विकास को गति देने मानव संसाधन का समुचित विकास जरूरी : राज्यपाल श्री शेखर दत्त
बस्तर एवं सरगुजा विश्वविद्यालय जुडेंगे ई-क्लास से - मुख्यमंत्री डॉ. सिंह
विश्वविद्यालय समन्वय समिति की बैठक सम्पन्न
रायपुर, 29 अप्रैल 2010

राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री
शेखर दत्त की अध्यक्षता में आज राजभवन में विश्वविद्यालय समन्वय समिति की
बैठक सम्पन्न हुई। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उच्च
शिक्षा मंत्री श्री हेमचंद यादव एवं कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू
उपस्थित थे।
अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्र, अभिभावक, शिक्षक, विश्वविद्यालय, शासन एवं जनसामान्य प्रमुख कारक होते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र, अध्ययन की समुचित सुविधा, पाठयक्रम का समय सीमा में पूर्ण होना, समय पर परीक्षा का संपादन, मूल्यांकन एवं परिणाम चाहता है, वहीं अभिभावक अपने बच्चे के लिए उच्च गुणवत्तावाली शिक्षा, शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक शैक्षणिक गतिविधियां एवं वातावरण् चाहता है, जिससे उसके बच्चे का उज्ज्वल भविष्य हो सके। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों की समस्याओं का भी त्वरित हल निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों द्वारा अपने मूलभूत संसाधनों के माध्यम से ऐसे पाठयक्रम तैयार किए जाने चाहिए जो वर्तमान परिवेश में छात्रों की आवश्यकता एवं मांग के अनुरूप हों। राज्यपाल ने कहा कि शासन द्वारा विश्वविद्यालयों के लिए समय-सीमा में मूलभूत संरचनाओं के विकास के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ मार्गदर्शी दिशा-निर्देश दिए जाते हैं जिनका पालन सुनिश्चित होना चाहिए।
बैठक में राज्यपाल ने कहा कि महाविद्यालयों में शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक पदों की प्रतिपूर्ति शत्-प्रतिशत सुनिश्चित होने के साथ मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में पर्याप्त शिक्षकों के अलावा विजिटिंग फैक्लटी, विशेषज्ञों के माध्यम से शिक्षण, पर्याप्त एवं उपयोगी पुस्तकें, इंटरनेट सेवाओं के साथ-साथ विश्वविद्यालयीन शिक्षकों के प्रशिक्षण, उन्मुखीकरण एवं रिफ्रेशर कोर्स भी आयोजित होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विजिटिंग फैक्लटी को अनुभवी बनाने हेतु सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं विषय विशेषज्ञों को 70 वर्ष की आयु तक संविदा में नियुक्ति दी जा सकती है। इसके अलावा छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए खेलकूद, नेतृत्व क्षमता एवं अतिरिक्त पाठयक्रम सहगामी गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता बतायी। श्री दत्त ने कहा कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय जैसे समान कार्यक्षेत्रों वाले विश्वविद्यालयों के लिए कार्यवाही की दिशा एवं प्रक्रिया में एकरूपता होने से अनेक विसंगतियों से छुटकारा पाया जा सकता है।
राज्यपाल ने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों की अकादमिक कलेण्डर का अनुपालन, निजी एवं शासकीय महाविद्यालयों का सतत् निरीक्षण, विश्वविद्यालय का अद्यतन वेबसाईट, समयबध्द परीक्षा कार्य एवं शोध कार्य की गुणवत्ता को बनाये रखना, विद्यार्थियों की समस्याओं का निराकरण, श्रेष्ठ विद्यार्थी, शिक्षक एवं कर्मचारियों को पुरस्कार, विद्यार्थियों के लिए कोचिंग सुविधा, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों के लिए विशेष कोचिंग व्यवस्था करने पर भी जोर दिया। श्री दत्त ने कहा कि राज्य के समुचित एवं तेज विकास के लिए पर्याप्त मानव संसाधनों का समुचित विकास जरूरी है और इसके लिए विश्वविद्यालयों द्वारा नवाचार के माध्यम से यह कार्य पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकाधिक उपयोग कर हम राज्य एवं देश के विकास के लिए बेहतर और उपयोगी मानव संसाधन तैयार कर सकते हैं।