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बेहतर कल और उद्देश्यपूर्ण जिन्दगी के लिए तैयार करता है शिक्षा : श्री दत्त

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When Dec 07, 2011
from 08:00 PM to 08:00 PM
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'भारत में उच्च शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियां विषय पर सेमीनार

रायपुर, 7 दिसंबर 2011
4021-07.12.11

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, बंगलरू तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के शिक्षक शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आज 'भारत में उच्च शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियां' विषय पर एक सेमीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सेमीनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री शेखर दत्त ने कहा कि मनुष्य ने जीवन के सबसे प्रारंभिक दौर जैसे आखेटक तथा संग्रहणकर्ता के पहले से ही अपने 'कल' को 'आज' से अच्छा बनाने का प्रयास किया था। अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने तथा विकास करने का प्रश्न उसके जेहन में हमेशा से रहा है। पूरे जगत में केवल मनुष्य ही एकमात्र तार्किक एवं विश्लेषक प्राणी है और शिक्षा ही एक ऐसा महत्वपूर्ण आधार है जो मनुष्य को बेहतर कल, अच्छे जीवन और उद्देश्यपूर्ण जिन्दगी के लिए तैयार करता है।
    राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि आजादी के पहले से ही भारत के प्रबुध्द नागरिकों ने देश के विकास तथा औद्योगिकरण को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और शिक्षा के महत्व को समझ लिया था। इसी कारण आजादी के बाद देश में सीमित संसाधनों के बावजूद भी आई.आई.टी., आई.आई.एम. तथा केंद्रीय साइंस शिक्षण संस्थान आदि अनेक वैज्ञानिक तथा शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की गई। इनके बनने के कुछ दशकों के भीतर ही यहां से निकले वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों तथा प्रबंधकों ने एक ऐसे जनशक्ति का निर्माण किया, जिन्होंने देश के साथ विश्व के अनेक देशों में अपनी उत्कृष्टता साबित की और देश का मनोबल बढ़ाया। 1990 के दशक में इसी कारण भारत को विकास के नये रफ्तार (गेयर) मे लाया जाना संभव हुआ।
    राज्यपाल ने कहा कि हमें अपने देश और राज्य के विकास के लिए यहां के संसाधनों के समुचित दोहन के लिए यहां के युवाओ के कौशल, तकनीक और कौशल को बढ़ाना होगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देश से लौह अयस्क निर्यात किया जाता है। अगर इससे यहीं, स्टील तथा अन्य उत्पाद बने तो उससे विकास के नये अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। श्री दत्त ने यह भी कहा कि हमारे पास शैक्षणिक संस्थाओं की बिल्डिंग के रूप में बड़ी अधोसंरचानाएं मौजूद है, इनका कई शिप्टों में उपयोग होना चाहिए। इससे अधिक से अधिक लोगों को शिक्षा, प्रशिक्षण तथा कौशल प्रदान करना संभव हो सकेगा।
    पंडिल रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस.के. पाण्डेय ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, गुणवत्तायुक्त शिक्षण संस्थाओं का अभाव, आधारभूत संरचनाओं की कमी जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या केवल सामान्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं वरन अभियांत्रिकी, वाणिज्य, प्रबंधन, मेडिकल जैसें क्षेत्रों में भी मौजूद है। उन्होंने छात्रों को बेसिक साइंस सहित अन्य संकायों की शिक्षा के अध्ययन-अध्यापन पर जोर देते हुए कहा कि प्राथमिक, माध्यमिक, हायर सेकेण्डरी जैसी स्कूली शिक्षा एवं अन्य शिक्षा के पाठयक्रमों में समन्वय उनकी गुणवत्ता एवं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में र4021A-07.12.11खकर तैयार किया जाना चाहिए। कुलपति डॉ. पाण्डेय ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिये प्रसार-प्रचार के साथ इसमें पर्याप्त संख्या में इस्ट्टीयूशन स्थापित किया जाना चाहिए।
    कार्यक्रम में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सी.ई.ओ. श्री दिलीप राजेंकर ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उपस्थित वर्तमान चुनौतियों को समाज में व्याप्त असमानता, समाजिक न्याय एवं एक दूसरों को केयर करने से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक शक्तिशाली वाहन है, जो समाज में व्यापक बदलाव लाता है और इसके लिए हमारे देश के संविधान में व्यवस्था की गई है। इन व्यवस्थाओं के तहत शिक्षा खसतौर पर उच्च शिक्षा के विकास के लिए पूरी प्रतिबध्दता के साथ काम करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद समस्याओं के कारण विश्व की दूसरी बड़ी आबादी वाला देश होने के बाद भी विश्व के जी.डी.पी. में बहुत कम योगदान है। उन्होंने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण मूल्यांकन एवं मूल्यांकन पध्दति में मौलिक परिवर्तन पर बल दिया।
    इस अवसर अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अनुराग बेहार ने भारत में उच्च शिक्षा के चुनौतियों के संबंध मे क्राईसेस ऑफ वोकेलाईजेशन, क्राईसेस ऑफ इंटर कनेक्टीविटी, क्राईसेस ऑफ चेनलेस एजुकेशन एवं क्राईसेस ऑफ प्राफ्टेबल इंस्ट्टीयूशन को रेखांकित किया और कहा कि हमारा ध्यान बेसिक शिक्षण एवं विशेषज्ञों को तैयार करने पर होना चाहिए। इसके अलावा शिक्षण प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं निरंतर अभ्यास के साथ-साथ आंतरिक मूल्यांकन पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञानार्जन, समाज का पुर्नउत्थान और विकास तथा मानव समाज को उंचाईओं के शिखर पर ले जाना हो चाहिए। इस अवसर पर आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.टी. दाबके, कुशाभाउ ठाकरे, पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी, प्राध्यापकगण विभिन्न शिक्षा महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं शिक्षकछात्र उपस्थित थे।

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