सिन्धी समाज ने बहादुरी और मेहनत से कठिनाईयों का सामना किया-श्री शेखर दत्त
संत बाबा गेलाराम साहब जी की प्रतिमा काप्राण-प्रतिष्ठा समारोह
रायपुर, 9 दिसंबर 2011
राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने आज यहां रायपुर के देवपुरी में गोदड़ीवाला संत बाबा हरदास राम सेवा मण्डल ब्रम्हस्वरूप संत बाबा गेलाराम ट्रस्ट द्वारा आयोजित ब्रम्हस्वरूप संत शिरोमणि सत्गुरू शहंशाह बाबा गेलाराम साहब जी की प्रतिमा के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए। राज्यपाल श्री दत्त ने इस अवसर पर संत बाबा गेलाराम साहब जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री दत्त ने कहा कि मुझे गोदड़ीवाला धाम आकर अपार संतोष और सुखद शान्ति मिल रही है। 'फकीर संत' के रूप में पहचाने जाने वाले संत शिरोमणि बाबा गेलाराम जी की आज तीसरी बरसी है। ऐसे समय उनकी प्रतिमा का अनावरण एवं प्राण प्रतिष्ठा स्थापित करना उनके प्रति हमारी श्रध्दा और विश्वास को व्यक्त करता है। आज यहां जो अपार श्रध्दालुजन उपस्थित हैं वह इस बात को इंगित करता है कि आप सभी का कितना अधिक विश्वास, आस्था और श्रध्दा संत बाबा गेलाराम जी के प्रति है। यह भावना हमारे अध्यात्मिक रूझान और सेवा की भावना को भी दर्शाता है और मैं समाज की जनसमूह की इन भावनाओं का अभिनंदन करता हूं।
श्री दत्त ने कहा कि मेरे जीवन का स्वर्णिम अध्याय 1971 के पाकिस्तान के युध्द के बाद का रहा है जब हमने पाकिस्तान के दो जिलों को अपने अधिकार पर ले लिया था। उन्होंने कहा कि आजादी के समय हुए विभाजन में सिन्ध समाज के लोगों को अपार दिक्कतों और कठिनाईयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इन मुश्किलों जिस बहादुरी और मेहनत से सामना किया, वह देश के लिए एक उदाहरण की तरह है। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रगान में पंजाब, सिन्ध, गुजरात, मराठा का उल्लेख है। भारत भी उनका अपना देश है। उन्होंने देश में रचनात्मक, आध्यात्मिक और विकास का कार्य किया है। श्री दत्त ने कहा कि सिन्धी साहित्य और भाषा का भी प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम को विधायक श्रीमती रेणु जोगी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर शदाणी दरबार के संत युधिष्ठिर लाल ने संत बाबा गेलाराम जी की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए सर्वसंगत का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा आजादी के समय देश के विभाजन के बाद लगभग हर प्रान्त में सिन्धी भाई-बन्धु बसे और उन्होंने यहां अनेक बनाकर धार्मिक कार्य किया तथा सेवा का कार्य किया। उन्होंने कहा कि हमारे संस्कार में गुरूओं को भगवान जैसा सम्मान दिया जाता है और इन गुरूओं ने हमें प्रेम से रहने तथा ईश्वर से सेवा करने की सीख दी है। इस अवसर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री लीलाराम भोजवानी, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री श्रीचंद सुंदरानी सहित संतगण, सेवाधारी और बड़ी संख्या में श्रध्दालुजन उपस्थित थे।