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि तकनीकी विश्वविद्यालय में परीक्षा के समय एवं अकादमिक कैलेण्डर पालन किये जाने की सख्त आवश्यकता है ताकि छात्रगण विश्वविद्यालयीन परीक्षा के साथ-साथ अन्य प्रतियोगी परीक्षा में सम्मिलित हो सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर एवं सरगुजा विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की मदद से अपने संकायों को बेहतर प्रशिक्षण दिला सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के उत्तर-पूर्व के विश्वविद्यालय अलग-अलग विषयों खासकर वहां की संस्कृति एवं जनजातीय लोगों के जीवन से संबध्द विषयों पर शोध कार्य करते हैं। हमारे राज्य के बस्तर एवं सरगुजा के विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ की गौरवशाली आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, सभ्यता एवं संस्कृति पर बेहतर शोध कार्य कर सकते हैं और छात्रों को इन नये विषयों पर शोध करने के लिए प्रेरित भी किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ का इतिहास बहुत पुराना है और इसके बहुत से ऐसे पहलू हैं, जो अनछुए हैं और इसके लिए हमें केवल जमीन के ऊपर ही नहीं बल्कि जमीन के नीचे जाकर भी शोध कार्य कर जानकारी हासिल करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा एवं संस्कृति से जुड़े विषयों पर हमारे विश्वविद्यालय बेहतर शोध कार्य करेंगे।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ एवं आदिवासी अंचल में स्थित नये विश्वविद्यालयों की भूमिका अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है। इन क्षेत्रोें में स्थित महाविद्यालयों के छात्रों को बेहतर एवं उच्च गुण्ावत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए शासन प्रतिबध्द है। उन्होंने कहा कि बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्र के महाविद्यालयों को नेटवर्किंग कनेक्टिविटी (ई-क्लासेस) के माध्यम से अच्छे शिक्षकों एवं विषय विशेषज्ञों के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है। आगामी सत्र में यह सुविधा इन क्षेत्रों में उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरगुजा एवं बस्तर के विश्वविद्यालय विषय, पाठयक्रम एवं समय तय करें ताकि आगामी जुलाई सत्र से हम यह व्यवस्था शुरू कर सकें। उन्होंने इसके लिए महाविद्यालयों को चिन्हांकित करने हेतु कुलपतियों को निर्देश दिया।
समन्वय समिति की बैठक में पूर्व बैठकों के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा हुई। बैठक में शैक्षणिक सत्र 2010-2011 के लिए अकादमिक कैलेण्डर का अनुमोदन, राज्य के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों में शैक्षण्0श्निाक सत्र 2010-2011 में नामांकन प्रणाली द्वारा छात्रसंघ का गठन का अनुमोदन किया गया। इसके अलावा पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा एन क्रीमोनोलॉजी एण्ड फोंरेसिक साईंस में संशोधन एवं बैचलर ऑफ फार्मेसी में संशोधन, चार वर्षीय उपाधि पाठयक्रम को आठ सेमेस्टर के पाठयक्रम में किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन, मास्टर ऑफ आर्ट्स पर एप्लायड फिलोसॉफी इन योगा में संशोधन, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में नवीन पाठयक्रम एम.एस.डब्ल्यू, लागू करने एवं पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन थ्री-डी एनीमुवीज (एनीमेशन) लागू करने के प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया। इस अवसर पर प्रो. एस. जोशी, कुलपति, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, डॉ. एस.के. पाण्डे, कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, प्रो. गीता पेंटल, कुलपति इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, प्रो. जय लक्ष्मी ठाकुर, कुलपति बस्तर विश्वविद्यालय जगदलपुर, डॉ. एस.के. वर्मा, कुलपति सरगुजा विश्वविद्यालय अंबिकापुर, डॉ. एम.पी. पाण्डे, कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, पद्मश्री डॉ. ए.टी. दाबके, कुलपति छत्तीसगढ़ आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान, विश्वविद्यालय रायपुर, डॉ. वी.सी. माल, कुलपति स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई, डॉ. ए.आर. चन्द्राकर, कुलपति पं. सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर, पद्मश्री डॉ. सी.जे.के. नायर, कुलपति मैट्स विश्वविद्यालय, आरंग रायपुर, प्रो. ए.एस. झाडगांवकर, कुलपति डॉ. सी.वी.रमन, विश्वविद्यालय, कोटा, बिलासपुर, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री एम.के. राउत, श्री डी.एस. मिश्र, प्रमुख सचिव कृषि विभाग, श्री अजय सिंह, प्रमुख सचिव वित्त एवं योजना विभाग, श्री पी.सी. दलेई, राज्यपाल के प्रमुख सचिव, श्री आर.एस. शर्मा, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग, श्री नारायण सिंह, सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं जनशक्ति नियोजन, श्री विकासशील, सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, श्री टी.के. चक्रवर्ती, राज्यपाल के विधिक सलाहकार, श्री निरंजन दास, राज्यपाल के संयुक्त सचिव, कुल सचिव, गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर उपस्थित थे।
अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्र, अभिभावक, शिक्षक, विश्वविद्यालय, शासन एवं जनसामान्य प्रमुख कारक होते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र, अध्ययन की समुचित सुविधा, पाठयक्रम का समय सीमा में पूर्ण होना, समय पर परीक्षा का संपादन, मूल्यांकन एवं परिणाम चाहता है, वहीं अभिभावक अपने बच्चे के लिए उच्च गुणवत्तावाली शिक्षा, शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक शैक्षणिक गतिविधियां एवं वातावरण् चाहता है, जिससे उसके बच्चे का उज्ज्वल भविष्य हो सके। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों की समस्याओं का भी त्वरित हल निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों द्वारा अपने मूलभूत संसाधनों के माध्यम से ऐसे पाठयक्रम तैयार किए जाने चाहिए जो वर्तमान परिवेश में छात्रों की आवश्यकता एवं मांग के अनुरूप हों। राज्यपाल ने कहा कि शासन द्वारा विश्वविद्यालयों के लिए समय-सीमा में मूलभूत संरचनाओं के विकास के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ मार्गदर्शी दिशा-निर्देश दिए जाते हैं जिनका पालन सुनिश्चित होना चाहिए।
बैठक में राज्यपाल ने कहा कि महाविद्यालयों में शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक पदों की प्रतिपूर्ति शत्-प्रतिशत सुनिश्चित होने के साथ मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में पर्याप्त शिक्षकों के अलावा विजिटिंग फैक्लटी, विशेषज्ञों के माध्यम से शिक्षण, पर्याप्त एवं उपयोगी पुस्तकें, इंटरनेट सेवाओं के साथ-साथ विश्वविद्यालयीन शिक्षकों के प्रशिक्षण, उन्मुखीकरण एवं रिफ्रेशर कोर्स भी आयोजित होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विजिटिंग फैक्लटी को अनुभवी बनाने हेतु सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं विषय विशेषज्ञों को 70 वर्ष की आयु तक संविदा में नियुक्ति दी जा सकती है। इसके अलावा छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए खेलकूद, नेतृत्व क्षमता एवं अतिरिक्त पाठयक्रम सहगामी गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता बतायी। श्री दत्त ने कहा कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय जैसे समान कार्यक्षेत्रों वाले विश्वविद्यालयों के लिए कार्यवाही की दिशा एवं प्रक्रिया में एकरूपता होने से अनेक विसंगतियों से छुटकारा पाया जा सकता है।
राज्यपाल ने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों की अकादमिक कलेण्डर का अनुपालन, निजी एवं शासकीय महाविद्यालयों का सतत् निरीक्षण, विश्वविद्यालय का अद्यतन वेबसाईट, समयबध्द परीक्षा कार्य एवं शोध कार्य की गुणवत्ता को बनाये रखना, विद्यार्थियों की समस्याओं का निराकरण, श्रेष्ठ विद्यार्थी, शिक्षक एवं कर्मचारियों को पुरस्कार, विद्यार्थियों के लिए कोचिंग सुविधा, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों के लिए विशेष कोचिंग व्यवस्था करने पर भी जोर दिया। श्री दत्त ने कहा कि राज्य के समुचित एवं तेज विकास के लिए पर्याप्त मानव संसाधनों का समुचित विकास जरूरी है और इसके लिए विश्वविद्यालयों द्वारा नवाचार के माध्यम से यह कार्य पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकाधिक उपयोग कर हम राज्य एवं देश के विकास के लिए बेहतर और उपयोगी मानव संसाधन तैयार कर सकते हैं।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि तकनीकी विश्वविद्यालय में परीक्षा के समय एवं अकादमिक कैलेण्डर पालन किये जाने की सख्त आवश्यकता है ताकि छात्रगण विश्वविद्यालयीन परीक्षा के साथ-साथ अन्य प्रतियोगी परीक्षा में सम्मिलित हो सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर एवं सरगुजा विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की मदद से अपने संकायों को बेहतर प्रशिक्षण दिला सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के उत्तर-पूर्व के विश्वविद्यालय अलग-अलग विषयों खासकर वहां की संस्कृति एवं जनजातीय लोगों के जीवन से संबध्द विषयों पर शोध कार्य करते हैं। हमारे राज्य के बस्तर एवं सरगुजा के विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ की गौरवशाली आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, सभ्यता एवं संस्कृति पर बेहतर शोध कार्य कर सकते हैं और छात्रों को इन नये विषयों पर शोध करने के लिए प्रेरित भी किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ का इतिहास बहुत पुराना है और इसके बहुत से ऐसे पहलू हैं, जो अनछुए हैं और इसके लिए हमें केवल जमीन के ऊपर ही नहीं बल्कि जमीन के नीचे जाकर भी शोध कार्य कर जानकारी हासिल करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा एवं संस्कृति से जुड़े विषयों पर हमारे विश्वविद्यालय बेहतर शोध कार्य करेंगे।