मुंबई के नेहरू साइंस सेंटर में सारंगढ़ के बच्चे प्रस्तुत करेंगे विज्ञान नाटक
छात्र-छात्राओं ने राज्यपाल से भेंट की
रायपुर, 9 फरवरी 2011

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सारंगढ़ जैसे दूर-दराज क्षेत्र में रहने वाले स्कूली बच्चे मुंबई स्थित नेहरू साइंस सेंटर में 'साइंस ड्रामा' 'मैं नदी आसूं भरी' प्रस्तुत करेंगे। प्रदेश के राज्यपाल श्री शेखर दत्त से आज यहां राजभवन में सारंगढ के मोना मार्डन हायर सेकण्डरी स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भेंट की। राज्यपाल ने इन बच्चों को शुभकामनाएं दी और उनके प्रयासों की सराहना की। उल्लेखनीय है कि जल के संरक्षण और जल के प्रदुषण से जुड़ी हुई समस्या के प्रति लोगों को आगाह करती है, इस प्रस्तुति का चयन राष्ट्रीय स्तर पर हुआ है तथा राज्य की ओर से इस नाटक का चयन विज्ञान नाटक के लिए किया गया है। 2009 में भी संस्था के विज्ञान नाटक का चयन नेहरू साइंस सेंटर में होने वाले प्रतिस्पर्धा के लिए हुआ था जिसमें यहां के बच्चों ने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान अर्जित किया था।
बच्चों से बातचीत करते हुए राज्यपाल श्री दत्त ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि जल समस्या पर आधारित नाटक का प्रदर्शन लोगों में जल संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि देश में नदियों एवं अन्य जल स्त्रोतों के नाम देवी-देवताओं और माताओं के नाम पर रखे गये हैं और नदियों को उसी तरह का दर्जा देकर सम्मान के नजरिये से देखा जाना चाहिए।
श्री दत्त ने कहा कि ऐसे प्रयास होने चाहिए कि नदियों के उद्गम और जल स्त्रोत के साथ-साथ उनकी सहायक नदियों और उनमें मिलने वाले छोटे नदी-नालों में भी पानी भरपूर बना रहे और उसमें किसी भी तरह की गंदगी नहीं बहे। उन्होंने कहा कई बार ऐसा भ्रम होता है कि इन नदियों में कचरा या प्रदूषण फैलाने से किसी तीसरे का नुकसान हो सकता है अपना नहीं, लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत हैं और ऐसे कार्य हम सभी को किसी न किसी तरह से नुकसान अवश्य पहुंचाते है तथा इसका दुष्परिणाम सभी को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या के कारण केवल विश्व युध्द होने की आशंका नहीं है, बल्कि इससे गांव-गांव और लोग भी आपस में लड़ सकते हैं। जल के संरक्षण होने, नदियों के साफ-सुथरा और स्वच्छ होने का लाभ सभी को मिलेगा और इससे हिन्दुस्तानी होने का स्वाभिमान भी बढेग़ा।
इस अवसर पर संस्था के प्राचार्य श्री रितेश केशरवानी ने विज्ञान नाटक के उद्देश्यों तथा थीम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चे ही नदी, नाले, चिड़िया और अन्य प्राकृतिक चीजों को बनकर विभिन्न प्रतीकों के रूप में इसे प्रदर्शित करेंगे। इस अवसर पर साइंस ड्रामा के डायरेक्टर श्रीमती तोषी गुप्ता, छात्र कुमारी रागिनी गुप्ता, प्रज्ञा केशरवानी, सार्थक केशरवानी, अन्नू डनसेना, रश्मि जायसवाल, धनेश्वरी, खिरौद पटेल, रूपेश वैष्णव, मीनाक्षी जोल्हे और विद्या तथा शिक्षक अक्षय गुप्ता उपस्थित थे।
बच्चों से बातचीत करते हुए राज्यपाल श्री दत्त ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि जल समस्या पर आधारित नाटक का प्रदर्शन लोगों में जल संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि देश में नदियों एवं अन्य जल स्त्रोतों के नाम देवी-देवताओं और माताओं के नाम पर रखे गये हैं और नदियों को उसी तरह का दर्जा देकर सम्मान के नजरिये से देखा जाना चाहिए।
श्री दत्त ने कहा कि ऐसे प्रयास होने चाहिए कि नदियों के उद्गम और जल स्त्रोत के साथ-साथ उनकी सहायक नदियों और उनमें मिलने वाले छोटे नदी-नालों में भी पानी भरपूर बना रहे और उसमें किसी भी तरह की गंदगी नहीं बहे। उन्होंने कहा कई बार ऐसा भ्रम होता है कि इन नदियों में कचरा या प्रदूषण फैलाने से किसी तीसरे का नुकसान हो सकता है अपना नहीं, लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत हैं और ऐसे कार्य हम सभी को किसी न किसी तरह से नुकसान अवश्य पहुंचाते है तथा इसका दुष्परिणाम सभी को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या के कारण केवल विश्व युध्द होने की आशंका नहीं है, बल्कि इससे गांव-गांव और लोग भी आपस में लड़ सकते हैं। जल के संरक्षण होने, नदियों के साफ-सुथरा और स्वच्छ होने का लाभ सभी को मिलेगा और इससे हिन्दुस्तानी होने का स्वाभिमान भी बढेग़ा।
इस अवसर पर संस्था के प्राचार्य श्री रितेश केशरवानी ने विज्ञान नाटक के उद्देश्यों तथा थीम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चे ही नदी, नाले, चिड़िया और अन्य प्राकृतिक चीजों को बनकर विभिन्न प्रतीकों के रूप में इसे प्रदर्शित करेंगे। इस अवसर पर साइंस ड्रामा के डायरेक्टर श्रीमती तोषी गुप्ता, छात्र कुमारी रागिनी गुप्ता, प्रज्ञा केशरवानी, सार्थक केशरवानी, अन्नू डनसेना, रश्मि जायसवाल, धनेश्वरी, खिरौद पटेल, रूपेश वैष्णव, मीनाक्षी जोल्हे और विद्या तथा शिक्षक अक्षय गुप्ता उपस्थित थे।
क्रमांक-6160/शुक्ल

