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हर देश और हर व्यक्ति का मुद्दा है पर्यावरण-राज्यपाल श्री दत्त

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'वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पर्यावरण' विषय पर दक्षिण एशियाई कांफ्रेंस का शुभारंभ

रायपुर 25 मार्च 2011

6702-250311

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने आज यहां हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय द्वारा 'वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पर्यावरण' विषय पर तीन दिवसीय दक्षिण एशियाई कांफ्रेंस का शुभारंभ किया। सेमीनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति से आज हर देश और हर व्यक्ति चिंतित है। दुनिया भर में पर्यावरण पर प्राथमिकता के साथ जोर दिया जाने लगा है क्योंकि सुरक्षा के साथ-साथ यह सभी प्राणियों, वनस्पतियों के जीवन और अस्तित्व से भी जुड़ा है। हाल ही में जापान में आए भूकंप और उसके बाद सुनामी तथा भारत में कुछ वर्ष पूर्व आए सुनामी ने इस बात को फिर से रेखांकित किया है कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है। आपदाएं कहीं भी आ आकर नागरिकों के जान-माल को नुकसान पहुंचा सकती है जिनसे सुरक्षित बचकर निकलना बेहद कठिन है। और, यही कारण है कि आज पर्यावरण का संरक्षण, सुधार और विकास का मुद्दा विश्व का प्रमुख मुद्दा बन गया है।
    राज्यपाल ने आगे कहा कि विकास के दौड़ में लगे राष्ट्रों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके विकास गतिविधियों से पर्यावरण के संतुलन पर दुष्प्रभाव पड़े और हम विकास के साथ-साथ भावी पीढ़ी को अच्छा पर्यावरण देने में सक्षम रहे। इसके लिए जन जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि एशिया सहित यूरोप के विभिन्न देशों के तापमान में वृध्दि हुई है। यह मानव समुदाय के लिए एक चेतावनी की तरह है कि वे पर्यावरण संरक्षण और सुधार के लिए सचेत हो जाए।
    पर्यावरण संरक्षण में चिपको आंदोलन की भूमिका को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार का अभिनव गांधीवादी तरीकों का इस्तेमाल कर पर्वतीय क्षेत्र के पर्यावरण को बचाने का प्रयत्न किया गया। उन्होंने पर्यावरण के ही एक महत्वपूर्ण अंग पानी का उल्लेख करते हुए कहा कि जल एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जिस पर समस्त प्राणियों का अस्तित्व निर्भर है। इसके बाद भी दुनिया के लाखों लोगों को स्वच्छ पानी के अभाव में विभिन्न बीमारियों से जुझना पड़ता है। पानी जैसी प्राथमिक चीज के लिए कई किलोमीटर की दूरी भी तय करनी पड़ती है। ऐसे सभी महत्वपूर्ण संसाधनों के समुचित उपयोग करते हुए उसे भावी पीढ़ी को सौंपना चाहिए।
    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ लोक आयोग के लोकायुक्त जस्टिस श्री एल.सी. भादु ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उच्चतम न्यायालय एवं राज्यों के उच्च न्यायालयों में उल्लेखित विभिन्न मुद्दों एवं उनक निर्णयों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा की साफ पानी और साफ वायु पर हर नागरिक का अधिकार है। विकास का हर कार्य पर्यावरण संरक्षण के साथ किया जाना चाहिए। जमीन और समुद्र से जुड़े संसाधनों का उल्लेख करते श्री भादु ने कहा कि मनुष्य की असीम लालसाओं ने मृदा अपरदन, जल, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण के अलावा वैश्विक स्तर पर तापमान में बढ़ोत्तरी की है। पर्यावरण प्रदूषण के इको सिस्टम पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है तथा यह चेतावनी का संकेत कर रहा है। बढ़ते प्रदूषण से निपटना निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण कार्य है। देश में संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से अनेक कानून बनाएं गए है, जिनसे पर्यावरण का संरक्षण संभव है। उन्होंने जनसामान्य में पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने पर बल दिया।
    हिदायतुल्लाह नेशनल विधि विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति श्री आनंद पवार ने कांफे्रंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. शीला राय ने भी अपने विचार रखे। नेशनल ला युनिवर्सिटी, भोपाल के प्रोफेसर व्ही.के. दीक्षित ने कहा कि पर्यावरण के सुरक्षा के लिए समय रहते सचेत होने की जरूरत है।उन्होंने हाल में ही जापान में हुई न्यूक्लियर घटना तथा नागासाकी-हिरोसीमा की परमाणु घटना से हुए पर्यावरणीय क्षति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा की जितनी जिम्मेदारी विकासशील एवं गरीब देशों की है उतनी ही जिम्मेदारी विकसित तथा अमीर देशों की भी है।
कार्यक्रम में प्रोफेसर हनुमंत यादव, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, देश के विभिन्न भागों से आये विधि एवं पर्यावरण के विशेषज्ञों के अलावा बड़ी संख्या में छात्रगण भी उपस्थित थे।

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