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ एवं आदिवासी अंचल में स्थित नये विश्वविद्यालयों की भूमिका अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है। इन क्षेत्रोें में स्थित महाविद्यालयों के छात्रों को बेहतर एवं उच्च गुण्ावत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए शासन प्रतिबध्द है। उन्होंने कहा कि बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्र के महाविद्यालयों को नेटवर्किंग कनेक्टिविटी (ई-क्लासेस) के माध्यम से अच्छे शिक्षकों एवं विषय विशेषज्ञों के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है। आगामी सत्र में यह सुविधा इन क्षेत्रों में उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरगुजा एवं बस्तर के विश्वविद्यालय विषय, पाठयक्रम एवं समय तय करें ताकि आगामी जुलाई सत्र से हम यह व्यवस्था शुरू कर सकें। उन्होंने इसके लिए महाविद्यालयों को चिन्हांकित करने हेतु कुलपतियों को निर्देश दिया।
समन्वय समिति की बैठक में पूर्व बैठकों के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा हुई। बैठक में शैक्षणिक सत्र 2010-2011 के लिए अकादमिक कैलेण्डर का अनुमोदन, राज्य के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों में शैक्षण्0श्निाक सत्र 2010-2011 में नामांकन प्रणाली द्वारा छात्रसंघ का गठन का अनुमोदन किया गया। इसके अलावा पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा एन क्रीमोनोलॉजी एण्ड फोंरेसिक साईंस में संशोधन एवं बैचलर ऑफ फार्मेसी में संशोधन, चार वर्षीय उपाधि पाठयक्रम को आठ सेमेस्टर के पाठयक्रम में किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन, मास्टर ऑफ आर्ट्स पर एप्लायड फिलोसॉफी इन योगा में संशोधन, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में नवीन पाठयक्रम एम.एस.डब्ल्यू, लागू करने एवं पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन थ्री-डी एनीमुवीज (एनीमेशन) लागू करने के प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया। इस अवसर पर प्रो. एस. जोशी, कुलपति, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, डॉ. एस.के. पाण्डे, कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, प्रो. गीता पेंटल, कुलपति इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, प्रो. जय लक्ष्मी ठाकुर, कुलपति बस्तर विश्वविद्यालय जगदलपुर, डॉ. एस.के. वर्मा, कुलपति सरगुजा विश्वविद्यालय अंबिकापुर, डॉ. एम.पी. पाण्डे, कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, पद्मश्री डॉ. ए.टी. दाबके, कुलपति छत्तीसगढ़ आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान, विश्वविद्यालय रायपुर, डॉ. वी.सी. माल, कुलपति स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई, डॉ. ए.आर. चन्द्राकर, कुलपति पं. सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर, पद्मश्री डॉ. सी.जे.के. नायर, कुलपति मैट्स विश्वविद्यालय, आरंग रायपुर, प्रो. ए.एस. झाडगांवकर, कुलपति डॉ. सी.वी.रमन, विश्वविद्यालय, कोटा, बिलासपुर, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री एम.के. राउत, श्री डी.एस. मिश्र, प्रमुख सचिव कृषि विभाग, श्री अजय सिंह, प्रमुख सचिव वित्त एवं योजना विभाग, श्री पी.सी. दलेई, राज्यपाल के प्रमुख सचिव, श्री आर.एस. शर्मा, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग, श्री नारायण सिंह, सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं जनशक्ति नियोजन, श्री विकासशील, सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, श्री टी.के. चक्रवर्ती, राज्यपाल के विधिक सलाहकार, श्री निरंजन दास, राज्यपाल के संयुक्त सचिव, कुल सचिव, गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर उपस्थित थे।
क्रमांक - 562/सांडिया/शुक्ल

