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अर्थव्यवस्था की धुरी हैं 'किसान'-श्री शेखर दत्त

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'सहकारिता से कृषि विकास : संदर्भ छत्तीसगढ़' राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

रायपुर, 10 दिसंबर 2011

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला 'सहकारिता से कृषि विकास : संदर्भ छत्तीसगढ़' का शुभारंभ किया। इस संगोष्ठी का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ मर्यादित रायपुर, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ नई दिल्ली तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि पूरी अर्थव्यवस्था विशेषकर छत्तीसगढ़ राज्य की धुरी 'किसान' हैं। प्रदेश के लगभग 50 लाख परिवारों में लगभग 38 लाख कृषक परिवार के हैं। इस तरह करीब तीन चौथाई परिवार जमीन और कृषि के माध्यम से जीवन-यापन करते हैं और हमारा सबसे प्रमुख उद्देश्य है कि किस प्रकार इनकी आमदनी ज्यादा से ज्यादा बढ़े साथ ही उनकी क्रय शक्ति एवं उपभोग करने का सामर्थ्य भी बढ़े।
    श्री दत्त ने आगे कहा कि अगर देखा जाय तो किसानों की देखभाल करने और उन्हें आगे बढ़ाने वाले विभाग तथा संस्थाएं बहुत बड़ी संख्या में हैं जैसे कृषि विभाग, पशुपालन, कुक्कुट, उद्यानिकी, सिंचाई, विकासखंड, विभिन्न मंत्रालय एवं विभाग, वैज्ञानिक और हाल में प्रारंभ खाद्य प्रसंस्करण आदि, इन सभी को एक माला की तरह पिरोते हुए उनमें सामंजस्य बढ़ाया जाना चाहिए जिससे किसानों की आमदनी बढ़े और उनमें खुशहाली आये तभी शांतिपूर्ण विकास को गति मिलेगी। उन्होंने इन विभागों के अधिकारियों और संबंधित लोगों का आव्हान किया कि उनके कार्यों के केंद्र में 'किसान' रहे जिससे किसानों की 'आज' की आमदनी 'कल' से ज्यादा हो तथा आने वाले 'कल' की आमदनी 'वर्तमान' से ज्यादा हो। राज्यपाल ने कहा कि इसके लिए हमें केवल उत्पादकता बढ़ाने पर ही बल नहीं देना बल्कि उसके साथ-साथ उत्पादों की मार्केटिंग सुदृढ़ करने तथा खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से उत्पादों के वेल्यू एड करते हुए उसके अन्य उत्पाद बनाये जाने चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि दूग्ध एक ऐसा उत्पाद है जिसे चार घंटे से ज्यादा सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, इसके लिए कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग प्लांट तथा इनके संचालन के लिए प्रोफेशनल लोगों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएं डेयरी फेडरेशन तथा आईल फेडरेशन आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सहकारिता की भूमिका उत्पाद के पहले ही नहीं बल्कि उत्पादों के मार्केटिंग तथा प्रोसेसिंग के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अमूल हमारे सामने एक अच्छा उदाहरण है जिसने सहकारिता के माध्यम से गांव-गांव में किसानों को लाभ पहुंचाया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी कृषि से जुड़े ऐसी सोसायटी बनायी जानी चाहिए, जो न केवल किसानों के मार्केटिंग की जरूरतों को पूरा करे बल्कि कृषि के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दे तथा उनके क्रॉप और फॉर्म (फसल और खेत) की प्लानिंग भी करे। उन्होंने कहा कि खेत और प्रयोगशाला के संबंध को और भी अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ इस बात से समृध्द राज्य है कि यहां सूर्य की रोशनी के साथ-साथ बरसात भी पर्याप्त संख्या में होती है और इसके बावजूद हम अपने खेतों में तीन फसल नहीं ले पा रहे हैं यह चिंता और विचार का विषय है। उन्होंने खेती को बढ़ावा देने के लिए पड़त भूमि और खेतों के मेढ़ पर फसल लेने तथा सहकारिता के माध्यम से संगठित खेती करने पर जोर दिया।  
