मैनपाट शांति एवं सौंदर्य का प्रतीक : राज्यपाल
रायपुर 30 अप्रैल 2011

छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल श्री शेखर दत्त शनिवार को सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखण्ड अन्तर्गत कमलेश्वरपुर ग्राम पहुँचे। राज्यपाल द्वारा बौध्द मंदिर के दर्शन उपरान्त मंदिर प्रांगण में तिब्बती शरणार्थियों द्वारा आयोजित सभा को सम्बोधित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैनपाट का प्राकृतिक सौन्दर्य अनुपम है तथा बौध्द धर्मावलम्बियों के धार्मिक सहिष्णुता के कारण शांति का अनुभव होता है। राज्यपाल ने कहा कि भारत में सभी धर्मावलम्बियों को अपने धर्म को मानने की पूरी स्वतंत्रता है तथा विभिन्न धर्मावलम्बियों द्वारा अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्य रखने की दृष्टि से धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने तिब्बती शरणार्थियों द्वारा बौध्द धर्म की धार्मिक मान्यता एवं परम्परा को कायम रखने पर मैनपाट की धार्मिक सोसायटी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बौध्द धर्मावलम्बी बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखकर कहा कि बौध्द समाज के द्वारा धर्म के प्रति निष्ठा और आस्था से मुझे पूरा विश्वास है कि इस क्षेत्र में शांति एवं सौहार्द का वातावरण सदैव कायम रहेगा। राज्यपाल ने बताया कि 25 वर्ष पहले वे मैनपाट का भ्रमण कर चुके हैं। तिब्बती शरणार्थियों द्वारा महामहिम राज्यपाल को बौध्द प्रतिमा एवं थंगा तथा कारपेट भेंट किया गया।
इस अवसर पर मैनपाट तिब्बती सेटलमेंन्ट के फेंदेलिन कैम्प के मुखिया श्री तसुरी डेचेन चोखोलिंग ने महामहिम राज्यपाल के मैनपाट आगमन पर हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि तिब्बतियों को भारत सरकार द्वारा शरण दिये जाने पर वे शासन के प्रति बेहद आभारी हैं। उन्होंने कहा कि विगत 50 वर्षों से उनका समुदाय यहां के स्थानीय लोगों से समन्वय स्थापित कर शांतिपूर्वक जीवन निर्वहन कर रहा है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा तिब्बती शरणार्थियों एवं उनके बच्चों हेतु विद्यालय एवं अस्पताल सहित समस्त मूल-भूत सुविधाएं उपलब्ध करायी गई हैं। श्री तसुरी द्वारा मैनपाट में आवागमन हेतु बेहतर सड़क सुविधा एवं पानी की उपलब्धता हेतु बांध निर्माण की मांग की गई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अल्प तथा अतिवृष्टि के कारण कुछ तिब्बती शरणार्थी परिवारों की आर्थिक स्थिति अत्यन्त खराब हो जाती है, जिसके कारण उन्हें जीवन निर्वहन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने शासन से स्थानीय लोगों की भांति गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापनरत शरणार्थी परिवारों को भी शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाये जाने का आग्रह किया। इस अवसर पर मैनपाट के मल्टीपरपज को-ऑपरेटिव्ह सोसायटी के अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा शरणार्थियों की ओर से शासन के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में तिब्बती बच्चों द्वारा सेवथुम्बा, शेर, छुसुंगमेरिक एवं याक नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर सरगुजा के वरिष्ठ अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में बौध्द धर्मावलम्बी उपस्थित थे।

