भविष्य में सुनहरे भारत का निर्माण होगा 'बायोटेक्नोलॉजी' से-श्री दत्त
भविष्य की जरूरतों के अनुसार बढ़ाएं कृषि उत्पादन-डॉ. रमन सिंह
कृषि वैज्ञानिक डॉ. खुश और डॉ. मंगला राय को डॉक्टर ऑफ साईन्स की मानद उपाधि प्रदान
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में पांचवें दीक्षांत समारोह का आयोजन
रायपुर, 20 जनवरी 2011

राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री शेखर दत्त ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पांचवे दीक्षांत समारोह का शुभारंभ किया। आज यहां विश्वविद्यालय परिसर में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री शेखर दत्त ने दीप प्रज्जवलित करके किया। समारोह में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. अय्यप्पन ने दीक्षांत भाषण दिया। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में और कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में विश्व के ख्याति प्राप्त कृषि वैज्ञानिक तथा छत्तीसगढ़ सहित देश के बड़े क्षेत्र में धान की लोकप्रिय किस्म आई.आर. 36, आई. आर. 64 के विकास में अहम् भूमिका निभाने वाले पद्मश्री प्राप्त वैज्ञानिक डॉ. जी.एस. खुश और राष्ट्रीय कृषि विज्ञान एकादमी के अध्यक्ष डॉ. मंगला राय को डॉक्टर ऑफ साईन्स की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रावीण्य सूची में स्थान लाने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किया। समारोह में स्नातक तथा स्नातकोत्तर के उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को कुलपति ने उपाधि प्रदान की।
राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने समारोह को संबोधित करते हुए कामना की कि छत्तीसगढ़ और देश की भूमि धन, धान्य एवं पुष्पों से परिपूर्ण बनी रहे। उन्होंने कहा हमारे देश की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, जिसकी लगभग 60 प्रतिशत आबादी कृषि और इससे जुड़े व्यवसायों पर आश्रित है। लेकिन देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान कम होता जा रहा है। इसे आगे बढ़ाने की सबसे ज्यादा जरूरत है। राज्यपाल ने कहा वर्तमान समय में इण्डिया टूडे (प्दकपं ज्वकंल) का तात्पर्य आई.टी. (प्दवितउंजपवद ज्मबीदवसवहल) समझा जाने लगा है क्योंकि इसने भारत और यहां के युवाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन बी.टी. (ठींतंज ज्वउवततवू) से तात्पर्य है बायो-टेक्नोलॉजी (ठपव.ज्मबीदवसवहल)। राज्यपाल ने कहा भविष्य के सुनहरे भारत का निर्माण 'बायोटेक्नोलॉजी' पर आधारित होगा।
राज्यपाल ने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सेवाएं देने के विश्वविद्यालय के युवाओं के जज्बे की सराहना की और कहा युवाओं पर आशा की उम्मीदें टिकी हैं। राज्यपाल ने यह भी कहा कि हमारे देश की माटी में डॉ. गुरूदेव सिंह खुश जैसे सपूत का जन्म हुआ है। जिन्होंने सबसे अधिक पैदावार वाली धान की फसल आई.आर. 36 की किस्म विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनका आज हमारे बीच इस कार्यक्रम में होना खुशी की बात है।
मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि देश एवं प्रदेश की बढ़ती हुई आबादी और आवश्यकताओं के अनुरूप हमें वर्ष 2020, 2030 और 2050 की कल्पना करते हुए उसी रफ्तार से कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हम इस कल्पना को साकार करना चाहते हैं। इसके लिए जहां पशुपालन, मत्स्यपालन, उद्यानिकी जैसे क्षेत्रों में बेहतर कार्य योजनाएं बनाकर कार्य करना चाहते हैं वहीं सिंचाई जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए केन्द्र शासन तथा कृषि अनुसंधान परिषद से भी निरन्तर सहयोग की जरूरत है। डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हमने 11.47 प्रतिशत का विकास दर प्राप्त किया है। अगर इसी तरह हम हर वर्ष एक प्रतिशत विकास दर बढ़ाते रहे तो छत्तीसगढ़ की खुशहाली हर हालत में तय है। उन्होंने कहा कि आज भी हमारा दलहन और तिलहन के साथ अनेक कृषि उपजों में राष्ट्रीय औसत से कम है। इसके लिए उन्होंने कृषि के विकास में कृषि वैज्ञानिकों एवं युवा विद्यार्थियों को आगे आने का आव्हान किया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. अय्यप्पन ने अपने दीक्षांत उद्बोधन में कहा कि वर्तमान में बी-स्कूल (ठनेपदमे ैबीववस) का जोर है। इसी तरह उन्होंने ए-स्कूल (।हतपबनसजनतम ैबीववस) की अवधारणा विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का धान के साथ-साथ विभिन्न फसलों की अनेक किस्में विकसित करने में अहम योगदान रहा है। विश्वविद्यालय के अनुसंधान कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यहां विकसित धान की 52 किस्में तथा जर्मप्लाज्म के 23,000 संग्रह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इस बात पर भी प्रसन्नता जाहिर की कि छत्तीसगढ़ राज्य में 11.5 प्रतिशत की उच्च विकास दर हासिल की गई है। उन्होंने कृषि के विकास के लिए सभी क्षेत्रों जैसे पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्यपालन, फूलों की खेती पर समन्वित होकर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे दूरस्थ अंचलों के किसानों ने भी कृषि के क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक पहल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा कि हमें कृषि के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को भारत का सिरमौर राज्य बनाना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति कृषि से जुड़ी है और यहां के किसान भी वैज्ञानिक दृष्टि रखते हैं। उन्होंने राज्य में कृषि के विकास के लिए केन्द्र से अधिक से अधिक मदद करने का आग्रह किया और आई.सी.ए.आर. की मदद से गन्ना अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम.के. पाण्डेय ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
युवाओं ने कहा कि 'हां' वे गांव जाकर सेवा करने को हैं तैयार
दीक्षांत भाषण के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. अय्यप्पन ने कृषि के क्षेत्र में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपािध प्राप्त करने वाले युवाओं से पूछा कि ष्।तम लवन त्मंकल जव हव टपससंहम घ्ष् तो विश्वविद्यालय के युवाओं ने उतने ही उत्साह और जोश के साथ कहा कि 'हां' वे किसानों की मदद और कृषि के विकास के लिए गांव जाकर सेवा देने को तैयार हैं। श्री अय्यप्पन ने भाषण के दौरान यह भी बताया कि इसी तरह पूरी देश की युवा कृषि की ओर लौट रहे हैं। कृषि शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं की संख्या बढ़ी है तथा पालक भी अपने बच्चों को कृषि शैक्षणिक संस्थाओं में भेजकर प्रसन्न होते हैं।

