प्राकृतिक चिकित्सा को जनसामान्य तक पहुंचाने की जरूरत-श्री शेखर दत्त
अखिल भारतीय प्राकृतिक सम्मेलन का समापन
रायपुर, 9 जनवरी 2011
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त आज रायपुर के शहीद स्मारक भवन में अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद द्वारा आयोजित 31वें अखिल भारतीय प्राकृतिक सम्मेलन के समापन समारोह में शामिल हुए। अपने उद्बोधन में श्री दत्त ने कहा कि आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा हमारे देश की प्राचीन धरोहर है। ''सर्वे सन्तु निरामया'' की हमारी संस्कृति में अच्छे स्वास्थ्य के लिये हमारे पूर्वजों ने आयुर्वेद के साथ ही सभी प्राकृतिक अवयवों को चिन्हित कर लेखन के माध्यम से संकलित किया है। प्राकृतिक चिकित्सा पध्दति को 'खास' तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि इसे 'आम' तक पहुंचाने की जरूरत है।
राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि कि छत्तीसगढ़ 44 प्रतिशत वनाच्छादित प्रदेश है जहां हर किस्म के पौधे उपलब्ध हैं। तुलसी, नीम और पुदीना आदि गुणों की जानकारी सभी को है इसी तरह अनेक पौधों उनके बीजों, फूलों एवं छालों में भी महत्वपूर्ण गुण होते हैं। इनकी जानकारी जनसाधारण तक पहुंचाने की जरूरत है। हमारे पर्यावरण में बहुमूल्य औषधीय अवयव एवं पौधे मौजूद है। आवश्यकता इस बात की है कि हम इनकी पहचान कर संरक्षित कर सकें। सदियों से चले आ रहे इस परम्परागत ज्ञान को अक्षुण्य बनाये रखने के लिए केन्द्र शासन के विभागों द्वारा औषधी संबंधी जानकारी को संग्रहित कर उनका डिजीटलीकरण किया गया है। हमें अपने परम्परागत औषधीय ज्ञान एवं पौधों में पेटेन्ट हासिल करना होगा।
अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष श्री केयूर भूषण ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा जनसाधारण के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है। गांधीजी की मंशा के अनुरूप प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ जनसाधारण तक पहुंचे, इसके लिए परिषद की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के उपाध्यक्ष श्री अवधेश कुमार मिश्रा ने कहा कि महात्मा गांधी की कल्पना को साकार करने के लिए हमें प्राकृतिक चिकित्सा को गांव-गांव तक पहुंचाना होगा। अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीदास बघेल ने प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में आने वाली कठिनाइयों एवं समस्याओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर श्री बाबूलाल दोषी, पूर्व मंत्री श्री राधाकृष्ण मालवीय, पद्मश्री डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय, श्री भगवान चैपयावाला सहित देश के विभिन्न राज्यों से आये प्राकृतिक चिकित्सकगण उपस्थित थे। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को शॉल पहनाकर सम्मानित किया।

