मलेरिया नियंत्रण के लिए लार्वा भक्षी मछलियों का पालन होगा
जल स्रोतों का चिन्हांकन करने के निर्देश
रायपुर 23 जून 2011
छत्तीसगढ़ में मलेरिया के प्रभावी नियंत्रण के लिए इस वर्ष बड़े पैमाने पर लार्वा भक्षी मछलियों का पालन किया जाएगा। इसके लिए जलस्रोतों का चिन्हांकन किया जा रहा है। मत्स्योद्योग संचालनालय के अधिकारी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग प्रत्येक विकासखंड के पन्द्रह से बीस गांवों के बीच स्थित तालाबों में गम्बूजिया एफिनिस, गप्पी और तिलापिया मोजाम्बिया लार्वा भक्षी मछलियों का पालन करेंगे। स्वास्थ्य विभाग, मत्स्योद्योग द्वारा पालित लार्वा भक्षी मछलियां लेकर गांव के ऐसे गढ़ढ़ों, जहां पानी भर जाता वहां डाल दिया जाएगा। ये मछलियां गंदे पानी में पनपने वाले मच्छरों के लार्वा को खा जाएंगी। इससे मच्छरों के घनत्व को कम करने में मदद मिलेगी। संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं ने इस संबंध में एक परिपत्र जारी सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
परिपत्र में कहा गया है कि सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारी, सहायक मत्स्य अधिकारी और मत्स्य निरीक्षकों से समन्वय कर गांवों में गम्बूजिया मछली पालन के लिए तालाबों का चिन्हांकन की कार्रवाई करेंगे। सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया जाए कि वे मितानिनों के माध्यम प्रत्येक गांव के जल स्रोतों की सूची बनाए। जल स्रोतों की सूची उपलब्ध हो जाने से वहां मछलियां डालने में आसानी होगी। खंड चिकित्सा अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी मत्स्य अधिकारियों के परामर्श से मछलियों के वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि बहते पानी और भारी वर्षाकाल के दौरान मछलियां जल स्रोतों में ना छोड़ी जाए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में दो तरह के मच्छर पाए जाते हैं। एनाफिलिस क्यूलिसिस एसी मच्छर सामान्यत: घर के भीतर ही रहते हैं और मच्छर नाशक दवा के छिड़काव से इन पर नियंत्रण पाया जा सकता है, लेकिन एनाफिलिस फ्लूटेलिस मच्छर घर के बाहर रहते हैं। गम्बूजियां मछलियों के माध्यम से इस तरह के मच्छरों के घनत्व को कम करने में मदद मिलेगी।
क्रमांक-1377/कुशराम

