फाउण्डेशन के प्रमुख श्री कनक तिवारी ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में प्रबुध्द नागरिक, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

