मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना : सैकड़ों बच्चों का खुशहाल हुआ जीवन
अब तक 1717 बच्चों के हृदय का सफल आपरेशन
रायपुर 19 जुलाई 2011
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना ने प्रदेश के सैकड़ों बच्चों का बचपन खुशहाल बना दिया है। गरियाबंद की अंजली, रायपुर की पल्लवी मिश्रा, सुपेला की पायल गजभिये और भिलाई की श्रृष्टि मिश्रा जैसे सैकड़ों बच्चे जो कभी अपनी दिल की बामारी के कारण ठीक से खेल भी नहीं पाते थे, आज वे अपना बचपन दूसरे बच्चों की तरह हंसते-खेलते गुजार रहे हैं। ये सभी बच्चे अपने
खेलने-कूदने की उम्र में हृदय की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना के माध्यम से प्रदेश के हृदय रोग से पीड़ित एक हजार 717 बच्चों के हृदय का नि:शुल्क आपरेशन हो चुका है, जबकि लगभग छह सौ बच्चों को आपरेशन के लिए अनुबंधित अस्पतालों में भेजा गया है। अब तक जिन बच्चों का आपरेशन हो चुका है, उनके लिए राज्य सरकार द्वारा संबंधित अस्पतालों को लगभग बीस करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है।
राज्य सरकार द्वारा हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के आपरेशन के लिए प्रदेश के छह अस्पतालों को अनुबंधित किया गया है। अब तक अनुबंधित अस्पताल अपोलो बी.एस.आर. भिलाई में 457, एस्कार्ट्स हार्ट सेंटर रायपुर में 403, रामकृष्ण केयर अस्पताल रायपुर में 514, अपोलो अस्पताल बिलासपुर में 250 , एम.एम.आई. अस्पताल रायपुर में 04 और श्री बालाजी सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल रायपुर में दस बच्चों का सफल आपरेशन हो चुका है। इसके अलावा 79 बच्चों के हृदय का प्रदेश के बाहर के अस्पतालों में आपरेशन कराया गया है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गरीबी रेखा की सीमा का कोई बंधन नहीं रखा गया है। राज्य शासन द्वारा हृदय के सामान्य अथवा साधारण सर्जरी के लिए अधिकतम एक लाख तीस हजार और यदि हृदय का वाल्व बदला जाता है, तो उसके लिए अलग से अधिकतम 50 हजार रूपए की राशि अस्पताल प्रबंधन को दी जाती है। मरीज के पंजीयन और भर्ती की प्रक्रिया से लेकर इलाज तक अधिकतम 20 दिन तक की जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रबंधन की होती है। मरीज के साथ आए परिवार के अधिकतम दो सदस्यों के रूकने एवं खाने की व्यवस्था और मरीज को लाने-ले जाने के लिए स्थानीय यातायात की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन द्वारा अनिवार्य रूप से की जाती है।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन पत्र सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक अथवा स्वास्थ्य संचालनालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। आवेदन पत्र में गरीबी रेखा में नाम होने की सूची अथवा आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का प्रमाण और बीमारी के संबंध में सिविल सर्जन के प्रमाण पत्र के पश्चात आवेदक को चार दिनों के भीतर इलाज के लिए उनकी सुविधा अनुसार अनुबंधित अस्पतालों में भेज दिया जाता है।