    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सहकारिता मंत्री श्री ननकीराम कंवर ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहकारिता के आधार पर देश के लिए एक उदाहरण बन रहा है। हाल ही में सहकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वाले अधिकारियों और किसानों के लिए प्रशिक्षण की भी शुरूआत की गई है जिससे वे अब अधिक दक्षतापूर्वक कार्यों को कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पहले कृषि और सहकारिता एक ही विभाग था और आज भी इस बात की जरूरत है कि इन दोनों विभागों तथा उनके अधिकारियों के बीच बेहतर सामंजस्य रहे। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात के हर गांव में सोसायटी है और इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ के हर गांव में सोसायटी चाहिए तथा गांवों के गरीब से गरीब घरों में भी गाय-भैंस होनी चाहिए। श्री कंवर ने इस बात पर चर्चा करने तथा चिंतन करने का आव्हान किया कि किस तरह सामूहिक खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने सहकारिता की शुरूआत करते हुए बुनकर संघ की स्थापना की थी। इसी तरह पंडित वामनराव लाखे ने केन्द्रीय सहकारी बैंक की स्थापना की। उन्होंने वर्ष 2012 को एक महत्वपूर्ण वर्ष बताते हुए कहा कि इसे अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और यह वर्ष सहकारिता की दृष्टि से परिवर्तनकारी वर्ष हो सकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में सहकारी संस्थाओं के माध्यम से केवल तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दिया जाता है। पहले जहां केवल 350 करोड़ रूपए के ऋण वितरित किए जाते थे अब यह ऋण राशि बढ़कर एक हजार 300 करोड़ रूपए हो रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई की समस्या का समाधान कृषि के विकास से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में मोहम्मद युनूस ने जिस तरह माइक्रोफाइनेंस के माध्यम से गरीबों और किसानों को जोड़ा उसी तरह छत्तीसगढ़ में इसे किस तरह किया जा सकता है, इस पर भी चिंतन किया जाना चाहिए।    कार्यक्रम के प्रारंभ में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति श्री एस.के. पाटिल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 50 प्रतिशत सीमांत तथा 25 प्रतिशत लघु कृषक हैं जिनके जोत का औसत आकार एक-दो एकड़ है। यह जोत आने वाले समय में और घटता जाएगा। इस दृष्टि से न वे उन्नत मशीन खरीद सकेंगे और न ही उनका सही उपयोग कर सकेंगे, पशुपालन में भी उन्हें कठिनाई आएगी। ऐसे में जरूरी है इन किसानों को सहकारिता के माध्यम से जोड़कर कृषि, उद्यानिकी तथा पशुपालन आदि को बढ़ावा दिया जाए।
    इसके पहले भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ नई दिल्ली के उपाध्यक्ष श्री घनश्याम भाई अमीन ने कहा कि छोटे एवं मध्यम वर्गीय किसानों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का कार्य करता है। महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांव में सहकारी समिति बनाकर गांव की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि गुजरात के शत्-प्रतिशत गांवों में सहकारी समितियां है। नाबार्ड द्वारा दिए जा रहे ऋण से यह संभव हो गया है कि किसानों को 5, 4 और 3 प्रतिशत की कम ब्याज दर पर ऋण दिया जा सके। उन्होंने कहा कि सहकारिता हरित क्रान्ति का आधार बनी है, इसके माध्यम से उत्पादन बढ़ा है तथा साहूकारों का शोषण खत्म हुआ है।
    छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ मर्यादित रायपुर के अध्यक्ष श्री लखन लाल साहू ने कहा कि विकास की कड़ी को आगे बढ़ाने में कृषि एवं सहकारिता मिलकर साथ-साथ काम कर रहे हैं। परिवहन, सिंचाई और श्रम ऐसे क्षेत्र है जहां सहकारिता के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री दत्त ने श्री लखन लाल साहू द्वारा लिखित पुस्तक 'पानी कितना अनमोल' का विमोचन किया। उन्होंने 'प्रारंभिक कृषि और उद्यानिकी अर्थशास्त्र' का विमोचन भी किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक, कृषि एवं सहकारिता विभाग से जुड़े हुए लोग तथा किसान उपस्थित थे।


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