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महिला सशक्तिकरण को स्थापित करने की जरूरत - श्री शेखर दत्त

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When Mar 08, 2010
from 08:40 PM to 08:40 PM
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महिला प्रताड़ना एवं हिंसा के विरूध्द ठोस कार्यवाही पर बल दिया राज्यपाल ने

''स्त्री शक्ति सम्मान समारोह'' सम्पन्न

रायपुर, 8 मार्च 2010

4317-1-080310

           अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त आज रायपुर स्थित रविन्द्र मंच कालीबाड़ी में लक्ष्मी महिला नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित रायपुर एवं सूर्या सामाजिक जनकल्याण् समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ''स्त्री शक्ति सम्मान समारोह'' में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री दत्त ने कहा कि हमारे देश में महिलाओं को सदैव सम्मान देने की परम्परा रही है। हमें यह समझना होगा कि महिला सशक्तिकरण क्यों आवश्यक है और इसे पूर्ण रूप से स्थापित करने के लिए कारगर प्रयास करने की जरूरत है। सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करने वाली 'नारी' इस सृष्टि की सर्वोत्ताम कृति है, जिसमें क्षमा, प्रेम, करूणा एवं ममता सहित अनेक गुण समाहित है। समाज की सर्वाधिक महत्वपूर्ण इकाई होने के बावजूद स्त्रियों को रूढ़िगत एवं परम्परावादी समाज द्वारा कई जरूरी अधिकार प्रदान नहीं किये गये थे, जिससे उनके व्यक्तिगत विकास में बाधाएं खड़ी हुई और उनका विकास अवरूद्व हुआ। हालांकि संवैधानिक दृष्टि से महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक अधिकार दिये गये हैं और उनके फायदे भी उन्हें मिले हैं, तथापि महिलाओं के प्रति सामाजिक सोच एवं दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने के लिये विशेष प्रयास किये जाने की जरूरत है।
4317-2-080310
    राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने कहा कि वर्तमान के वैधानिक सामाजिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों ने महिलाओं को अपनी दहलीज लांघने पर मजबूर किया है। निश्चय ही यह स्थिति सामाजिक समानता की भावना को मजबूत करता है। अब वे अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक हो रही हैं। श्री दत्त ने कहा कि शिक्षा के प्रसार-प्रचार एवं संचार माध्यमों ने स्त्रियों को अधिकार की महत्ताा समझाई।र् कत्ताव्यों का ज्ञान तो उन्हें प्रकृति प्रदत्ता है। महिलाएँ आज उन सभी कार्यो को बड़ी सफलतापूर्वक कर रही हैं जिन पर कभी पुरूषों का प्रभुत्व एवं एकछत्र अधिकार समझा जाता था। भारतीय सेना, पायलट एवं रेल्वे ड्रायवर जैसे पदों पर महिलाओं की भर्ती नहीं की जाती थी, किन्तु अब परिस्थिति बदल रही है। आज की महिलाएँ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी काबिलियत का परचम लहरा रही हैं।
       राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिये सबसे पहला और महत्वपूर्ण प्रयास जागरूकता एवं साक्षरता है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना अत्यन्त आवष्यक है। छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने अपने आप को स्वसहायता समूहों के माध्यम से एक दूसरे को जोड़कर आर्थिक रूप से सक्षम होने का सार्थक प्रयास किया है। इससे महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण का रचनात्मक पहलू उभर कर सामने आया है। श्री शेखर दत्त ने कहा कि वर्तमान में महिलाओं के खिलाफ शारीरिक एवं मानसिक हिंसा तथा प्रताड़ना के प्रकरणों में वृध्दि इस बात के संकेत हैं कि अब भी सामाजिक सोच में ठोस परिवर्तन लाने की जरूरत है। जहां कानूनी एवं संवैधानिक व्यवस्था अपने स्थान पर सही है, वहीं इन्हें दृढ़ता के साथ अमल में लाने की भी आवष्यकता है। यह भी जरूरी है कि महिलाएं अपने खिलाफ होने वाली हिंसा का मुखर होकर विरोध करें।
            उन्होंने कहा कि महिलाएं शुरू से ही हमारे समाज में पूजनीय रही हैं इसलिए उनके प्रति उच्च भावनाओं को हृदय में संजोए रखना जरूरी है। शिष्टता और मर्यादा सामाजिक नियंत्रण के अनौपचारिक साधन माने जाते हैं। इनसे ज्यादा कारगर कोई साधन नहीं हो सकता। राज्यपाल ने कहा कि आज षिक्षा ने महिलाओं के विकास के लिए अनन्त आकाष उपलब्ध कराया है, जहाँ वे अपने निर्धारित लक्ष्यों एवं सपनों को पाने के लिए उड़ान भर सकती हैं। इसके लिए समाज के हर वर्ग में नई सोच एवं नवीन दृष्टिकोण बनाने की जरूरत है। ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जहां महिलाओं के सार्थक विकास के मार्ग में कोई रूढ़ि या परम्परा रूकावट न डाले। देष के शहरी क्षेत्रों में षिक्षा के व्यापक प्रचार-प्रसार के फलस्वरूप महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन परिलक्षित तो हो रहा है, लेकिन दूरदराज के ग्रामीण अंचलों में महिलाओं की स्थिति में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आया है। वे आज भी अपने अधिकारों के प्रति सचेत एवं सजग नहीं है। उनमें जागरूकता का अभाव है। हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को शासन द्वारा किये जा रहे प्रयासों का पूरा-पूरा लाभ मिले, उनके हितों के लिए बनाये गये नियम-कानूनों की जानकारी हो और वे सजग होकर उससे लाभान्वित हो, तभी अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाये जाने की सार्थकता सिध्द होगी।
        इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह ने कहा कि महिलाएँ माँ, बेटी, बहन, पत्नी के रूप में परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाती है। महिलाएँ पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश और प्रदेश के विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएँ गरिमा के साथ ऐसे ही कार्य करते रहें और अपने मान-सम्मान में कमी ना आने दें।
         इस अवसर पर समिति की संस्थापक श्रीमती सत्यबाला अग्रवाल ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि समिति महिलाओं में जागृति लाने के लिये प्रयासरत है ताकि वे अपने अधिकारों को समझें तथा संगठित, आत्मनिर्भर व शिक्षित बने। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ किसी भी मामले में कम नही है और महिलाओं के विकास के लिए सभी को आगे आना होगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री रिजवान सम्मिलित थे। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए 'स्त्री शक्ति सम्मान' से श्रीमती वीणा सिंह, महापौर श्रीमती किरणमयी नायक, श्रीमती सुषमा अवधिया, श्रीमती आरती अग्रवाल, श्रीमती कमलादेवी नेताम, रेखा दत्त जोशी, प्रभादत्त जोशी, रमादत्त जोशी (जोशी बहनें), रेखा गोरे, मेंहदी यादव को सम्मानित किया गया। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी प्रशंसनीय कार्य हेतु संस्थाओं एवं महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
क्रमांक/ 4317 /सांडिया/उषाकिरण




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