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स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह सम्पन्न

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When May 01, 2011
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तकनीकी और प्रौद्योगिकी पक्ष को और मजबूत बनाया जाये-राज्यपाल

आगे बढ़ने के लिए मेहनत जरूरी-मुख्यमंत्री डॉ. सिंह

रायपुर 30 अप्रैल 2011

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छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में कल 31 छात्र-छात्राओं को एवं 08 पी.एच.डी. के विद्यार्थियों को उपाधि एवं मेडल  व प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। समारोह में डा. वी.के. सारस्वत, सचिव डी.आर.डी.ओ. भारत शासन, प्रदेश के राज्यपाल श्री शेखर दत्त, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, कुलपति डॉ. बी.सी. मल्ल ने वर्ष 2009-10 की परीक्षाओं में प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को उक्त उपाधि मेडल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
    जिला मुख्यालय दुर्ग स्थित बी.आई.टी. के सभाकक्ष में कल राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने तकनीकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी विश्वविद्यालय और वहां के विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व का होता है। इस दिन से उपाधि ग्रहण करने वाले युवाओं के जीवन में एक नया अध्याय आरंभ होता है। उन्होंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण आज पूरा किया है और यह समय संतुष्टि और उल्लास व्यक्त करने का है। आज के दौर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सबसे अधिक मांग है। इसी तरह गरीब युवाओं को किफायती फीस पर गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने की जरूरत है। इसी तरह हमारे राज्य के अनेक जिले अभी ऐसे हैं जहां इंजीनियरिंग सम्बंधी तकनीकी संस्थाएं नही है। इन क्षेत्रों में स्तरीय शैक्षणिक संस्थाएं की जरूरत है लेकिन हमारी दृष्टि केवल तकनीकी संस्थाओं  को बढाने की नही होनी चाहिए। मुख्य जोर उनकी गुणवत्ता को बढ़ाने पर होना चाहिए। अगर आज पूरे विश्व में आई.आई.टी. और बाई.आई.एम. का नाम है तो उसका श्रेय उनकी गुणवत्ता को बनाये रखने को दिया जाता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के समय से ही उनकी गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर जोर देता रहा है। 

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राज्यपाल ने कहा कि देश को मजबूत, सशक्त और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए यह जरूरी है कि इससे  तकनीकी और प्रोद्योगिकी पक्ष को और मजबूत बनाया जाये। इसके लिए संख्या और गुणात्मक दोनो दृष्टि से कुशल और मानव संसाधन की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि देश में आज जो तेज गति से तकनीकी परिवर्तन हो रहा है उसमें तकनीकी संस्थाओं, वैज्ञानिकों और तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं का विशेष योगदान है। उन्होंने कहा कि हमारा देश युवाओं का देश है और यहां दक्ष एवं प्रतिभावान मानवीय संसाधन तैयार करने की अपार क्षमताएं हैं। देश के युवा स्वदेश के साथ-साथ विश्वभर में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के युवाओं में अपार क्षमताएं एवं संभावनाएं बताते हुए कहा कि कैट सहित अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में राज्य के युवाओं ने जो प्रदर्शन किया है उससे यहां की प्रतिभा सबके सामने आई है। उन्होने विश्वविद्यालय से आग्रह किया है कि वे विद्यार्थियों में तकनीकी विज्ञान सहित जिज्ञासुता, रचनात्मकता, उद्यमिता और नैतिक मूल्यों का समावेश करें जिससे वो इस देश को योग्य नेतृत्व दे सके।
    दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि  पद्मश्री डा. वी.के. सारस्वत, सचिव डी.आर.डी.ओ. भारत शासन  ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय उस महान संत के नाम से जुड़ा हुआ है जो पूरे दुनिया के लिए आदर्श है। उन्होंने कहा छात्र-छात्राओं से कहा कि कि पिछले पांच वर्षों में आपने विश्वविद्यालय में जो उंचाईयों को छुआ है, वह अपने आप में एक पहचान हैं। इस विश्वविद्यालय ने बहुत कम समय में उंचाईयों को प्राप्त किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह विश्वविद्यालय होनहार विद्यार्थियों को हमारे देश के उज्जवल भविष्य के लिए उत्पन्न करता रहेगा।

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छ.ग. स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के अति विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह  ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आगे बढ़ने के लिए मेहनत जरूरी है, जो मेंहनत करता है वही आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तनशील विश्व में वही सफल एंव अस्तित्वान रह सकेगा जो परिवर्तनों का पूर्वाभ्यास कर उसके अनुसार अपने को ढालते हुए अवसरों का लाभ  ले सकेगा और जो ऐसा कर लेगा वही परितर्वन का नेतृत्व करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवर्तन की इस कड़ी में आज हिन्दुस्तान के बारे में दुनिया की सोच में बड़ा परिवर्तन हुआ है। यहां ब्रिटेन और वहां अमेरिका में यह अनुभव किया जाने लगा है कि उनकी नौकरियां और आजीविका उनसे छुटती जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीबी और अभावों वाले देश की पहचान वाला भारत आज अमेरिका एवं यूरोप के लिए चुनौती बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान विश्व सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा शासित हो रहा है। मेरी दृष्टि से सूचना प्रौद्योगिकी भारतीय मेघा है। भारतीय मेघा शक्ति अन्य देशों द्वारा पहले ही स्वीकार की जा चुकी है। भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था एवं शक्ति का पॉवर हाउस बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय विरासत में छिपा त्रुटिहीन ज्ञान अक्षुण्य एवं असीमित है। दुनिया को भारत ने विज्ञान क्या है बताया है। ऋषि संस्कृति के इस देश में लोगों में ज्ञान की जिज्ञासा हजारो साल से विद्यमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैदिक ज्ञान से वैज्ञानिक ज्ञान तक का भरपूर उपयोग हो। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 'वेद से वेब तक' ज्ञान यात्रा की ऊर्जा शक्तियां है। हम सब इस यात्रा के सहभागी बनें ताकि प्रदेश व देश का समुचित विकास हो। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने विश्वविद्यालय के नव दीक्षित स्नातकों को अपनी ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
    दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर निगम भिलाई की महापौर श्रीमती निर्मला यादव और नगर निगम दुर्ग के महापौर डॉ. एस. के. तमेर भी सम्मिलित हुए। दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में विश्वविद्यालय के कुलपति  प्रो. बी.सी. मल्ल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक गतिविधियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में कुल सचिव प्रो. भगवंत सिंह ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर नगर के गणमान्य नागरिक एवं तकनीकी विद्यालयों के प्राध्यापकगण एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

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